

Pregnancy
10 August 2023 को अपडेट किया गया
क्या आप प्रेग्नेंट हैं और आपको बहुत नींद आ रही है? ह्यूमन बेबी को पालना मुश्किल काम है, इसलिए अगर आप अपनी प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी ज़्यादा थकावट महसूस कर रही हैं तो ये कोई ताज्जुब की बात नहीं है. हाँ, अगर आपको हर वक़्त सोने की इच्छा होती है तो आपको फिक्र करने की ज़रूरत है. साथ ही, प्रेगनेंसी के दौरान आप जितनी नींद लेती हैं, वह न केवल आपको और आपके बच्चे को असर करती है, बल्कि आपके प्रसव और बच्चे के जन्म को भी प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा, प्रेगनेंसी के दौरान नींद की कमी से प्रीक्लेम्पसिया सहित कई दिक्कतें हो सकती हैं, जिसकी वजह से बच्चे का समय से पहले जन्म हो सकता है. इसलिए इस समय में आराम जरूर करें.
प्रेग्नेंट होने पर आप शुरुआत में बहुत ज्यादा थकान महसूस करती हैं और यहां तक कि खुद को निढाल महसूस कर सकती हैं. हार्मोन के बदलाव, खासतौर पर प्रोजेस्ट्रॉन के कारण जिसकी मात्रा प्रेगनेंसी में बढ़ जाती है, आपको ज़्यादा नींद आएगी. प्रेगनेंसी की शुरुआत के दौरान आपका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल भी कम हो जाता है, जिससे आपको थकान महसूस हो सकती है.
हालाँकि, पहले तीन महीनों के बाद, आपकी थकावट कम होनी चाहिए. कभी-कभी प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों के दौरान बच्चे का विकास पूरा हो जाने के कारण शारीरिक थकावट और शरीर पर पड़ने वाले असर के कारण आपको बहुत नींद आती है.
प्रेगनेंसी के दौरान ज़्यादा सोने का क्या अर्थ है ?
ज़्यादा सोने के मायने सबके लिए अलग-अलग हैं और यह विशेष रूप से आपकी नींद की ज़रूरत और आदतों पर भी निर्भर करता है. रीसर्च के मुताबिक, अच्छी सेहत के लिए जरूरी नींद की मात्रा उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती है.आमतौर पर जिस उम्र में महिलायें प्रेग्नेंट होती हैं, उस उम्र में हर दिन सात से नौ घंटे सोने की सलाह दी जाती है.
अगर आप रोज़ाना 9-10 घंटे से ज़्यादा सोते हैं, तब यह आपके ज़्यादा सोने का एक संकेत हो सकता है. इसके साथ ही अगर आपकी नींद रात में कई बार खुल जाती है या आपकी नींद डिस्टर्ब रहती है तो आपको बिस्तर पर ज़्यादा देर आराम करने की ज़रूरत महसूस होगी .
तो आखिर नींद इतनी ज़रूरी क्यों है? विज्ञान ने साबित कर दिया है कि शरीर के सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए नींद ज़रूरी है, एनर्जी को बनाए रखने और दिमाग को जागते समय ली गई नई जानकारी को प्रोसेस करने में सक्षम बनाने के लिए. इसके अलावा, भरपूर नींद के अभाव में, स्पष्ट रूप से सोचना, तुरंत प्रतिक्रिया देना, ध्यान केंद्रित करना और भावनाओं को कंट्रोल करना असंभव है. इसके अलावा, नींद की कमी से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं.
प्रेगनेंसी की पहले और आखिरी तीन महीनों में थकान महसूस होना आम बात है. आम तौर पर, पहले तीन महीनों के दौरान, आपके ब्लड की मात्रा और प्रोजेस्टेरोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे आपको ज़्यादा नींद आ सकती है. और तीसरी तिमाही तक, बच्चे के वजन के भार और प्रसव के करीब आने की भावनात्मक चिंता के कारण आपको बिस्तर पर ज़्यादा देर तक आराम करने का मन हो सकता है.
इसके साथ ही हार्मोन और शारीरिक बदलावों के चलते हो सकता हो कि आपको अच्छी नींद ना आ पाए. तनाव, चिंता के बढ़ते स्तर और प्रेगनेंसी से जुड़ी मुश्किलों के कारण आपकी रातों की नींद खराब हो सकती है और आपको दिन में अधिक थकान महसूस हो सकती है या आपको दिन में झपकी लेने का मन हो सकता है.
कुछ अध्ययनों ने तर्क दिया है कि प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों के दौरान ज़्यादा सोना नुकसानदायक हो सकता है. अध्ययन में दावा किया गया है कि जो महिलाएं लगातार नौ घंटे से अधिक समय तक सोती हैं और प्रेगनेंसी के आखिरी महीने के दौरान नियमित रूप से लगातार सोती हैं, उनमें मृत शिशु के जन्म की संभावना अधिक होती है.
इस अध्ययन को करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि भ्रूण की गति में कमी के कारण रात में ज़्यादा लंबी नींद आ सकती है और लंबी नींद, मृत-शिशु के जन्म का कारण नहीं हैं. हो सकता है आप ज़्यादा सोना नहीं चाहें, लेकिन आपके लिए कम से कम आठ घंटे बिस्तर पर बिताना ज़रूरी है, क्योंकि आपकी प्रेगनेंसी की लास्ट स्टेज में भरपूर नींद लेने के कुछ फायदे हैं .
पुराने रिसर्च में पाया गया कि जो महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी के आखिरी समय में रात में छह घंटे से कम सोती हैं, उनके प्रसव के घंटे अधिक होते हैं और सी-सेक्शन डिलीवरी होने की संभावना 4.5 गुना अधिक होती है. साथ ही, कुछ जानवरों पर हुए रिसर्च बताते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान पूरी नींद न होने का संतान पर दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है. इसलिए यदि आप रात में कई बार जागते हैं तो आपको बिस्तर पर शाम या सुबह के समय ज़्यादा देर आराम करने का मन हो सकता है .
भरपूर नींद लेने के साथ-साथ आपको नींद की गुणवत्ता के बारे में सोचना भी जरूरी है. अध्ययनों ने संकेत दिया है कि प्रेगनेंसी में नींद के दौरान गड़बड़ाती सांस, प्रीक्लेम्पसिया के खतरे को बढ़ा सकती है. इसके अलावा, खर्राटे लेना, जो नॉन-प्रेग्नेंट महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंट महिलाओं में अधिक आम है, प्रीक्लेम्पसिया और जेसटेशनल डायबिटीज से जुड़ा हुआ है.
प्रेगनेंसी के दौरान आपकी नींद में बदलाव के कई कारण हैं. कुछ संभावित कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
अगर आपको प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी नींद लेने में परेशानी हो रही है तो उम्मीद न छोड़ें. आप अपनी नींद को बेहतर बनाने के लिए बहुत से उपाय आजमा सकते हैं.
यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान थका हुआ या चिंतित महसूस करती हैं तो आप अकेली नहीं हैं. थकान महसूस करना एक सामान्य प्रेगनेंसी सिंड्रोम है, खासकर प्रेगनेंसी की शुरुआत और अंत में. फिर भी, यदि आपको हमेशा ऐसा लगता है कि आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है या पूरे दिन सो रही हैं, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. वे यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई मेडिकल इश्यू इसकी वजह नहीं है.

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Parul Sachdev
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