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    बच्चे को बिना किसी सहारे के बैठाने में बेहद फायदेमंद है ये टिप्स

    Growth & Development

    बच्चे को बिना किसी सहारे के बैठाने में बेहद फायदेमंद है ये टिप्स

    12 December 2022 को अपडेट किया गया

    बच्चा 6 महीने का होने पर बिना सहारे के बैठ पाता है. हालांकि कुछ बच्चे इससे जल्दी और कुछ बच्चे इससे लेट भी बैठना सीखते हैं. ये इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वह एक्टिव हैं या मूव करना चाहते हैं? बच्चे का बिना सहारे के बैठना उसकी पुरानी एक्टिविटी जैसे-रोलिंग और टमी टाइम पर भी निर्भर करती है. बच्चा बैठने के लिए खुद से ट्राई करें, इसके लिए उसे ज़्यादा वक़्त फर्श पर खेलने देने की सलाह दी जाती है. अक्सर पैरेंट्स ये पूछते हैं कि बच्चे को बिना सहारे के बैठाने के लिए क्या करना चाहिए. इसके लिए सबसे पहले ये देखना होगा कि बच्चे ने बैठने के लिए बॉडी को मज़बूत करने की स्किल्स प्राप्त कर ली है या नहीं. ऐसे में आप नीचे बताए कुछ तरीको को आजमा सकते हैं.

    1. बच्चे को सहारा देकर सीधा खड़ा करना

    जब आप 2 महीने तक के बच्चे को अपने कंधे पर सीधा लेते हैं, तो वह अपनी गर्दन की मसल्स से सिर की पोजीशन को नियंत्रित करने की कोशिश करता है शुरुआत में बच्चे का सिर आगे-पीछे गिरता रहता है, इसलिए इसे सपोर्ट की ज़रूरत होती है.

    जब बच्चे को गोद में ले- जब बच्चा अपने सिर की पोजीशन नियंत्रित कर पाता है तो आप अपना सपोर्ट आगे बढ़ा सकते हैं. सबसे पहले बच्चे की ऊपरी बॉडी, फिर मिड बॉडी, फिर नीचे की बॉडी और आखिर में हिप्स को सपोर्ट करें.

    धीरे से बच्चे को बीच से पलटाएं – बच्चे को पलटाने के बाद उसे अपनी मसल्स का इस्तेमाल कर खुद को वापस से बीच में आने दें.

    2. पेट के बल खेलने दें

    बच्चे को पेट के बल खेलने दें, इससे उसके पीठ की मसल्स मज़बूत होगी. बच्चा जब अपना सिर उठाता है तो वह अपनी नेक एक्टेन्सर्स को मज़बूत करता है. जब बच्चा ज़्यादा ऊपर उठता है और अपनी कोहनी का सहारा लेकर खिलौने तक पहुंचने के लिए अपने हाथों को बढ़ाता है, तो इस वक्त वह अपने कंधे के पास की मसल्स और ऊपरी बैक एक्सटेन्सर्स को मज़बूत करता है. जब बच्चा खिलौने की तरफ अपने हाथ बढ़ाता है तो वह अपनी बैक एक्टेन्सर्स से नीचे हिप्स तक के हिस्से को मज़बूत करता है.

    3. पीठ के सहारे खेलना

    इस तरह खेलने से बच्चे के आगे की बॉडी की मसल्स मज़बूत होती है. जब बच्चा अपनी पीठ के बल लेटता है और खिलौनों तक पहुंचने की कोशिश करता है, तो वह अपनी छाती और ऊपरी धड़ के फ्लैक्सर्स का उपयोग कर रहा होता है. जब बच्चा पीठ के बल लेटे हुए अपने पैरों को हाथों तक लाता है और उन्हें मुँह तक ले जाता है, तो इससे उसकी पेट की मसल्स मज़बूत होती है.

    4. रोलिंग

    रोलिंग से बच्चा अपने धड़ की मसल्स को मज़बूत करता है, क्योंकि ये दोनों साथ में सामंजस्य करके काम करते हैं.

    बच्चे को बैठने में मदद करने वाली पोज़िशन्स:

    अगर आपका बच्चा प्रीकर्सर स्किल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर लेता है और सिर के साथ-साथ मिड-बॉडी पर कंट्रोल दिखाने लगता है तो आप उन्हें बिना सहारे के बैठाने के लिए ये सिटिंग पोजिशन इस्तेमाल कर सकते हैं-

    • अपनी गोद में बैठाना (3-6 महीने) – अपनी गोदी में बैठाकर अपने हाथ को बच्चे के चेस्ट से लेकर हिप्स तक अलग-अलग जगह रखें, जिससे वह अपने धड़ पर कंट्रोल कर सके.
    • अपने पैरों के बीच में बच्चे को ज़मीन पर बैठाना (4-5 महीने) – इस पोजीशन में बच्चा सुरक्षित रूप से अपने दायीं और बायीं तरफ झुक सकता है और अपने हाथ की मदद से वापस सेंटर में आ सकता है.
    • बम्बू कुर्सी पर बैठना (4-5 महीने) – वे बच्चे जो ऊपरी धड़ को कंट्रोल करना शुरू कर देते हैं, लेकिन हर तरफ गिरने लगते हैं, उनके लिए बम्बू कुर्सी सही है. ट्रे में खिलौने रखने या चेस्ट जितने या उससे ज़्यादा ऊंचाई वाले खिलौनों तक पहुंचते हुए बच्चे के कंधे और ऊपरी पीठ मज़बूत होती है.
    • बॉक्स या लॉन्ड्री बास्केट के कोने में बैठना (4-5 महीने) – आप बम्बू कुर्सी की बजाय ये भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ये शरीर को दोनों तरफ से सपोर्ट देता है. आप बच्चे को धीरे से खींच सकते हैं या साइड में झुका सकते हैं, जिससे बच्चा रिएक्ट करें और अपना बैलेंस बनाएं.
    • बॉडी पिलो की सहायता से ज़मीन पर बैठना (4-5 महीने) – बच्चे को बॉडी पिलो (तकिये) के सहारे बैठाएं और उसके खिलौने थोड़ा दूर रख दें. जिससे वह उन खिलौने को लेने की कोशिश करेगा और वापस सेंटर में आ जाएगा.
    • ट्रायपॉड सिटिंग पोजिशन (4-6 महीने) – ट्रायपॉड सिटिंग पोजीशन में बच्चा अपने हाथों को आगे करते हुए बैठता है. उसके खिलौनों को तकिये पर रखें, ताकि वे बच्चे के आई लेवल तक हो. इससे बच्चा खिलौने लेने के लिए अपने धड़ की मसल्स को सीधा करने के लिए प्रोत्साहित होगा.
    • रिंग सिटिंग पोजिशन (6-8 महीने) – इस पोजीशन में बच्चे के पैर ऊपर की तरफ से एक-दूसरे से दूर फैले होते हैं, लेकिन तलवों से जुड़े रहते हैं, जिससे ये रिंग जैसी पोजीशन बनाते हैं. ये पोजीशन बिना सहारे के बैठना सीखने वाले बच्चों के लिए मज़बूत आधार बनाती है. इस पोजीशन में बच्चा दायीं या बायीं तरफ झुक सकता है, लेकिन वह अपने हाथ के सहारे वापस सेंटर में आ जाएगा. अब वह सीधी पीठ करके बैठ सकता है और दोनों हाथों से खेल सकता है.

    जब आपका बच्चा बिना सहारे के बैठना शुरू कर देता है, तब वह जल्द ही दूर रखे खिलौनों तक पहुंचने लगता है. इससे वह अपने धड़ को कंट्रोल करके सिटिंग पोजिशन से पेट के बल पहुंच जाता है.

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    Written by

    Jyoti Prajapati

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