
सावन का माह भगवान शिव को समर्पित है. जहाँ इस माह में भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सावन सोमवार के व्रत किए जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर इस माह में हरियाली तीज (Hariyali teej) जैसा कठिन व्रत भी रखा जाता है. हालाँकि, कभी-कभी कुछ महिलाएँ हरियाली तीज और हरतालिका तीज को लेकर कंफ्यूज हो जाती हैं, ख़ासकर वे महिलाएँ जो इस व्रत को पहली बार रखने जा रही हैं, तो चलिए इस आर्टिकल के ज़रिये आपको तीज के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में बताते हैं; जैसे कि- हरियाली तीज कब है (Hariyali teej kab hai), हरियाली तीज क्यों मनायी जाती है (Why teej is celebrated in Hindi), हरियाली तीज की कथा क्या है (Teej katha in Hindi), आदि.
हिंदू धर्म में हर तीज-त्योहार का बहुत महत्व होता है. इसी में से एक है तीज का व्रत. साल में तीन बार तीज का व्रत रखा जाता है. हरियाली तीज (Hariyali teej), हरतालिका तीज (Hartalika teej) और कजरी तीज (Kajri teej). तीनों ही व्रत सुख-सौभाग्य, पति की लंबी उम्र, संतान की खुशी और परिवार की खुशहारी के लिए रखे जाते हैं. हालाँकि, अधिमास और सावन के दिन बढ़ने के कारण इस बार तिथियों लेकर थोड़ा कंफ्यूजन है.
बता दें कि इस बार हरियाली तीज का व्रत 19 अगस्त को रखा जाएगा. वहीं, कजरी तीज, जिसे कजलिया तीज और सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है, इस साल 2 सितम्बर को मनायी जाएगी. इसके साथ ही, हरतालिका तीज का व्रत 18 सितम्बर को रखा जाएगा.
हरियाली तीज को शिव और पार्वती के मिलन का दिन माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार,
माँ पार्वती ने हिमालय के यहाँ सती के रूप में पुनर्जन्म लिया था. जब माँ सती विवाह योग्य हो गई तो उनके पिता हिमालय उनके लिए वर तलाशने लगे. फिर एक दिन नारद मुनि सती के पिता हिमालय के पास पहुंचे और उन्होंने माँ सती के लिए भगवान विष्णु का नाम सुझाया. पर्वतराज हिमालय को नारद का यह सुझाव बेहद पसंद आया और उन्होंने अपनी रजामंदी दे दी. जब माँ सती को इस बारे में पता चला तो परेशान हो गयीं और तपस्या करने के लिए जंगल चली गयीं. एकांत जंगल में सती ने कड़ी तपस्या की. बेटी की तपस्या देख हिमालय का दिल पसीज गया और वह अपनी बेटी इच्छा के आगे झुक गए. वहीं, उनकी इस तपस्या से भगवान शिव भी प्रसन्न हुए और उन्होंने सती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया. तब से इस दिन को हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है. तो यह थी हरियाली तीज की व्रत कथा (Hariyali teej vrat katha in hindi).
माना जाता है कि जो महिलाएँ पूरे मन से हरियाली तीज का व्रत रखती हैं, उनकी सभी मनोकामनाएँ पू्र्ण होती है. इस दिन भगवान शिव और माँ पार्वती की विशेष पूजा की जाती है. इस व्रत को धारण करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है, वहीं जो महिलाएँ ये व्रत करती हैं, वह शारीरिक और मानसिक रूप पर स्वस्थ रहती हैं.
इस व्रत के दौरान पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है. आप इस व्रत की तैयारी एक दिन पहले अपने हाथों में मेहंदी लगाकर करें. अगले दिन यानी कि हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हरे रंग के कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान शिव और माँ पार्वती का ध्यान करते हुए निर्जला व्रत का संकल्प लें. अगर आप निर्जला व्रत नहीं कर सकते हैं, तो फलाहार व्रत का संकल्प लें. घर में एक चौकी बनाएँ और गंगाजल और साफ़ मिट्टी से शिवलिंग बनाएँ. माँ पार्वती और गणेश की प्रतिमा को साथ में रखें. पूजा के दौरान भगवान शिव को सफेद फूल, बेलपत्र, धतूरा और आम के पत्ते आदि चढ़ाएं. साथ ही, माँ पार्वती को 16 श्रृंगार सामग्री अर्पित करें. इस दौरान शिव पुराण, शिव स्त्रोत, शिव मंत्रों का जाप करें और हरियाली तीज की कथा सुनें.
शाम के समय भी इसी विधि-विधान से भगवान शिव और पार्वती की आराधना करें. इसके बाद शिव और पार्वती की आरती करें. विधि-विधान के साथ माँ पार्वती और शिव की पूजा करने पर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं
हरियाली तीज व्रत का बहुत महत्व होता है. लेकिन क्या इसे प्रेग्नेंसी के दौरान किया जा सकता है यानी कि क्या गर्भवती महिलाएँ हरियाली तीज का व्रत कर सकती हैं? तो इसका जवाब है- 'हाँ'. लेकिन इस दौरान आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए; जैसे कि-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार हरियाली तीज व्रत करने के बाद इसे छोड़ा नहीं जा सकता. लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में व्रत के नियमों में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, जैसे- अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो आप इस व्रत को निर्जला न करें. पानी पीते रहें. साथ ही, अगर आपकी प्रेग्नेंसी में कोई कॉम्प्लिकेशन है, तो आप इस व्रत को न करें. आपकी और आपके बेबी की सेहत के लिए यह ज़रूरी है.
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व्रत के शुरू होने से लेकर अंत तक ख़ूब पानी पिएँ. ध्यान रखें इस दौरान आपका हाइड्रेटेड रहना ज़रूरी है. आप फलाहार व्रत करें. व्रत के दौरान आप रसीले फल और दही खाते रहें, ताकि आपको कमज़ोरी महसूस न हो. ध्यान रखें इस दौरान आपको गैस और एसिडिटी की समस्या हो सकती है. इसलिए चाय और कॉफ़ी पीने से बचें.
हरियाली तीज के दौरान महिलाएँ झूले झुलती हैं. ऐसे में आपका भी मन झुला झुलने का हो सकता है. लेकिन ध्यान रखें आपको ऐसा करने से बचना चाहिए. ऐसा करना आपके और आपके बेबी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. इससे आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है. साथ ही,इस दौरान बाहर जाने से भी बचें. इसकी बजाय आप भगवान शिव के भजन और गीत सुनें. इससे आपको अच्छा महसूस होगा
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जिस तरह प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए व्रत के नियमों में कुछ बदलाव किया जा सकता है. ठीक उसी प्रकार स्तनपान करवाने वाली माँओं के लिए कुछ नियम बदल सकते हैं. स्तनपान यानी कि ब्रेस्टफ़ीडिंग करवाने वाली माँओं को निर्जला व्रत नहीं करना चाहिए. आप इस दौरान फलाहार व्रत ही करें. ध्यान रखें इस दौरान आपका बच्चा अपनी भूख के लिए सिर्फ़ आप पर ही निर्भर है. अगर आप स्वस्थ नहीं रहेंगी, तो इसका असर बच्चे की सेहत पर भी पड़ेगा. इसके अलावा, अगर आपकी कोई मेडिकल कंडीशन है, तो व्रत रखने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें.
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हरियाली तीज का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं. आप पूरे विधि-विधान से इस व्रत को कर सकते हैं. हालाँकि, अगर आप प्रेग्नेंट हैं, ख़ासकर प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में हैं, तो इस व्रत को फलाहार ही करें. स्तनपान करवाने वाली माँओं को भी यह व्रत फलाहार ही करना चाहिए. साथ ही, अगर आपकी कोई मेडिकल कंडीशन है, तो इस व्रत को करने से पहले आप अपने डॉक्टर से परामर्श करें.
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