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27 February 2026 को अपडेट किया गया
आज की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में ख़ुद का ख़्याल रखना किसी चुनौती से कम नहीं है. कुछ भी खा लेने के आदत, खराब लाइफस्टाइल, नींद की कमी, अल्कोहल और धूम्रपान का सेवन, आदि ऐसी कई चीज़ें हैं जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से बीमार बनाती जा रही हैं. इसी का नतीजा है कि लाइफस्टाइल से जुड़ी कई बीमारियाँ भी सामने आ रही है. ऐसे में लोग कई तरह की मेडिसीन पर निर्भर होते जा रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियाँ हैं, जो आपको नेचुरल तरीक़े से फिट रख सकती हैं? इस आर्टिकल में हम ऐसी ही एक जड़ी-बूटी के बारे में बात करेंगे और इस जड़ी-बूटी का नाम है- शतावरी (Shatavari). चलिए तो अब बिना देर किए शतावरी के फ़ायदों (Shatavari ke fayadon) के बारे में बात करते हैं!
शतावरी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है. वैज्ञानिक भाषा में इसे एस्पेरेगस रेसिमोसस (Asparagus racemosus) नाम से जाना जाता है. आयुर्वेद में इसे एक बहुत ही फ़ायदेमंद जड़ी-बूटी बताया गया है. इसका उपयोग सौ से अधिक बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है. शतावरी हार्मोन्स को संतुलित करने, फर्टिलिटी में सुधार करने, ब्रेस्टमिल्क और स्टेमिना को बढ़ाने और सेक्शुअल हेल्थ में सुधार करने के काम आती है. साथ ही, एंटीऑक्सीडेंट गुण से भरपूर होने के कारण यह तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से भी राहत देती है. आजकल शतावरी का सेवन पाउडर के रूप में भी किया जाने लगा है. बता दें कि शतावरी के पौधे की सूखी जड़ों को बारीक़ पीसकर यह पाउडर बनाया जाता है.
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शतावरी को महिलाओं के लिए एक वरदान माना जाता है. इससे महिलाओं को कई तरह के फ़ायदे होते हैं. यहाँ पर हम आपको शतावरी के टॉप 5 फ़ायदों के बारे में बताने जा रहे हैं;
अक्सर पीरियड्स के दौरान महिलाओं को एसिडिटी की समस्या होती है. ऐसे में शतावरी को एक घरेलू नुस्खे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा, अल्सर या दस्त की समस्या से परेशान महिलाएँ भी शतावरी का उपयोग कर सकती हैं.
लो लिबिडो यानी कि कामेच्छा में कमी होना. लो लिबिडो होने के कारण महिलाएँ सेक्स में कम रूचि लेती हैं. ऐसे में शतावरी एक बूस्टर की तरह काम करता है. जो महिलाएँ शतावरी का सेवन करती हैं उनकी सेक्स लाइफ बेहतर होती है.
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बदलती लाइफस्टाइल और हार्मोन्स असंतुलन के कारण आजकल पीसीओएस की समस्या आम हो गई है. ऐसे में शतावरी का सेवन बहुत ही फ़ायदेमंद हो सकता है. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होने के कारण शतावरी तनाव के कारण होने वाली रिप्रोडक्टिव समस्याओं में सुधार करती है.
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शतावरी ब्रेस्ट मिल्क करवाने वाली माँओं के शरीर में कोर्टिकोइड व प्रोलैक्टिन के प्रोडक्शन को बढ़ाती है, और स्टेरॉयड हार्मोन को भी रिलीज होने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे ब्रेस्ट मिल्क की क्वालिटी और क्वान्टिटी दोनों में सुधार होता है.
शतावरी फाइटोएस्ट्रोजेन गुणों से भरपूर होती है. यह महिलाओं के शरीर में फैट टिशू को बढ़ाने में मदद करती है. इस तरह यह ब्रेस्ट के आकार को नेचुरल तरीक़े से बढ़ाने में मदद करती है.
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शतावरी पुरुषों के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद होती है. यहाँ हम आपको इसके टॉप 5 फ़ायदों के बारे में बताने जा रहे हैं;
एंटीऑक्सीडेंट और ग्लूटाथिओन तत्वों से भरपूर होने के कारण शतावरी बढ़ती उम्र की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करती है. नियमित तौर पर इसका सेवन करने से पुरुषों को शारीरिक तौर पर कमज़ोरी महसूस नहीं होती है.
शतावरी स्पर्म काउंट का बढ़ा सकती है. इस तरह यह पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या को भी दूर कर सकती है. इस तरह शतावरी पुरुषों की सेक्शुअल हेल्थ में सुधार करती है.
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शतावरी अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण इम्यूनिटी को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है. साथ ही, यह शरीर को कई तरह के इंफेक्शन और बीमारियों से भी बचाती है.
शतावरी पाचन संबंधित समस्याओं को दूर करने में मदद करती है. आजकल पुरुषों को डाइजेशन की समस्या ज़्यादा होने लगी है. अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो आप शतावरी ट्राई कर सकते हैं.
ऐसा नहीं है कि पुरुष तनाव से अछूते रहते हैं. उन्हें भी यह उतना ही परेशान करता है, जितना कि महिलाओं को करता है. ऐसे में शतावरी को एक नेचुरल नुस्खे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
उम्मीद है कि अब आप समझ गए होंगे कि जहाँ एक ओर शतावरी महिलाओं के हार्मोन्स, लैक्टेशन और मूड में सुधार करती है, वहीं दूसरी ओर यह पुरुषों को इम्यूनिटी, डाइजेशन और फर्टिलिटी से संबंधित समस्याओं से बचाती भी है.
शतावरी महिला और पुरुष दोनों के लिए एक चमत्कार की तरह काम करती है. बाज़ार में आपको शतावरी कैप्सूल, पाउडर और चूर्ण के रूप में मिल जाएगी. अगर आप भी शतावरी को अपने रूटीन में शामिल करना चाहते हैं, तो आप माइलो 100% नेचुरल शतावरी पाउडर (Mylo 100% Natural Shatavari Powder) को इस्तेमाल कर सकते हैं.
रेफरेंस
1. Pandey AK, Gupta A, Tiwari M, Prasad S, Pandey AN et al. (2018). Impact of stress on female reproductive health disorders: Possible beneficial effects of shatavari (Asparagus racemosus).
2. Alok S, Jain SK, Verma A, Kumar M, Mahor A, Sabharwal M. (2013). Plant profile, phytochemistry and pharmacology of Asparagus racemosus (Shatavari): A review. Asian Pac J Trop Dis.
3. Veena N, Arora S, Singh RR, Katara A, Rastogi S, Rawat AK. (2015). Effect of Asparagus racemosus (shatavari) extract on physicochemical and functional properties of milk and its interaction with milk proteins.
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Jyoti Prajapati
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