
Obstetrician & Gynecologist · 41 years experience
सारांश
बच्चों को हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, गोभी, बथुआ) खिलाना मुश्किल लगता है क्योंकि इनमें मिठास कम और हल्की कड़वाहट होती है, जो बच्चों को कम पसंद आती है। हरी सब्जियाँ आयरन, कैल्शियम, फाइबर, फोलेट और बीटा-कैरोटीन से भरपूर होती हैं, जो बच्चे की वृद्धि, इम्यूनिटी और पाचन के लिए ज़रूरी हैं (ICMR) (AAP)। बच्चे को सब्जियाँ खिलाने के सबसे असरदार तरीके हैं: स्वाद को मीठी सब्जियों के साथ संतुलित करना, सब्जियों को रेसिपी में छिपाना (परांठा, चीला, सूप, स्मूदी), छोटे हिस्से बार-बार देना, खुद रोल मॉडल बनना और धैर्य रखना। ज़बरदस्ती न खिलाएँ, इससे बच्चा और दूर हो जाता है।
तुरंत जवाब
बच्चे हरी सब्जियाँ अक्सर इसलिए नहीं खाते क्योंकि इनमें मिठास कम और हल्की कड़वाहट होती है। उन्हें खिलाने के लिए सब्जियों को परांठे, चीले, सूप, स्मूदी या पास्ता में छिपाएँ, मीठी सब्जियों के साथ मिलाएँ, छोटे हिस्से बार-बार दें, खुद सब्जियाँ खाकर रोल मॉडल बनें और धैर्य रखें। ज़बरदस्ती न खिलाएँ।
लेखिका: प्रियंका वर्मा, सीनियर न्यूट्रिशन कंटेंट एडिटर, Mylo पेरेंटिंग डेस्क मेडिकल रिव्यू: डॉ. कुसुम सभरवाल, MBBS, DGO (प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, 41 वर्ष अनुभव), ICMR और AAP दिशानिर्देशों के अनुसार अंतिम अपडेट: 11 जून 2026
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी पेशेवर चिकित्सा या पोषण सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपका बच्चा बहुत कम खाता है, वज़न नहीं बढ़ रहा, या आपको उसके पोषण की चिंता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या डाइटिशियन से सलाह लें।
हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, बथुआ, सरसों, गोभी के पत्ते) बच्चे के विकास के लिए बेहद पौष्टिक हैं (ICMR) (AAP):
| पोषक तत्व | फायदा |
|---|---|
| आयरन | खून बनाने और एनीमिया से बचाव में |
| कैल्शियम | मज़बूत हड्डियाँ और दाँत |
| फाइबर | पाचन ठीक रखता है, कब्ज़ से बचाव |
| फोलेट | कोशिका वृद्धि और विकास |
| बीटा-कैरोटीन (विटामिन A) | आँखों और त्वचा की सेहत |
| विटामिन C | इम्यूनिटी और आयरन अवशोषण |
| एंटीऑक्सीडेंट | बीमारियों से सुरक्षा |
भारतीय बच्चों में आयरन और कैल्शियम की कमी आम है, इसलिए हरी सब्जियाँ खिलाना और भी ज़रूरी हो जाता है (ICMR)।
बच्चों के सब्जियाँ मना करने के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं (AAP):
यह जानना ज़रूरी है कि सब्जियाँ मना करना सामान्य है, यह आपकी पेरेंटिंग की कमी नहीं है। थोड़े धैर्य और तरीकों से यह बदला जा सकता है।
कड़वी हरी सब्जियों को मीठी सब्जियों (गाजर, मटर, शकरकंद) के साथ मिलाएँ ताकि स्वाद संतुलित हो जाए।
बच्चे अक्सर सूप पसंद करते हैं; पालक, गाजर और टमाटर का सूप पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है।
पालक को केला, सेब या दही के साथ ब्लेंड करें, फलों की मिठास कड़वाहट छिपा देती है।
बारीक कटी सब्जियाँ अंडे या बेसन के मफिन में मिलाकर बेक करें, बच्चों को मज़ेदार लगते हैं।
सब्जियों को रंग-बिरंगी प्लेट, मज़ेदार आकार या चेहरे बनाकर परोसें, बच्चे आँख से भी खाते हैं।
एक बार में ढेर सारा न दें; थोड़ा-थोड़ा बार-बार देने से बच्चा धीरे-धीरे आदी होता है।
माता-पिता को देखकर बच्चे सीखते हैं। परिवार के साथ बैठकर खुशी से सब्जियाँ खाएँ।
बच्चे को सब्जी धोने, सजाने या चुनने में शामिल करें; जो खाना वे खुद बनाते हैं, उसे खाना पसंद करते हैं।
एक बच्चे को नया स्वाद अपनाने में 10 से 15 बार लग सकते हैं (AAP)। बार-बार कोशिश करें, पर ज़बरदस्ती न करें।
| उम्र | कैसे दें |
|---|---|
| 6 महीने से | मसली/प्यूरी की हुई पालक, मटर (माँ के दूध के साथ) |
| 8 से 10 महीने | मसली सब्जी-खिचड़ी, दाल-पालक |
| 1 साल से | बारीक कटी सब्जियाँ, परांठा, चीला, सूप |
| 2 साल से | फिंगर फूड के रूप में, स्मूदी, सलाद (नरम) |
6 महीने से पहले शिशु को केवल माँ का दूध दें, ठोस आहार 6 महीने बाद ही शुरू करें (WHO)। दम घुटने से बचाव के लिए भोजन नरम और उम्र के अनुसार हो।
| रेसिपी | छिपी हुई सब्जी |
|---|---|
| पालक परांठा | पालक |
| मेथी थेपला | मेथी |
| दाल पालक | पालक |
| वेज चीला/डोसा | पालक, गाजर, धनिया |
| पालक राइस/पुलाव | पालक |
| सब्जी का सूप | पालक, गाजर, टमाटर |
| हरी स्मूदी | पालक + केला |
| वेज इडली | बारीक सब्जियाँ |
| पालक/मेथी मुठिया | पालक, मेथी |
इन रेसिपी में नमक और तेल कम रखें, और मसाले उम्र के अनुसार हल्के रखें।
| मिथक | तथ्य | स्रोत |
|---|---|---|
| "ज़बरदस्ती खिलाने से बच्चा सब्जी खाने लगेगा" | गलत। इससे नापसंदगी बढ़ती है | AAP |
| "एक बार मना कर दिया तो बच्चा कभी नहीं खाएगा" | गलत। 10 से 15 बार कोशिश से स्वाद बदलता है | AAP |
| "सप्लीमेंट सब्जियों की जगह ले सकते हैं" | गलत। असली भोजन सबसे अच्छा है | ICMR |
| "सब्जी छिपाना धोखा है, गलत है" | गलत। यह एक मान्य और असरदार तरीका है | AAP |
| "जूस सब्जी जितना ही फायदेमंद है" | गलत। साबुत सब्जी में फाइबर ज़्यादा होता है | ICMR |
| "पिकी ईटिंग का मतलब बच्चा बीमार है" | गलत। टॉडलर में यह सामान्य अवस्था है | AAP |
सबसे असरदार तरीके हैं: सब्जियों को परांठे, चीले, सूप, स्मूदी या खिचड़ी में छिपाना, उन्हें मीठी सब्जियों के साथ मिलाना, छोटे हिस्से बार-बार देना, खुद रोल मॉडल बनना और धैर्य रखना (AAP)। ज़बरदस्ती न करें।
Hari sabzi ko recipe mein chhupayें: palak paratha, veg cheela, dal-palak, soup ya smoothie banayें. Meethi sabziyon (gaajar, matar) ke saath mix karें taaki kadwahat kam ho. Chhote portions baar-baar dें, khud sabzi khakar example banें, aur sabra rakhें. Zabardasti na karें, isse bachcha aur door ho jata hai.
बच्चे अक्सर हरी सब्जियाँ हल्की कड़वाहट, कम मिठास और नई बनावट के कारण मना करते हैं (AAP)। यह सामान्य है और धैर्य व सही तरीकों से बदला जा सकता है।
6 महीने से मसली/प्यूरी की हुई हरी सब्जियाँ (पालक, मटर) माँ के दूध के साथ देना शुरू कर सकते हैं (WHO)। 6 महीने से पहले केवल माँ का दूध दें। उम्र के अनुसार भोजन नरम रखें।
घबराएँ नहीं, यह सामान्य है। छोटे हिस्से दें, स्वाद मीठी सब्जियों से संतुलित करें, और बार-बार (10 से 15 बार) कोशिश करें (AAP)। ज़बरदस्ती न करें। धीरे-धीरे बच्चा नया स्वाद अपना लेगा।
Picky eating toddlers mein normal hai. Strategy: ek time par ek nayi sabzi thodi matra mein dें, usse meethi sabzi ke saath mix karें, khane ko fun aur colorful banayें, bachche ko cooking mein shamil karें, aur khud family ke saath sabzi khayें. Sabse zaruri, sabra rakhें aur zabardasti na karें. Agar bachcha bahut kam khata hai ya weight nahi badh raha, doctor se milें.
हाँ, यह एक मान्य और असरदार तरीका है (AAP)। परांठे, चीले या स्मूदी में सब्जियाँ मिलाना पोषण देने का अच्छा तरीका है। साथ ही बच्चे को असली सब्जियाँ भी दिखाते और देते रहें, ताकि वह उनका स्वाद भी पहचाने।
सप्लीमेंट असली भोजन का विकल्प नहीं हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना सप्लीमेंट न दें (ICMR)। पहले अलग-अलग तरीकों से सब्जियाँ खिलाने की कोशिश करें। अगर बच्चे में पोषण की कमी का संदेह हो, तो डॉक्टर से जाँच कराएँ।
हरी सब्जियाँ आयरन (खून), कैल्शियम (हड्डियाँ), फाइबर (पाचन), फोलेट और विटामिन A व C देती हैं, जो बच्चे की वृद्धि, इम्यूनिटी और एनीमिया से बचाव के लिए ज़रूरी हैं (ICMR)।




This content is for informational purposes only and should not replace professional medical advice. Consult with a physician or other health care professional if you have any concerns or questions about your health. If you rely on the information provided here, you do so solely at your own risk.

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