
प्रेग्नेंसी का सफ़र जितना ख़ूबसूरत होता है, उतना ही मुश्किल भी, क्योंकि इस दौरान एक महिला का शरीर कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुज़रता है. इस दौरान बदन दर्द (Body pain), पेट दर्द (Abdominal pain), कमर दर्द (back ache), ब्रेस्ट पेन (स्तन में दर्द) (Breast pain), सिर दर्द (Headache), पैरों में ऐंठन (Leg cramps), आदि होना आम है. बच्चे को जन्म देने के बाद भी कई महिलाओं को इस तरह के दर्द का सामना करना पड़ता है. गर्भवती महिलाओं और नयी माँओं की इसी समस्या को समझते हुए हम इस आर्टिकल में उन तरीक़ों को ज़िक्र करने जा रहे हैं, जिनकी मदद से वे राहत पा सकती हैं.
प्रेग्नेंसी के दौरान बदन दर्द से राहत पाने के लिए आप इन तरीक़ों को अपना सकते हैं.
गुनगुने पानी में रहने से शरीर खुल जाता है और दर्द से तुरंत राहत मिलती है. आप अपने बाथटब में बबल बाथ लें सकती हैं. इसके लिए आप अपने बाथ टब में गुनगुना पानी भरें और फिर उसमें तेल की कुछ बूँदे डालें. इसके बाद, बाथरूम में सुगंधित मोमबत्तियाँ जलाते हुए धीमी आवाज़ में मधुर संगीत लगाएँ. इसके बाद टब में बैठकर अपनी पसंदीदा पत्रिका पढ़ें या आँखें बंद करके म्यूज़िक का आनंद लें. इससे न केवल आपका तनाव कम होगा; बल्कि आपके पूरे शरीर के साथ गले की माँसपेशियों को भी आराम मिलेगा. बस ध्यान रहें कि आप सर्दी के मौसम में ज़्यादा देर तक पानी में न रहें, वरना आपको ठंड लग सकती है.
प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद मसाज करके आप रिलेक्स महसूस कर सकते हैं. प्रेग्नेंसी के दौरान मसाज करने से माँसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर डिलीवरी के लिए तैयार होता है. बेहतर मसाज आपको दर्द और ऐंठन से भी राहत देती है. प्रेग्नेंसी के दौरान त्वचा बहुत ही सेंसेटिव हो जाती है. इसलिए आपको नेचुरल चीज़ों से बने ऑइल को ही चुनना चाहिए. आप माइलो आयुर्वेदिक प्रेग्नेंसी मसाज ऑइल- धन्वंतरम तैलम को चुन सकते हैं. तिल, आँवला, चंदन और अश्वगंधा की ख़ूबियों वाला यह ऑइल सूजन को कम करता है और बदन दर्द से राहत देता है. ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करते हुए यह गर्भवती महिलाओं को तनाव मुक्त रखता है. इतना ही नहीं, यह त्वचा को रूखेपन से भी बचाता है.
मेडिटेशन और योग सभी गर्भवती महिलाओं और माँओं के लिए फ़ायदेमंद होता है. ऐसे में आप रोज़ाना नियमित रूप से कुछ योगासन कर सकते हैं. इससे आपको शरीर में होने वाले दर्द से राहत मिलती है. हालाँकि, योग शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह ले लें और पूछ लें कि कौन-से योगासन गर्भावस्था या उसके बाद आपको नहीं करने चाहिए.
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प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में पर्याप्त, आरामदायक व सही पोजीशन में सोने से भी आपको शरीर में होने वाले दर्द से राहत मिलती है. इसलिए रोज़ाना एक ही समय पर सोने की कोशिश करें. बता दें, एक सेहतमंद माँ और बच्चे के लिए पूरे दिन में आठ घंटे की नींद बहुत ज़रूरी होती है.
बढ़ते पेट के कारण, पेट की त्वचा और मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है. इस समय पेट को पर्याप्त जगह की ज़रूरत होती है. इसलिए इस समय गर्भवती महिलाओं को टाइट कपड़े पहनने से बचना चाहिए.
ऊपर बताये आसान तरीक़ों को अपना कर आप प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में होने वाले दर्द से राहत पा सकते हैं. उम्मीद है कि आपको इस आर्टिकल में बताई गई जानकारी ज़रूर पसंद आई होगी.




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