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Is Excessive Sleeping During Pregnancy Normal in Hindi | क्या प्रेग्नेंसी में ज़्यादा सोना नॉर्मल है?

Pregnancy
Written by - Parul Sachdevअंतिम अपडेट: Apr 30, 2026
Is Excessive Sleeping During Pregnancy Normal in Hindi | क्या प्रेग्नेंसी में ज़्यादा सोना नॉर्मल है?
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सारांश


  • प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव, खासकर प्रोजेस्टेरोन का बढ़ना, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का कम होना पहली तिमाही में ज़्यादा नींद और थकान का कारण बनता है.
  • रोज़ाना 9-10 घंटे से ज़्यादा सोना या बार-बार नींद टूटना ज़्यादा सोने का संकेत हो सकता है; आखिरी तिमाही में लंबी नींद कुछ जोखिमों से भी जुड़ी हो सकती है.
  • रेस्ट्लेस लेग सिंड्रोम, जीईआरडी, इनसोमनिया, स्लीप एप्निया, बार-बार पेशाब आना, कमर दर्द और पैरों में एठन जैसी समस्याएं प्रेगनेंसी में नींद को प्रभावित कर सकती हैं.
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क्या आप प्रेग्नेंट हैं और आपको बहुत नींद आ रही है? ह्यूमन बेबी को पालना मुश्किल काम है, इसलिए अगर आप अपनी प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी ज़्यादा थकावट महसूस कर रही हैं तो ये कोई ताज्जुब की बात नहीं है. हाँ, अगर आपको हर वक़्त सोने की इच्छा होती है तो आपको फिक्र करने की ज़रूरत है. साथ ही, प्रेगनेंसी के दौरान आप जितनी नींद लेती हैं, वह न केवल आपको और आपके बच्चे को असर करती है, बल्कि आपके प्रसव और बच्चे के जन्म को भी प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा, प्रेगनेंसी के दौरान नींद की कमी से प्रीक्लेम्पसिया सहित कई दिक्कतें हो सकती हैं, जिसकी वजह से बच्चे का समय से पहले जन्म हो सकता है. इसलिए इस समय में आराम जरूर करें.

प्रेग्नेंट होने पर आप शुरुआत में बहुत ज्यादा थकान महसूस करती हैं और यहां तक कि खुद को निढाल महसूस कर सकती हैं. हार्मोन के बदलाव, खासतौर पर प्रोजेस्ट्रॉन के कारण जिसकी मात्रा प्रेगनेंसी में बढ़ जाती है, आपको ज़्यादा नींद आएगी. प्रेगनेंसी की शुरुआत के दौरान आपका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल भी कम हो जाता है, जिससे आपको थकान महसूस हो सकती है.

हालाँकि, पहले तीन महीनों के बाद, आपकी थकावट कम होनी चाहिए. कभी-कभी प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों के दौरान बच्चे का विकास पूरा हो जाने के कारण शारीरिक थकावट और शरीर पर पड़ने वाले असर के कारण आपको बहुत नींद आती है.

प्रेगनेंसी के दौरान ज़्यादा सोने का क्या अर्थ है ?

ज़्यादा सोने के मायने सबके लिए अलग-अलग हैं और यह विशेष रूप से आपकी नींद की ज़रूरत और आदतों पर भी निर्भर करता है. रीसर्च के मुताबिक, अच्छी सेहत के लिए जरूरी नींद की मात्रा उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती है.आमतौर पर जिस उम्र में महिलायें प्रेग्नेंट होती हैं, उस उम्र में हर दिन सात से नौ घंटे सोने की सलाह दी जाती है.

अगर आप रोज़ाना 9-10 घंटे से ज़्यादा सोते हैं, तब यह आपके ज़्यादा सोने का एक संकेत हो सकता है. इसके साथ ही अगर आपकी नींद रात में कई बार खुल जाती है या आपकी नींद डिस्टर्ब रहती है तो आपको बिस्तर पर ज़्यादा देर आराम करने की ज़रूरत महसूस होगी .

तो आखिर नींद इतनी ज़रूरी क्यों है? विज्ञान ने साबित कर दिया है कि शरीर के सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए नींद ज़रूरी है, एनर्जी को बनाए रखने और दिमाग को जागते समय ली गई नई जानकारी को प्रोसेस करने में सक्षम बनाने के लिए. इसके अलावा, भरपूर नींद के अभाव में, स्पष्ट रूप से सोचना, तुरंत प्रतिक्रिया देना, ध्यान केंद्रित करना और भावनाओं को कंट्रोल करना असंभव है. इसके अलावा, नींद की कमी से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं.

प्रेगनेंसी के दौरान आपको इतनी नींद क्यों आती है?

प्रेगनेंसी की पहले और आखिरी तीन महीनों में थकान महसूस होना आम बात है. आम तौर पर, पहले तीन महीनों के दौरान, आपके ब्लड की मात्रा और प्रोजेस्टेरोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे आपको ज़्यादा नींद आ सकती है. और तीसरी तिमाही तक, बच्चे के वजन के भार और प्रसव के करीब आने की भावनात्मक चिंता के कारण आपको बिस्तर पर ज़्यादा देर तक आराम करने का मन हो सकता है.

इसके साथ ही हार्मोन और शारीरिक बदलावों के चलते हो सकता हो कि आपको अच्छी नींद ना आ पाए. तनाव, चिंता के बढ़ते स्तर और प्रेगनेंसी से जुड़ी मुश्किलों के कारण आपकी रातों की नींद खराब हो सकती है और आपको दिन में अधिक थकान महसूस हो सकती है या आपको दिन में झपकी लेने का मन हो सकता है.

प्रेगनेंसी के दौरान ज़्यादा सोने के नुकसान

कुछ अध्ययनों ने तर्क दिया है कि प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों के दौरान ज़्यादा सोना नुकसानदायक हो सकता है. अध्ययन में दावा किया गया है कि जो महिलाएं लगातार नौ घंटे से अधिक समय तक सोती हैं और प्रेगनेंसी के आखिरी महीने के दौरान नियमित रूप से लगातार सोती हैं, उनमें मृत शिशु के जन्म की संभावना अधिक होती है.

इस अध्ययन को करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि भ्रूण की गति में कमी के कारण रात में ज़्यादा लंबी नींद आ सकती है और लंबी नींद, मृत-शिशु के जन्म का कारण नहीं हैं. हो सकता है आप ज़्यादा सोना नहीं चाहें, लेकिन आपके लिए कम से कम आठ घंटे बिस्तर पर बिताना ज़रूरी है, क्योंकि आपकी प्रेगनेंसी की लास्ट स्टेज में भरपूर नींद लेने के कुछ फायदे हैं .

प्रेगनेंसी के दौरान नींद के फायदे

पुराने रिसर्च में पाया गया कि जो महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी के आखिरी समय में रात में छह घंटे से कम सोती हैं, उनके प्रसव के घंटे अधिक होते हैं और सी-सेक्शन डिलीवरी होने की संभावना 4.5 गुना अधिक होती है. साथ ही, कुछ जानवरों पर हुए रिसर्च बताते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान पूरी नींद न होने का संतान पर दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है. इसलिए यदि आप रात में कई बार जागते हैं तो आपको बिस्तर पर शाम या सुबह के समय ज़्यादा देर आराम करने का मन हो सकता है .

भरपूर नींद लेने के साथ-साथ आपको नींद की गुणवत्ता के बारे में सोचना भी जरूरी है. अध्ययनों ने संकेत दिया है कि प्रेगनेंसी में नींद के दौरान गड़बड़ाती सांस, प्रीक्लेम्पसिया के खतरे को बढ़ा सकती है. इसके अलावा, खर्राटे लेना, जो नॉन-प्रेग्नेंट महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंट महिलाओं में अधिक आम है, प्रीक्लेम्पसिया और जेसटेशनल डायबिटीज से जुड़ा हुआ है.

प्रेगनेंसी के दौरान कौन सी समस्याएं नींद को प्रभावित कर सकती हैं या ज़्यादा नींद का कारण बन सकती हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान आपकी नींद में बदलाव के कई कारण हैं. कुछ संभावित कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • हार्मोन में बदलाव : पहले तीन महीनों के दौरान आपका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है, जिससे संभावित रूप से थकान महसूस होती है. इसके अलावा, प्रोजेस्टेरोन का लेवल बढ़ने से आप अधिक सोना चाहते हैं.
  • रेस्ट्लेस लेग सिंड्रोम: कुछ महिलाओं की नींद पैर में बेचैनी के कारण डिस्टर्ब हो सकती है. एस्ट्रोजन के बढ़ते स्तर या फॉलिक ऐसिड और आयरन की कमी की वजह से रेस्ट्लेस लेग सिंड्रोम हो सकता है.
  • गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग: इसोफेगस के तल पर एक मसक्यूलर रिंग आपके पेट में भोजन को जाने देने के लिए खुलती है. यह रिंग ढीली रहेगी और गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग वाली महिलाओं में भोजन और लिक्विड को वापस गले में जाने देगी. कुछ मामलों में, प्रेगनेंसी जीईआरडी की ओर ले जाती है, क्योंकि स्टमक एरिया पर अतिरिक्त दबाव रिंग के सही तरीके से बंद होने में बाधा डाल सकता है.
  • इनसोमनिया/अनिद्रा: हो सकता आप बिस्तर में बहुत देर तक लेटे रहें लेकिन आपको अच्छी नींद न आए खास तौर पर पहले और आखिरी तीन महीनों के दौरान. प्रेगनेंसी से जुड़े दर्द और तकलीफें, अनिद्रा या इनसोमनिया की सामान्य वजहों में से एक हैं . बच्चे को जन्म देने और देखभाल करने के विचार से जुड़े तनाव और चिंता में बढ़ोत्तरी भी नींद उड़ा सकती है.
  • स्लीप एप्निया: यदि सोते समय, आपकी सांस रुकती है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें . कुछ रिव्यू में पाया गया कि महिलाओं को संभवतः हार्मोन और शारीरिक उतार-चढ़ाव के कारण प्रेगनेंसी के दौरान स्लीप एपनिया हो जाता है. हालांकि यह प्रेगनेंसी के बाद ठीक हो सकता है, यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है. इसलिए इसकी जांच करवाना बहुत जरूरी है.
  • बार-बार पेशाब आना: तीसरी तिमाही तक, आप यूरिन करने के लिए रात में कई बार उठ सकती हैं, इसका मुख्य कारण यह है कि आपका शिशु बढ़ रहा है और आपके मूत्राशय पर दबाव डाल रहा है. यद्यपि आप इससे बचने के लिए सोने से ठीक पहले तरल पदार्थ का सेवन कम कर सकते हैं, लेकिन याद रखें कि आपको पानी की कमी भी नहीं होनी चाहिए.
  • बुरे सपने: कुछ महिलाओं को सामान्य से अधिक सपने आते हैं, जो असामान्य या बुरे सपने हो सकते हैं. कभी-कभी, यह तनाव या बार-बार टूटती नींद से जुड़ा हो सकता है. एक नियमित शेड्यूल में रहने की कोशिश करें और सोने की अलग-अलग पोज़िशन ट्राय करें या प्रेगनेंसी पिलो का उपयोग करें. अगर आपको इसके बाद भी सपने परेशान कर रहे हैं, तो इसके बारे में आपके साथी या किसी दोस्त से बात करने से आपको मदद मिल सकती है. अंत में, आप किसी काउंसलर से मिलने का विचार भी कर सकते हैं.
  • कंजेशन और खर्राटे: जैसे-जैसे आपकी प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है, आपकी नाक बंद हो सकती है और हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण आपको भरा हुआ महसूस हो सकता है.सलाइन नेजल स्प्रे का उपयोग करने से आपको मदद मिल सकती है. कुछ महिलाएं पहली बार प्रेग्नेंट होने पर खर्राटे लेने लगती हैं. हेल्दी डाइट का पालन करने और प्रेगनेंसी के दौरान अतिरिक्त वजन न बढ़ने देने से यह तकलीफ कम हो सकती है. इसके अलावा, अपने सिर को ऊपर उठाकर सोना आरामदायक होता है. इसके लिए आप या तो तकिए का सहारा ले सकते हैं या अपने बिस्तर के सिरहाने को थोड़ा ऊपर उठा सकते हैं, जिससे खर्राटों को कम करने में मदद मिल सकती है.
  • अपच: आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान जलन की शिकायत होती है, जो बढ़ते हुए बच्चे के कारण हो सकती है, जो आपके अंगों पर दबाव डाल सकती है, जिससे रिफ्लक्स हो सकता है और हो सकता है आप आराम न कर पाएं. दर्द को कम करने के लिए, आप सपोर्ट पिलो का इस्तेमाल कर सकते हैं या अपने सिर को ऊपर उठाकर सो सकते हैं. इसके अलावा, ज़्यादा खाने और ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जो मसालेदार, एसिडिक और बहुत अधिक तला हुआ हो.
  • मॉर्निंग सिकनेस: मॉर्निंग सिकनेस के साथ होने वाली मितली आपको जगाए रख सकती है. पेट भरा रखने से आप मितली को कम कर सकते हैं. दिन के दौरान हल्के स्नैक्स खाने की कोशिश करें.
  • पैरों में एठन: पैरों की एठन भी आपकी नींद खराब कर सकती है . इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है कि प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में एठन क्यूँ होती है. लेकिन ऐसे कई उपाय हैं जिन्हे अपनाकर आप इसे कम कर सकते हैं, जैसे अपने काफ मसल्स को स्ट्रेच करना, सारे दिन ऐक्टिव रहना और बहुत सारा लिक्विड पीना.
  • कमर दर्द: कुछ महिलाओं को यह दर्द रात में अधिक हो सकता है. भारी वजन उठाने, घर का काम करने और लंबे समय तक खड़े रहने से बचने की कोशिश करें. यदि आप कर सकते हैं, तो दिन के दौरान अपने पैरों को ऊपर करके आराम करें.

प्रेगनेंसी के दौरान नींद में सुधार के लिए आप क्या कर सकती हैं?

अगर आपको प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी नींद लेने में परेशानी हो रही है तो उम्मीद न छोड़ें. आप अपनी नींद को बेहतर बनाने के लिए बहुत से उपाय आजमा सकते हैं.

  • प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल: जब आप सोते हैं तो प्रेगनेंसी पिलो आपको सपोर्ट और कम्फर्ट महसूस करने में मदद कर सकता है; यदि आप आमतौर पर पीठ के बल सोते हैं या बस ऐसी स्थिति में नहीं आ पाते हैं जो आपको सही लगे.
  • चिंताओं से निपटें: क्या आप जन्म देने के बारे में चिंतित या परेशान हैं? क्या आपके दिमाग में आपको जगाए रखने का कोई और कारण है? आपके दिमाग को दौड़ाते रहने वाले इश्यू से निपटना, आपको रात की बेहतर नींद दे सकता है.
  • हर दिन एक्सरसाइज़ करें : एक्सरसाइज़ के संभावित लाभों में से एक नींद में सुधार है. इसके अलावा,रोज़ाना एक्सरसाइज़ आपको अपनी दिन की गतिविधियों को पूरा करने के लिए और अधिक एनर्जी दे सकता है और आपके शरीर को आपके बच्चे को जन्म देने से पहले के संघर्ष के लिए स्वस्थ बने रहने में मदद कर सकता है.
  • मालिश : स्पर्श बहुत सुखदायक और सोने में मददगार हो सकता है. यह प्रेगनेंसी से जुड़े दर्द और तकलीफ को भी कम कर सकती है और आपके मूड को अच्छा कर सकती है.
  • नींद की अच्छी आदतें बनाएं : नींद की दिनचर्या अच्छी रात के लिए मूड सेट करने में मदद कर सकती है. रोजाना तय किए गए समय पर सोना अच्छा होता है .
  • सोने की अच्छी जगह बनाएं: इलेक्ट्रॉनिक्स को बेडरूम के बाहर रखने पर विचार करें, एक नया गद्दा खरीदें, अपना कमरा साफ रखें या सोने से पहले थर्मोस्टेट को सही तापमान पर समायोजित करें

निष्कर्ष

यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान थका हुआ या चिंतित महसूस करती हैं तो आप अकेली नहीं हैं. थकान महसूस करना एक सामान्य प्रेगनेंसी सिंड्रोम है, खासकर प्रेगनेंसी की शुरुआत और अंत में. फिर भी, यदि आपको हमेशा ऐसा लगता है कि आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है या पूरे दिन सो रही हैं, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. वे यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई मेडिकल इश्यू इसकी वजह नहीं है.

हर प्रेग्नेंट माँ की आरामभरी नींद की साथी

थकान और बेचैनी भरी रातों में सही सपोर्ट और देखभाल आपकी नींद को सुकूनभरा बना सकती है.

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