
पोहा एक ऐसा पकवान है जिसे पूरे भारत में नाश्ते और स्नैक के तौर पर खाया जाता है। इसे बनाने के लिए चपटे या कुटे हुए चावल को उपयोग में लाया जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए पोहा बहुत अच्छा होता है ।
पोहा बनाने के लिए चपटे या कुटे हुए चावल को इस्तेमाल में लाया जाता है। कच्चे चावल को पानी में भिगोया जाता है, भूना जाता है और उसके बाद छिलके अलग कर दिए जाते हैं । इसके बाद चावल को चपटा करने के लिए रोलर में डाला जाता है । फिर चावल को सुखाया जाता है और दबाकर चपटे चावल में तब्दील किया जाता है ।
सफेद पोहा, सफेद चावल से बनाया जाता है। कार्बोहाईड्रेट की भरपूर मात्रा और पचने में आसान होना इसे एक पसंदीदा व्यंजन बनाते हैं।
लाल पोहा बनाने के लिए लाल चावल का उपयोग किया जाता है, जिसमे आयरन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसका स्वाद मेवों की तरह होता है और इसे पकाने में सफेद पोहे से ज़्यादा समय लगता है ।
ब्राउन पोहे में आयरन, पोटेशियम और फायबर होता है, क्योंकि यह ब्राउन चावल से बनाया जाता है।
प्रेगनेंसी में पोहा बहुत अच्छा होता है और प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए इसका सेवन सुरक्षित होता है। यह आसानी से हज़म हो जाता है और उन गर्भवतियों के लिए बहुत अच्छा है जो बीमार महसूस करती हैं और जिन्हे उल्टी/मतली करने का मन होता रहता है।
पोहा में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और इसमें ढेर सारा फाइबर होता है। इसलिए, यह ब्लड में ग्लूकोज के मिलने को धीमा करके ब्लड-शुगर लेवल को स्थिर रखता है।
पोहा प्रोबायोटिक्स का एक अच्छा स्रोत है, क्योंकि इसे पकाने से पहले भिगोया जाता है, यह फूलता है और हमारी आंतों और हाज़मे के लिए अच्छे बैक्टीरिया को बचाकर रखता है।
पोहा मुख्य तौर पर कार्बोहाईड्रेट से बना होता है। कार्ब एक गर्भवती महिला को वो एनर्जी देते हैं जिसकी उसे पूरे दिन ज़रूरत होती है।
पोहा पचने में आसान होता है इसलिए इससे एसिडिटी नहीं होती है।
पोहे में आयरन, मैंगनीज और जिंक जैसे मिनरल भरपूर होते हैं, ये सभी बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हालाकी पोहा पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसके बावजूद इसमें कैलोरी कम होती है और यह गर्भवती महिला का वजन बिला वजह बढ़ने से रोक सकता है।
पोहे में मौजूद आयरन गर्भवती महिला को एनीमिया से बचाता है ।
ग्लूटेन की कम मात्रा के कारण, प्रेगनेंसी में पोहा उन महिलाओं के लिए बढ़िया विकल्प है जिन्हे ग्लूटेन से परहेज़ है ।
प्रेगनेंसी में पोहा नाश्ते और स्नैक के तौर पर खाने के लिए एक अच्छा विकल्प है क्योंकि:
1. उपलब्धता (Accessibility)
पोहा किसी भी राशन की दुकान में आसानी से मिल जाता है ।
2. वाजिब दाम में मिल सकता है (Can be purchased at a reasonable cost)
कोई बहुत ही उचित दाम में पोहा खरीद सकता है ।
3. बनाने में आसान (Easy to make)
पोहे की सभी डिश बनाने में आसान होती हैं, यहाँ तक की कुकिंग नहीं जानने वाला व्यक्ति भी इसे बना सकता है।
4. अनुकूलन क्षमता (Adaptability)
पोहे की डिश को ज़्यादा पौष्टिक बनाने के लिए इसमें कुछ सब्जियां, सोया, उबले अंडे या बादाम मिला सकते हैं ।
5. मेन्यू में कई विकल्प (Extensive Menu Options)
पोहे को कई लज़ीज़ डिश बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं ।
जो महिलाएं गर्भवती हैं उन्हें हेल्दी फूड ऑप्शन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसलिए, एक गर्भवती महिला को हाई क्वालिटी वाले ऑर्गैनिक चावल से बने लाल या ब्राउन पोहे का चुनाव करना चाहिए। पोहा को किसी पारदर्शी कन्टेनर में भर कर रख दीजिये ताकि उसकी गुणवत्ता को परखा जा सके।
सामग्री (Ingredients)
पोहा को नरम करने के लिए 15 मिनट के लिए भिगोने की जरूरत होती है। इस स्टेप में जल्दबाज़ी ना करें ; मिलाने के बाद सामग्री को सैट होने के लिए 5 मिनट का समय दें।
सामग्री (Ingredients)
पोहे को कम से कम 15 मिनट के लिए भिगो दें। अतिरिक्त पानी फेंक दें। गरम तेल में जीरा, उरद दाल और राई डालिये. आलू और हरी मिर्च को गोल्डन ब्राउन होने तक तल लीजिए. पोहा, हल्दी और स्वादानुसार नमक मिलाएं। एक नींबू का रस डाल कर मिला लें।
सामग्री (Ingredients)
पोहे को भिगोने के बाद इसमे सभी सामग्री मिला दें और 10 मिनिट के लिए सैट होने दें ।
इसे भी पढ़ें - गर्भावस्था में दही: इसके फ़ायदे और नुकसान
Ans. गर्भवती महिलाओं के लिए गर्भावस्था के दौरान पोहा न केवल एक पौष्टिक और सुरक्षित स्नैक है, साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है और यह पचने में आसान होता है। उन गर्भवती महिलाएं को अक्सर पोहा खाने से बहुत राहत मिलती है जो बीमार हैं, खास तौर पर मतली और उल्टी से पीड़ित हैं।
Ans. प्रेगनेंसी के दौरान पोहा एक स्नैक है जिसे किसी भी समय खा सकते हैं। फिर भी सुबह सबसे पहले या देर रात में इसे खाना सबसे अच्छा माना जाता है ।
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