
आज की स्ट्रेसफुल और भाग-दौड़ भरी लाइफस्टाइल महिलाओं में बहुत-सी बीमारियाँ और डिसऑर्डर का कारण बन रही है; जैसे – अब्नॉर्मल यूटराइन ब्लीडिंग, बार-बार मिसकैरेज होना, इंफर्टिलिटी, फाइब्रॉएड और पॉलीप्स. इन सब की जाँच के लिए अक्सर हिस्टेरोस्कोपी टेस्ट (hysteroscopy in Hindi) किया जाता है. यह एक आसान सा टेस्ट है, जिससे लाइन ऑफ ट्रीटमेंट डिसाइड करने में मदद मिलती है.
हिस्टेरोस्कोपी एक प्रोसेस है जिसमें यूटरस (Uterus) के अंदर की जाँच के लिए वेजाइना के रास्ते से एक पतली, लाइट और कैमरे वाली लचीली ट्यूब अंदर डाली जाती है. इसके लिए शरीर में कोई चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और इस प्रोसेस के ज़रिये गर्भाशय के अंदर की तस्वीर बाहर मॉनिटर पर दिखाई देने लगती है. इससे बीमारी के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है. साथ ही, इसका उपयोग पॉलीप्स और फाइब्रॉएड को हटाने के लिए भी किया जाता है जिसे ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी (operative hysteroscopy) कहते हैं.
अगर आपको पीरियड्स में ज़्यादा ब्लीडिंग और क्रैंप्स के साथ तेज़ दर्द भी होता हो या बार बार मिसकैरेज होने लगे या फिर इंफर्टिलिटी की प्रॉब्लम हो तो डॉक्टर इसके पीछे छुपे कारण का पता लगाने के लिए हिस्टेरोस्कोपी (hysteroscopy meaning in Hindi) कराने की सलाह देते हैं. आइये जानते हैं किन -किन स्थितियों में डॉक्टर आपको हिस्टेरोस्कोपी के लिए कह सकते हैं.
असामान्य यूटराइन ब्लीडिंग एक मेंस्ट्रूअल साइकिल (menstrual cycle) डिसऑर्डर है. जब आपके रेगुलर पीरियड्स के अलावा कोई भी ब्लीडिंग होती है तो उसे असामान्य यूटराइन ब्लीडिंग माना जाता है. इसी तरह आपके पीरियड्स की अवधि और फ़्रीक्वेन्सी में किसी भी अब्नॉर्मलिटी को असामान्य यूटराइन ब्लीडिंग माना जाता है.
असामान्य यूटराइन ब्लीडिंग के कई लक्षण हो सकते हैं; जैसे- पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग या ब्लीडिंग, सेक्स के बाद ब्लीडिंग, सामान्य से अधिक दिनों तक ब्लीडिंग, नॉर्मल से अधिक ब्लीडिंग और मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग होना.
फाइब्रॉएड और पॉलीप्स दोनों यूटरस से जुड़ी समस्याएँ हैं और अक्सर इनके कोई बाहरी लक्षण नहीं होते हैं. इनका पता तब चलता है जब महिला को प्रेग्नेंट होने में या पीरियड साइकिल में प्रॉब्लम होने लगती है.
फाइब्रॉएड यूटरस के अंदर और बाहर कहीं भी विकसित हो सकते हैं और आँखों से दिखाई ना देने जितने छोटे साइज़ से लेकर अंगूर जितने बड़े भी हो सकते हैं. ज़्यादातर मामलों में फाइब्रॉएड धीरे-धीरे बढ़ते हैं और अपने साइज और पनपने की जगह के अनुसार महिला की फर्टिलिटी और प्रेग्नेंसी पर असर डालते हैं. मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल कम होने से ये कई बार सिकुड़ भी जाते हैं.
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इसी तरह जब पीरियड्स के दौरान यूटरस लाइनिंग और एंडोमेट्रियल टिश्यू बॉडी से पूरी तरह से फ्लश-आउट नहीं हो पाते है तब पॉलीप्स बनने लगते हैं. कुछ मामलों में यह कैंसरस भी हो सकते हैं. पॉलीप्स का आकार चावल के आधे दाने से लेकर गोल्फ बॉल के साइज़ तक का हो सकता है और यह किसी भी उम्र की महिलाओं में हो सकते हैं. पॉलीप्स भी महिला की फर्टिलिटी पर असर डालते हैं.
कम से कम एक वर्ष तक अनप्रोटेक्टेड सेक्स करने के बावजूद भी प्रेग्नेंट ना हो पाने को इंफर्टिलिटी कहा जा सकता है. हालाँकि, किसी महिला की जाँच किये बिना इंफर्टिलिटी का कारण पता लगाना बहुत मुश्किल है लेकिन ज़्यादातर मामलों में पाया जाता है कि इंफर्टिलिटी से जूझ रही महिला को असामान्य पीरियड्स और ब्लीडिंग की समस्या होती है. यूटरस के बारे में डिटेल्ड जानकारी के लिए डॉक्टर हिस्टेरोस्कोपी की सलाह देते हैं.
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इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) में एम्ब्रियो इम्प्लांटेशन (hysteroscopy before ivf in Hindi) की संभावना को बढ़ाने के लिए भी हिस्टेरोस्कोपी का उपयोग किया जाता है. आईवीएफ करने से पहले ही हिस्टेरोस्कोपी करके यूटरस की प्रॉब्लम्स को आइडेंटिफ़ाई कर लिया जाता है ताकि उनका इलाज करके एम्ब्रियो इम्प्लांटेशन को सफल बनाया जा सके.
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प्रेग्नेंट होने के बाद अगर 20 हफ़्तों से पहले ही गर्भपात हो जाए तो उसे मिसकैरेज कहा जाता है. कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो लगभग 4 में से 1 प्रेग्नेंट महिला का मिसकैरेज होता है और यह रेश्यो महिला की उम्र के साथ बढ़ता है. मिसकैरेज के अलग-अलग कारण होते हैं. हालाँकि, युवा महिलाओं में यूटरस से जुड़ी बीमारियों के कारण मिसकैरेज अधिक होता है. यूटरस की इन प्रॉब्लम्स का पता लगाने के लिए भी हिस्टेरोस्कोपी की जाती है जिससे इंफर्टिलिटी, रिपीट मिसकैरेज और असामान्य ब्लीडिंग का सही कारण पता लगाने में मदद मिलती है.
"आईयूडी" का मतलब "इंट्रा यूटराइन डिवाइस" है. इसमें मेटल से बनी "टी" शेप की एक डिवाइस यूटरस के अंदर फिट की जाती है जो स्पर्म्स को एग्स तक पहुंचने और उन्हें फर्टिलाइज़ होने से रोक देती है और इससे प्रेग्नेंसी नहीं हो पाती है. आइयूडी लगाने के बाद किसी भी तरह की समस्या आने पर हिस्टेरोस्कोपी से अंदरूनी जाँच में मदद मिलती है.
आइये अब जानते हैं कि हिस्टेरोस्कोपी कितने तरह से की जाती है.
हिस्टेरोस्कोपी आम तौर पर दो प्रकार की होती है - डायग्नोस्टिक और ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी.
डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी में यूटरस के अंदर के दृश्य, फाइब्रॉएड, पॉलीप्स, सेप्टम आदि की जाँच की जाती है. असामान्य यूटराइन ब्लीडिंग की समस्या होने पर डॉक्टर एक छोटी सक्शन ट्यूब के द्वारा सैंपल भी कलेक्ट कर सकते हैं.
डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी से की गयी जाँच में जब प्रॉब्लम्स का पता चल जाता है तो फिर ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी का सहारा लिया जाता है जिसमें मरीज़ को जनरल एनेस्थीसिया देते हैं. ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी करने के लिए यूटरस सर्विक्स को थोड़ा चौड़ा किया जाता है और फिर यूटरस में एक ख़ास तरह का फ्लूइड डालते हैं. इसके बाद इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल हिस्टेरोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल करते हुए फाइब्रॉएड, पॉलीप्स जैसे डिसॉर्डर का इलाज किया जाता है या उन्हें हटाया जाता है.
पीरियड्स रेगुलर होने पर महिला को ब्लीडिंग रुकने के बाद के पहले सप्ताह में ही हिस्टेरोस्कोपी कराने के लिए बुलाया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह समय यूटरस के अंदर जाँच का सबसे अच्छा समय होता है. लेकिन अगर आपके पीरियड्स अनियमित हैं तो डॉक्टर आपकी स्थिति को समझकर हिस्टेरोस्कोपी का समय तय करेगा. मेनोपॉज होने के बाद यह टेस्ट कभी भी किया जा सकता है. इसके लिए;
1. टेस्ट से पहले आपको ब्लैडर खाली करना होगा.
2. आपको रिलैक्स करने के लिए हल्का एनेस्थीसिया या सिडेटिव भी दिया जा सकता है.
3. एग्ज़ामिनेशन टेबल पर लिटाकर आपके पैरों को स्टिररप (Stirrup) से फिक्स किया जाता है.
4. अब पेल्विस की जाँच करके यूटरस सर्विक्स को चौड़ा किया जाता है, ताकि हिस्टेरोस्कोप डालने की जगह बन सके.
5. इसके बाद हिस्टेरोस्कोप से लिक्विड डाला जाता है ताकि ब्लड और म्यूकस हट जाए और साफ़- साफ़ दिखाई दे सके.
6. इसके बाद डॉक्टर यूटरस, यूटरस लाइनिंग और फैलोपियन ट्यूब की जाँच करते हैं और यदि जरूरत हो तो हिस्टेरोस्कोप के द्वारा सर्जिकल इन्स्ट्रुमेंट डालकर सर्जरी की जाती है.
7. हिस्टेरोस्कोपी के साइड इफेक्ट्स (Side effects of Hysteroscopy in Hindi)
हिस्टेरोस्कोपी टेस्ट क्या होता है? यह जानने के बाद आइये बात करते हैं इसके कुछ साइड इफेक्ट्स की. हिस्टेरोस्कोपी के बाद आपको कुछ दिक्कतें हो सकती हैं; जैसे कि-
1. एनेस्थीसिया देने के बाद होश में आने में समय लगना. इस दौरान मरीज की कई घंटों तक निगरानी करनी चाहिये.
2. प्रोसेस पूरा होने के बाद हल्की ऐंठन और वेजाइना से ब्लीडिंग होना आम बात है जो 2 दिन तक भी हो सकती है.
3. यूटरस या सर्विक्स पर हल्की खरोंचे या रगड़ लगना, हालाँकि इसकी संभावना बहुत कम होती है.
4. अगर इस प्रोसेस में गैस का इस्तेमाल किया जाता है इससे आपके कंधे में दर्द भी हो सकता है.
5. कुछ मरीज़ हिस्टेरोस्कोपी कराने के बाद थकान और बीमार-सा महसूस करते हैं, और ऐसा होना सामान्य है.
6. अगर आपको बुखार, पेट में तेज़ दर्द और हेवी वेजाइनल ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें.
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इफस्टाइल, काम का प्रेशर और मानसिक दबाव कुछ ऐसे कारण हैं जो महिलाओं में रिप्रोडक्टिव सिस्टम से जुड़ी दिक्कतें पैदा करते हैं और फिर यही कारण इंफर्टिलिटी को भी जन्म देते हैं. अगर आप अपने युवा वर्षों से ही लाइफस्टाइल और खान-पान के प्रति अलर्ट रहें तो आप ऐसी समस्याओं से बच सकते हैं. हालाँकि, प्रेग्नेंसी में देरी या दिक्कत होने पर तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से मिलें.
1. Abdollahi Fard S, Mostafa Gharabaghi P, Montazeri F, Mashrabi O. (2012). Hysteroscopy as a minimally invasive surgery, a good substitute for invasive gynecological procedures. Iran J Reprod Med.
2. Di Spiezio Sardo A, Calagna G, Santangelo F, Zizolfi B, Tanos V, Perino A, De Wilde RL. (2017). The Role of Hysteroscopy in the Diagnosis and Treatment of Adenomyosis. Biomed Res Int.
Yes
No




Hello friends... Dr ne mujhe bola he 12 april se 15 april tak delivery ho jani chahiye baki bache ko prblm ho sakti he... Par bache ne head niche fix hi nai kra to bachedani ka muh kese khule.. apme koi he jiski sath ye prblm hui ho...!!
Hello mom's mera 6 month chsl rha h kl maine thoda wajan utha liya tha tkriban 10 kg k lgbhg to ky mere bachche ko koi problem to nhi n hogi
Hello moms meri delivery ko 4 month ho gye h mujhe feb me halki bleeding hui thi march me nahi hui fir april me start ho gaye kya ye normal h plzzz reply me
Hello sisters please meri ultrasound report dekhkar bataiye ki sab Kuch hai .... our meri pregnancy ko kitne din ho gay me bahut confused Hu ....mere hisaab se 7th month abhi start hua hai doctor ne Bola hai ki 7 month complete hone wala hai ..... please help me
Hlw mom's Mera baby rat bilkul bhi nahi sota aur din m sota h kyaa kru bhot rota h
Your body needs extra nutrition this trimester - these can help.





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