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    Low Sperm Count Meaning in Hindi | स्पर्म काउंट कम होने पर दिखते हैं इस तरह के संकेत!

    Fertility Problems

    Low Sperm Count Meaning in Hindi | स्पर्म काउंट कम होने पर दिखते हैं इस तरह के संकेत!

    20 February 2024 को अपडेट किया गया

    Medically Reviewed by

    Dr. Shruti Tanwar

    C-section & gynae problems - MBBS| MS (OBS & Gynae)

    View Profile

    मेल इनफर्टिलिटी के अधिकांश मामलों में शुक्राणुओं की कमी एक मुख्य कारण है जिसे ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia) भी कहा जाता है. लो स्पर्म काउंट एक मेडिकल कंडीशन है जिसमें वीर्य (Semen) में शुक्राणुओं (Sperm) की संख्या सामान्य से कम हो जाती है और इसका असर फर्टिलिटी पर पड़ने लगता है. हालाँकि इसकी कोई स्टेंडर्ड कटऑफ संख्या नहीं है लेकिन सामान्यतः प्रत्येक मिलीलीटर वीर्य में 15 मिलियन से कम स्पर्म का होना लो स्पर्म काउंट (low sperm count in Hindi) माना जाता है. ओलिगोस्पर्मिया (Oligospermia) के कई कारण हो सकते हैं. आइये इन्हें विस्तार से समझते हैं.

    लो स्पर्म काउंट के क्या कारण होते हैं(Low sperm count causes in Hindi)Top of Form

    लो स्पर्म काउंट के कुछ मुख्य कारण (Reason of low sperm count in Hindi) इस प्रकार हैं;

    1. वैरिकोसेल (Varicocele)

    इसमें स्क्रोटम (scrotum) के भीतर की नसों का साइज़ बढ़ जाता है जिससे टेस्टिकल्स में स्पर्म की संख्या कम होने लगती है.

    2. हार्मोनल असंतुलन (Hormonal imbalances)

    हार्मोनल विकार जैसे हाइपोगोनाडिज्म (hypogonadism), हाइपरप्रोलैक्टिनीमिया (hyperprolactinemia) और थायराइड इंबैलेंस (thyroid problems) स्पर्म काउंट को प्रभावित कर सकते हैं.

    3. इंफेक्शन (Infections)

    इन्फेक्शन; जैसे कि एपिडीडिमाइटिस (epididymitis), क्लैमाइडिया (chlamydia) या गोनोरिया (gonorrhea) जैसी सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के कारण भी स्पर्म काउंट में कमी आ सकती है.

    4. स्खलन से जुड़ी समस्याएँ (Ejaculation problems)

    रेट्रोगेट इजेकुलेशन (retrograde ejaculation) जैसी समस्याएँ भी स्पर्म काउंट में कमी लाती हैं.

    इसे भी पढ़ें : स्पर्म मोटिलिटी का क्या होता है फर्टिलिटी से कनेक्शन?

    5. टेस्टिकल से जुड़ी समस्याएँ (Testicular issues)

    अंडकोष का न उतरना (cryptorchidism), टेस्टिकल्स में चोट लगना (testicular injury) या फिर टेस्टिकल्स का कैंसर (testicular cancer) और इसकी सर्जरी, रेडिएशन या कीमोथेरेपी के कारण भी स्पर्म काउंट प्रभावित हो सकता है.

    लो स्पर्म काउंट के कारण (causes of low sperm count in Hindi) जानने के बाद आइये अब जानते हैं कि लो स्पर्म काउंट की समस्या के क्या लक्षण (low sperm count symptoms in Hindi) होते हैं.

    लो स्पर्म काउंट के क्या संकेत होते हैं (Low sperm count signs in Hindi)

    लो स्पर्म काउंट को इन संकेतों (Symptoms of low sperm count in Hindi) से पहचाना जा सकता है.

    1. गर्भधारण करने में कठिनाई (Difficulty conceiving)

    शुक्राणुओं की संख्या में कमी आने पर सबसे पहले प्रेग्नेंसी में रुकावट आने लगती है.

    2. स्खलन की मात्रा में कमी (Changes in ejaculate volume)

    यदि स्खलन के दौरान वीर्य की मात्रा बेहद कम हो जाए तो यह भी शुक्राणुओं में कमी का संकेत हो सकता है.

    3. लो सेक्सुअल ड्राइव या इरेक्शन न हो पाना (Reduced sexual desire or difficulty achieving an erection)

    कई बार हार्मोनल असंतुलन या किसी अंडरलाइन मेडिकल कंडीशन के कारण भी शुक्राणुओं की संख्या में कमी आ जाती है.

    4. टेस्टिकल से जुड़ी असामान्यताएं (Testicle abnormalities)

    कुछ मामलों में लो स्पर्म काउंट वाले पुरुषों में टेस्टिकल्स सामान्य से छोटे होते हैं या उनमें गांठें हो सकती हैं जो एक असामान्यता का संकेत है.

    इसे भी पढ़ें :प्री-इजैक्युलेशन फ्लूइडः क्या प्री-इजैक्युलेशन से प्रेगनेंसी हो सकती है

    लो स्पर्म काउंट होने पर कैसे होता है फर्टिलिटी पर असर? (Impact of low sperm count on male fertility in Hindi)

    लो स्पर्म काउंट होने पर मेल फर्टिलिटी से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं जैसे कि

    1. शुक्राणुओं की संख्या में कमी आने के कारण प्रेग्नेंसी न हो पाना.

    2. लो स्पर्म मोबिलिटी जिसके कारण शुक्राणु के लिए अंडे तक पहुंचना और उसके साथ फ्यूज़ होना कठिन हो जाता है.

    3. स्पर्म के आकार में भी खराबी (Impaired morphology) आना जिससे शुक्राणु पूरी तरह से फर्टिलाइज नहीं हो पाते हैं.

    4. गर्भधारण करने में अधिक समय लगना और सामान्य से अधिक बार संभोग करने की आवश्यकता पड़ना.

    5. एज़ोस्पर्मिया (azoospermia) के कारण इंफर्टिलिटी होना जिसमें प्राकृतिक रूप से प्रेग्नेंसी नहीं हो पाती है.

    6. इंफर्टिलिटी या प्रेग्नेंसी न हो पाने पर इमोशनल और साइकोलॉजीकल स्ट्रेस के कारण तनाव और निराशा का शिकार हो जाना.

    लो स्पर्म काउंट का कैसे होता है ट्रीटमेंट? (Treatment options for low sperm count in HIndi)

    लो स्पर्म काउंट का इलाज़ व्यक्ति के लक्षण, रोग की तीव्रता और कारण पर निर्भर करता है. इसके इलाज़ के कई तरीक़े हैं जिनमें से कुछ के बारे में हम यहाँ बात करेंगे.

    1.जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle changes)

    लाइफस्टाइल में कुछ ख़ास तरह के बदलाव; जैसे कि सिगरेट और शराब छोड़ने के अलावा, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने से स्पर्म काउंट बढ़ाने में मदद मिलती है.

    2. दवाएं (Medications)

    लो स्पर्म काउंट के इलाज के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (hormone replacement therapy) और इंफेक्शन के लिए एंटीबायोटिक्स भी दी जाती हैं.

    3. सर्जरी (Surgery)

    शारीरिक असामान्यता होने पर सर्जिकल तरीक़े अपनाए जाते हैं; जैसे कि वैरिकोसल रिपेयर.

    4. असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्निक (Assisted reproductive techniques - ART)

    प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बिल्कुल न होने पर प्रेग्नेंसी के लिए आई यू आई ((IUI) या आई वी एफ (IVF) जैसी टैक्निक का प्रयोग किया जाता है.

    5. स्पर्म रिट्रीवल प्रोसेस (Sperm retrieval procedures)

    स्पर्म काउंट बेहद कम होने पर या स्खलन में कोई भी स्पर्म मौजूद न होने पर टेस्टिकुलर स्पर्म एक्सट्रैक्शन (Testicular sperm extraction - TESE) या परक्यूटेनियस एपिडीडिमल स्पर्म एस्पिरेशन (Percutaneous epididymal sperm aspiration - PESA) जैसे तरीक़ों का प्रयोग किया जाता है.

    लो स्पर्म काउंट होने पर भी हो सकती है प्रेग्नेंसी (Tips to conceive with low sperm count in Hindi)

    लो स्पर्म काउंट के साथ प्रेग्नेंसी होना वाकई चुनौतीपूर्ण है लेकिन कुछ ख़ास चीजों का ध्यान रखकर प्रेग्नेंसी की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है; जैसे-

    1. बच्चा प्लान करने का सही समय चुनें और ओव्यूलेशन टाइम के आसपास नियमित रूप से सेक्स करें.

    2. सेक्शुअल हेल्थ को मज़बूत रखने के लिए लुब्रिकेंट्स के प्रयोग से बचें जिससे स्पर्म मोबिलिटी ख़राब होती है.

    3. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएँ. इससे स्पर्म की हेल्थ में तेज़ी से सुधार आता है और ओवरऑल फर्टिलिटी पर प्रभाव पड़ता है.

    4. जिंक, सेलेनियम, विटामिन सी (vitamin C) और विटामिन ई (vitamin E) कोएंजाइम Q10(coenzyme Q10) को डाइट में शामिल करें जो स्पर्म की हल्थ के लिए बेहद लाभकारी होते हैं.

    5. फलों, सब्ज़ियों, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन से भरपूर हेल्दी डाइट स्पर्म काउंट और क्वालिटी में सुधार करने में बेहद मददगार होती है.

    इसे भी पढ़ें- महिला और पुरुषों दोनों की सेक्शुअल हेल्थ का ध्यान रखती है शतावरी!

    लो स्पर्म काउंट में कैसे करें सुधार? Please write some tips here

    अगर आप स्पर्म काउंट बढ़ाना चाहते हैं तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें.

    1. एक हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाएँ और सैर, योग या व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ.

    2. तनाव से दूर रहें और इसके लिए अपने आपको किसी हॉबी में इंगेज करें.

    3. फल, सब्ज़ियों, होल ग्रेन, हेल्दी फैट और नट्स से भरपूर पौष्टिक भोजन लें.

    4. भरपूर पानी पिएँ क्योंकि हाइड्रेटेड रहने से स्पर्म प्रोडक्शन में मदद मिलती है.

    5. तेज़ गर्मी में न रहें और हॉट टब, सॉना बाथ या टाइट अंडरवियर का प्रयोग न करें.

    6. प्रत्येक रात 7-8 घंटे की गहरी नींद लें.

    7. जहरीले केमिकल्स और वातावरण के संपर्क में आने से बचें; जैसे कि पेस्टिसाइड और रेडिएशन आदि.

    8. बार-बार स्खलन (दिन में एक से अधिक बार) से बचें क्योंकि इससे स्पर्म काउंट कुछ समय के लिए कम हो जाता है.

    प्रो टिप (Pro Tip)

    लो स्पर्म काउंट होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कोई पुरुष पिता बनने का सुख नहीं ले सकता. शुक्राणुओं की संख्या में कमी के बावजूद ऐसे व्यक्ति दवाओं और मेडिकल हेल्प के द्वारा नेचुरल रूप से एक नन्ही-सी जान को इस दुनिया में ला सकते हैं.

    रेफरेंस

    1. Leslie SW, Soon-Sutton TL, Khan MAB. (2023). Male Infertility

    2. Ferlin A, Garolla A, Ghezzi M, Selice R, Palego P, et al. (2021). Sperm Count and Hypogonadism as Markers of General Male Health.

    3. Sunder M, Leslie SW. (2023). Semen Analysis.

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