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    Ovulation in Hindi | गर्भधारण के लिए ज़रूरी है ओव्यूलेशन जानें कैसे करते हैं इसे ट्रैक

    Ovulation

    Ovulation in Hindi | गर्भधारण के लिए ज़रूरी है ओव्यूलेशन जानें कैसे करते हैं इसे ट्रैक

    23 February 2024 को अपडेट किया गया

    फीमेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम में प्रेग्नेंसी और ओव्यूलेशन (ovulation meaning in hindi) एक दूसरे से जुड़ी हुई प्रक्रिया है. यह हर एक मेंस्ट्रूअल साइकिल (menstrual cycle) में एक बार होती है जिस दौरान गर्भधारण की संभावनाएँ बेहद बढ़ जाती हैं. फैमिली प्लान करने वाले कपल्स को यदि ओव्यूलेशन (ovulation in hindi) की पूरी जानकारी हो और हर महीने वो इसे ट्रैक करें तो इससे उन्हें बिना रुकावट नेचुरल तरीक़े से गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है.

    ओव्यूलेशन क्या होता है? (What is ovulation in Hindi)

    महिलाओं में मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान हर बार ओवरीज़ से एग निकलता है और ट्रेवल करते हुए फैलोपियन ट्यूब (fallopian tubes) में आता है. एग रिलीज़ होने की इस प्रक्रिया को ओव्यूलेशन (Ovulation meaning in Hindi) कहते हैं और इस दौरान अगर सेक्स होता है तो स्पर्म्स इस अंडे से जाकर मिलते हैं और अंडा फर्टिलाइज़ हो जाता है. ये फर्टिलाइज्ड एग अब आगे यूट्रस की ओर बढ़ता है और उसकी अंदरूनी सतह में जाकर चिपक जाता है जिसे इंप्लांटेशन (implantation) कहते हैं और इसके बाद प्रेग्नेंसी कंफर्म हो जाती है. फर्टिलाइज़ेशन न होने पर यह अंडा टूट जाता है और मेंस्ट्रुएशन के दौरान गर्भाशय की सतह भी टूट कर पीरियड्स के रूप में बाहर निकल जाती है. ओव्यूलेशन (ovulation time in hindi) वाकई महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रेग्नेंसी ओव्यूलेशन के दौरान निकालने वाले एग के बिना नहीं हो सकती.

    ओव्यूलेशन को कैसे करें ट्रैक? (How to track ovulation in Hindi)

    ओव्यूलेशन (ovulation period in hindi) को आप कई तरीक़ों से ट्रैक कर सकते हैं. आइये जानते हैं इन में से कुछ सबसे ज़्यादा प्रचलित तरीक़ों के बारे में.

    1. मेंस्ट्रूअल साइकिल कैलकुलेशन (Menstrual cycle calculation)

    इस तरीक़े में आप अपने मेंस्ट्रूअल साइकिल की डेट्स को नोट करें और उसके बाद के दिनों की गिनती से अपने ओव्यूलेशन डेट का पता लगा सकते हैं. अमूमन ये पीरियड्स शुरू होने के बारहवें या सोलहवें दिन के बीच में होता है.

    2. बेसल बॉडी टेम्परेचर (Basel Body Temperature)

    इसके लिए आप रोज़ सुबह उठने के बाद अपना बॉडी टेम्परेचर लें. क्योंकि ओव्यूलेशन के दौरान बीटी में थोड़ी बढ़ोतरी होती है इसलिए बीटी बढ़ने का मतलब है ओव्यूलेशन की संभावना.

    3. ओव्यूलेशन ट्रैकिंग एप्स (Ovulation Tracking Apps)

    टेक्नोलॉजी के इस जमाने में आप स्मार्टफोन एप्स की मदद से भी अपने ओव्यूलेशन की एक्सपेक्टेड डेट और फर्टाइल डेज़ का पता लगा सकते हैं.

    इसके अलावा ओव्यूलेशन डेट का पता लगाने का एक और आसान तरीक़ा है ओव्यूलेशन किट. आइये जानते हैं क्या होती है ओव्यूलेशन किट (Ovulation kit kya hoti hai) और इसका इस्तेमाल कैसे किया (Ovulation kit ko kese use karte hai?) जाता है.

    ओव्यूलेशन टेस्ट किट क्या होती है? (What is an ovulation test kit in Hindi)

    ओव्यूलेशन किट (ovulation kit use in Hindi) बाज़ार में मिलने वाली एक डिवाइस है जिससे ओव्यूलेशन की संभावित तारीख की पहचान करने में मदद मिलती है. इस किट के दो हिस्से होते हैं. पहला, एक खास तरह के एन्जाइम से बना हुआ कप और एक ओव्यूलेशन स्ट्रिप. इस में यूरिन सैंपल के द्वारा ओव्यूलेशन का पता लगाया जा सकता है. आइये अब जानते हैं कि ओव्यूलेशन टेस्ट किट कैसे काम करती है.

    ओव्यूलेशन टेस्ट किट कैसे काम करती है? (How does ovulation kit work in Hindi)

    यह टेस्ट किट (Ovulation test kit) एक खास तरह के हॉर्मोन की पहचान के लिए बनाई गयी है जो किसी भी महिला के शरीर में ओव्यूलेशन के दौरान पैदा होता है. इसे लुटेनाइजिंग हार्मोन (एलएच) कहा जाता है और यूरिन के सैंपल को किट में डालकर इसके बढ़े हुए लेवल को मापा जाता है. एलएच का बढ़ा हुआ लेवल ओव्यूलेशन की तारीख के आसपास होने का संकेत देता है. इस किट से सही नतीजे प्राप्त करने के लिए ये ज़रूरी है कि आप इसका इस्तेमाल सही तरह से करें. अब आपको बताते हैं इसको यूज़ करने का सही तरीका.

    ओव्यूलेशन टेस्ट किट को कैसे करें इस्तेमाल? (How to use ovulation kit in Hindi)

    ओव्यूलेशन किट का इस्तेमाल करना (Ovulation kit use in Hindi) बहुत ही आसान है. ओव्यूलेशन टेस्ट किट (Ovulation kit) का उपयोग करने से पहले आपको बस इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

    • इसके इस्तेमाल का थंब रूल है सही समय और तारीख़ का चुनाव. इसके लिए अपने पीरियड्स की डेट से 10-14 दिन गिनें क्योंकि इसी बीच ओवेरीज़ से एग रिलीज़ होगा.

    • टेस्ट किट का इस्तेमाल साफ़ और स्वच्छ जगह पर ही करें.

    • यूरिन सैंपल लेने के लिए एक साफ़ ट्रांसपेरेंट कप या कलेक्शन कंटेनर लें.

    • अब किट पर दिये गए निर्देशों के अनुसार यूरिन सैंपल को टेस्ट स्ट्रिप पर डालें और कुछ सेकंड तक इंतज़ार करें.

    • अंत में टेस्ट स्ट्रिप पर पॉजिटिव या नेगेटिव रिजल्ट्स को चेक करें.

    तो अब आप जान गए होंगे कि ओव्यूलेशन किट क्या होता (Ovulation kit kya hoti hai) और इसे कैसे यूज़ करते हैं (Ovulation kit ko kese use karte hai?). आगे हैं ओव्यूलेशन से जुड़े कुछ सवालों के जवाब.

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    1. ओव्यूलेशन के लक्षण क्या होते हैं? (What are the symptoms of ovulation?)

    जवाब : ओव्यूलेशन के दौरान शरीर में होने वाले लक्षण (ovulation symptoms in Hindi) हर महिला में अलग हो सकते हैं जैसे कि-

    1. सर्विकल म्यूकस का चिकना, ट्रांसपेरेंट और सामान्य से पतला हो जाना जिससे स्पर्म मूवमेंट में मदद मिल सके.
    2. लोअर एब्डोमेन में दर्द होना
    3. बेसल बॉडी टेम्परेचर का बढ़ना
    4. ब्रेस्ट में हल्का दर्द
    5. सेक्स की इच्छा बढ़ना

    2. क्या ओव्यूलेशन किट से प्रेग्नेंसी का पता लगा सकते हैं? (Can ovulation kit detect pregnancy?)

    जवाब : जी नहीं, ओव्यूलेशन किट से प्रेग्नेंसी का पता नहीं लग सकता. ओव्यूलेशन किट से आप को अपने फर्टाइल पीरियड का पता चलता है और अगर आप प्रेग्नेंसी की जाँच करना चाहते हैं, तो आपको प्रेग्नेंसी टेस्ट किट का यूज़ करना होगा.

    3. बिना किट के घर पर कैसे करें ओव्यूलेशन चेक? (How to check ovulation at home without kit?)

    जवाब: अगर आपके पास किट उपलब्ध नहीं है तो आप इन तरीक़ों और लक्षणों के आधार पर ओव्यूलेशन का पता लगा सकते हैं.

    1. पीरियड्स डेट्स को ट्रैक करना (tracking the menstrual dates) - अपने पीरियड्स की तारीख 2 से 3 महीने तक बारीकी से ट्रैक करें और इसके 10 से 12 दिन के बाद आपके ओव्यूलेशन की डेट होगी. इस तारीख़ को आप अपने शरीर में आ रहे बदलावों के साथ भी मैच करें.
    2. बेसल बॉडी टेम्परेचर (Taking Basel body temperature - BBT) - हर सुबह एक डिजिटल थर्मोमीटर से अपने बॉडी टेम्परेचर को चैक करके भी आप ओव्यूलेशन का पता लगा सकते हैं जो ओव्यूलेशन होते ही थोड़ा बढ़ जाएगा.
    3. शारीरिक बदलाव पर नज़र रखें (Observing physical changes) - ओव्यूलेशन के दौरान अक्सर कुछ शारीरिक लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे कि पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द होना, सेक्स की इच्छा का बढ़ जाना, ब्रेस्ट में हल्का पेन होना इत्यादि.

    इसे भी पढ़ें : लेट ओव्यूलेशन के क्या कारण होते हैं?

    प्रो टिप (Pro Tip)

    अगर आप बेबी प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको अपने ओव्यूलेशन के दिनों की सटीक जानकारी होने से गर्भधारण में बहुत मदद मिल सकती है. जहाँ घरेलू तरीक़ों से ओव्यूलेशन का सिर्फ़ अनुमान लगाया जा सकता है वहीं सटीक नतीजों के लिए आप ओव्यूलेशन टेस्ट किट (Ovulation test kit) का प्रयोग करें जिससे इसे बारीकी से ट्रैक करने में मदद मिलेगी.

    रेफरेंस

    1. Su HW, Yi YC, Wei TY, Chang TC, Cheng CM. (2017). Detection of ovulation, a review of currently available methods.

    2. Johnson S, Stanford JB, Warren G, Bond S, Bench-Capon S, Zinaman MJ. (2020). Increased Likelihood of Pregnancy Using an App-Connected Ovulation Test System: A Randomized Controlled Trial.

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