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सारांश




फ़ीमेल फर्टिलिटी में गिरावट और इसके कारण पैदा होने वाली इंफर्टिलिटी, समय के साथ एक बड़ी समस्या बन गयी है. फर्टिलिटी में गिरावट का मतलब है कि महिलाओं में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की क्षमता में कमी आना, ख़ासतौर पर एग्स की क्वालिटी का खराब हो जाना. इसके कई कारण हो सकते हैं जिनमें लाइफस्टाइल से लेकर, न्यूट्रिशन और गाइनेकोलॉजिकल प्रॉब्लम शामिल हैं.
एग क्वालिटी में कमी आने का कारण चाहे जो भी हो लेकिन ऐसा होने पर कुछ ख़ास क़िस्म (Signs of bad egg quality) के लक्षण दिखने लगते हैं जैसे कि-
इरेगुलर मेंस्ट्रुएशन का संबंध हार्मोनल इंबैलेंस से है जिससे एग्स के मैच्योर होने की प्रोसेस में व्यवधान पड़ता है. हार्मोनल असंतुलन के कारण लो क्वालिटी एग्स का प्रोडक्शन होने लगता है जिससे फर्टिलाइज़ेशन में रुकावट पैदा हो जाती है.
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ख़राब क्वालिटी के एग्स से न केवल फर्टिलाइज़ेशन में दिक्कत आती है; बल्कि इंप्लांटेशन और हेल्दी प्रेग्नेंसी में भी कठिनाई हो सकती है. इस वजह से प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ही अक्सर मिसकैरेज हो जाता है.
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद से भी अगर प्रेग्नेंसी न पाए तो इसे भी एग्स की ख़राब क्वालिटी से जोड़कर देखा जाता है. लो क्वालिटी एग्स से आईवीएफ के दौरान फर्टिलाइज़ेशन और एम्ब्रियो डेवलपमेंट ठीक से नहीं हो पाता जिससे सक्सेस रेट कम हो जाता है.
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फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन्स (FSH) की असामान्यता से भी ख़राब एग क्वालिटी का अंदाज़ लगाया जाता है. अक्सर घटते हुए ओवेरियन रिजर्व या फिर प्रीमैच्योर मेनोपॉज में एफएसएच का बढ़ा हुआ लेवल देखने को मिलता है जिसका मतलब है ओवरीज़ को मैच्योर एग्स रिलीज़ करने के लिए स्ट्रगल करना पड़ रहा है.
फर्टिलाइज़ेशन ना हो पाना या एम्ब्रियो का ठीक तरह से डेवलप ना हो पाना भी एग्स की ख़राब क्वालिटी की एक और निशानी है जहाँ ओवरी से निकलने वाले अंडों में अक्सर क्रोमोसोमल असामान्यताएँ या स्ट्रक्चरल प्रोब्लंस होती हैं जो फर्टिलाइज़ेशन और एम्ब्रियो डेवलपमेंट में बाधा डालती हैं.
आइये अब जानते हैं उन फ़ैक्टर्स के बारे में जो एग्स की ख़राब क्वालिटी का कारण बनते हैं.
बड़ी उम्र की महिलाओं का ओवेरियन रिज़र्व कम हो जाता है जिससे ओवरीज़ में बचे हुए अंडों की संख्या और क्वालिटी भी घट जाती है. पुराने अंडों में आनुवांशिक डिसॉर्डर का खतरा बढ़ जाता है जिससे अब्नॉर्मल एम्ब्रियो डेवलपमेंट हो सकता है.
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ख़राब लाइफस्टाइल भी एग क्वालिटी को ख़राब करती है. ग़लत खानपान, स्ट्रेस और फिजिकल एक्टिविटी की कमी और मोटापा मिल कर बॉडी में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, और हार्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं जिससे एग्स की मैच्योर होने की क्षमता घटने लगती है.
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) या अनियमित मासिक धर्म जैसी स्थितियों में एण्ड्रोजन (androgens) और इंसुलिन का लेवल अक्सर बढ़ जाता है जिसे एग मेच्योरिटी और ओव्यूलेशन बुरी तरह से प्रभावित होता है और प्रजनन क्षमता में कमी आने का खतरा बढ़ जाता है.
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टोक्सिन्स, पोल्युटेंट्स, हैवीी मेटल्स, पेस्टिसाइड्स, और एंडोक्राइन डिस्रपक्टिव केमिकल्स (endocrine-disrupting chemicals) जैसे पोल्युटेंट्स के संपर्क में आने से डेवलप हो रहे एग्स में डीएनए डैमेज तक हो सकता है.
डाइबिटीज, मोटापा और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) अनियमित ओव्यूलेशन और इमैच्योर एग्स के प्रोडक्शन का मुख्य कारण है. एंडोमेट्रियोसिस और ल्यूपस या थायरॉइड डिस्फंक्शन जैसे ऑटोइम्यून डिसॉर्डर भी एग्स की ग्रोथ और फर्टिलाइज़ेशन को प्रभावित करते हैं.
अंडे की क्वालिटी निर्धारित करने में जेनेटिक म्यूटेशन्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. एन्यूप्लोइडी (aneuploidy) जैसी क्रोमोसोमल अब्नोर्मलिटीज़ के कारण फर्टिलाइज़ेशन के फेल होने, अब्नॉर्मल एम्ब्रियो डेवलपमेंट और मिसकैरेज का खतरा रहता है.
प्रोसेस्ड फूड, चीनी और ट्रांस फैट से भरपूर चीज़ें अधिक खाने पर, पोषक तत्वों की कमी होने से धीरे-धीरे एग क्वालिटी ख़राब हो जाती है जिससे अंडों की ग्रोथ ठीक से नहीं होती और फर्टिलाइजेशन में दिक्कत आने लगती है.
क्रोनिक स्ट्रेस, कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन को ट्रिगर करता है, जो फॉलिकल डेवलपमेंट और ओव्यूलेशन में गड़बड़ी के साथ ही ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को भी बढ़ाता है जिससे प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है.
अब आपको देंगे कुछ ऐसे टिप्स जिन्हें अपनाकर आप तीस दिन (Improve egg quality in 30 days in Hindi) में अपनी फर्टिलिटी में काफी सुधार ला सकते हैं. एग क्वालिटी इंप्रूव करने (How to improve egg quality in Hindi) से जुड़े ये उपाय बहुत ही आसान हैं जिन्हें बस आपको अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में फॉलो करना होगा; जैसे कि
हमेशा संतुलित भोजन लें जिसमें (foods for better egg quality) ज़रूरी अमीनो एसिड, लीन प्रोटीन के अलावा एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन से भरपूर फल और सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और ड्राई फ्रूट्स ज़रूर शामिल करें. फर्टिलिटी को सपोर्ट करने वाले फूड आइटम्स (Foods to improve female egg quality in Hindi) और रेगुलर एक्सरसाइज से एग्स क्वालिटी में सुधार करने में काफी मदद मिलती है.
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बेहतर क्वालिटी के एग्स और फर्टिलिटी इंप्रूव करने के लिए स्ट्रेस कंट्रोल बहुत ज़रूरी है. इसके लिए आप रिलैक्सेशन टेक्निक्स, माइंडफुलनेस और सेल्फ केयर का सहारा लें जिनसे बहुत कम समय में आपको लाभ दिखाई देगा.
नियमित व्यायाम करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जिससे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलने से रिप्रोडक्टिव सिस्टम स्वस्थ होता है. इससे न केवल एग क्वालिटी; बल्कि ओवरऑल फर्टिलिटी बढ़ाने में भी मदद मिलती है.
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एग क्वालिटी इंप्रूव करने के लिए हेल्दी वेट मैनेजमेंट ज़रूरी है क्योंकि जहाँ अधिक वेट हार्मोनल असंतुलन पैदा करेगा वहीं कम वज़न से एग्स की ग्रोथ के लिए आवश्यक हार्मोनल सिग्नलिंग गड़बड़ा जाती है.
खुद को हाइड्रेटेड रखें क्योंकि इससे एग मेच्योरेशन (egg maturation) के लिए ज़रूरी सेलुलर प्रोसेस मज़बूत होती है.
पोषण भी एग क्वालिटी को निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण फैक्टर है. फोलेट, एंटीऑक्सिडेंट, ओमेगा -3 फैटी एसिड और विटामिन डी और ई और सीओक्यू10 जैसे आवश्यक पोषक तत्व एग्स की मैच्योरिटी, डीएनए इंटिग्रिटी (DNA integrity) में मददगार हैं और एग क्वालिटी को इंप्रूव करते हैं. डॉक्टर की सलाह से आप इनका सेवन कर सकते हैं.
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हेल्दी लाइफस्टाइल के अलावा एग क्वालिटी में सुधार के लिए फर्टिलिटी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए जो आपकी फैमिली हिस्ट्री और हेल्थ कंडीशन को जानकर कंप्लीट गाइडेंस देंगे.
लाइफस्टाइल में बदलाव से एग क्वालिटी में प्राकृतिक रूप सुधार करना संभव है. अच्छे रिज़ल्ट्स के लिए अपने नए रूटीन को पूरी तरह फॉलो करें और मानसिक रूप से खुद को सकारात्मक रखें.
1. Nehra D, Le HD, Fallon EM, Carlson SJ, Woods D, et al. (2012). Prolonging the female reproductive lifespan and improving egg quality with dietary omega-3 fatty acids.
2. Chang Y, Li J, Li X, Liu H, Liang X. (2018). Egg Quality and Pregnancy Outcome in Young Infertile Women with Diminished Ovarian Reserve.
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