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सारांश




हस्तमैथुन यानी कि मास्टरबेशन (Masturbation) एक सामान्य शारीरिक क्रिया है, ठीक वैसे ही जैसे आप यूरिन पास करते हैं या फिर साँस लेते हैं. लेकिन हैरानी की बात है कि इस विषय पर बात करते समय अक्सर लोग कतराते हैं. समाज का एक काफ़ी बड़ा हिस्सा ऐसा है जिसे इस विषय पर या तो कम जानकारी है या फिर ग़लत जानकारी है. यही कारण है कि मास्टरबेशन को लेकर कई तरह के मिथ फैले हुए हैं. अगर आपने भी मास्टरबेशन से जुड़ी सुनी-सुनाई बातों पर यक़ीन कर लिया है, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है.
इस आर्टिकल के ज़रिये हम फीमेल मास्टरबेशन के बारे में डिटेल में बात करेंगे. लेकिन इससे पहले कि हम आर्टिकल में आगे बढ़े हम आपको बताना चाहते हैं कि मास्टरबेशन महिला और पुरुष दोनों की ज़रूरत हो सकता है. लेकिन कोई मास्टरबेशन करना चाहता है या नहीं यह पूरी तरह से उसका निजी मामला है.
हस्तमैथुन (Hastmaithun) यौन सुख के लिए ख़ुद के द्वारा अपने प्राइवेट पार्ट्स को उत्तेजित करने की एक सामान्य क्रिया है. इस क्रिया के दौरान उंगली, हाथ और सेक्स टॉय आदि का इस्तेमाल किया जाता है. आमतौर पर इस क्रिया को उस समय किया जाता है, जब किसी व्यक्ति के मन में सेक्स करने की इच्छा होती है. मास्टरबेशन महिला और पुरुष दोनों द्वारा किया जाता है.
जब कोई महिला अपने निजी अंगों; जैसे- ब्रेस्ट व वेजाइना को छूती है और ख़ुद को उत्तेजित करती है, तो इस क्रिया को फीमेल मास्टरबेशन (Female Masturbation) कहा जाता है, वहीं जब एक पुरुष अपने प्राइवेट पार्ट पेनिस को छूकर स्वयं को संतुष्ट करने की कोशिश करता है, तो इसे (Male Masturbation) कहा जाता है. आमतौर पर लोग चरमोत्कर्ष या ऑर्गेज्म होने तक मास्टरबेशन करते हैं. इस दौरान ऑर्गेज्म तक पहुँचने में लगने वाला समय हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है.
कुछ स्टडी के मुताबिक महिलाओं में मास्टरबेशन के द्वारा ऑर्गेज्म तक पहुँचने में औसतन 8 मिनट का समय लग सकता है. हालाँकि, पार्टनर के साथ संबंध बनाने पर यह समय कम हो सकता है.
चलिए जानते हैं कि फीमेल मास्टरबेशन से जुड़े कॉमन मिथ और उनसे जुड़ी सच्चाई के बारे में
अक्सर जब मास्टरबेशन की बात आती है, तो माना जाता कि महिलाएँ मास्टरबेशन नहीं करती हैं. लेकिन असल में ऐसा नहीं है. बता दें कि यह बहुत ही नॉर्मल फिजिकल फंक्शन है. सेक्स के प्रति जितनी पुरुषों की इच्छा होती है, उतनी ही महिलाओं की भी होती है.
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असल में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है; बल्कि मास्टरबेशन के ज़रिये आप अपनी सेक्स ड्राइव को बेहतर तरीक़े से समझ पाते हैं. आप समझ पाते हैं कि आपको सेक्स के दौरान किन चीज़ों से ज़्यादा खुशी होती है.
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मास्टरबेशन को लेकर एक मिथ यह भी है कि जो लोग मास्टबेशन करते हैं, उनकी सेक्शुअल लाइफ हेल्दी नहीं होती है. जबकि असल में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है; बल्कि मास्टरबेशन करने से आपका और आपके पार्टनर का इमोशनल रिलेशन और मज़बूत होता है.
सप्ताह में 3-4 बार हस्तमैथुन करना सामान्य है. कुछ लोग इसे हर दिन एक बार करना पसंद कर सकते हैं. कोई कितनी बार मास्टरबेशन कर सकता है, इसके लिए कोई तय नियम नहीं है. लेकिन यह कहना ग़लत होगा कि एक बार मास्टरबेशन करने से इसकी आदत हो जाती है. हालाँकि, अगर बार-बार मास्टरबेशन करने की ज़रूरत महसूस होने पर काउंसलर से मिलना बेहतर है.
अपने पार्टनर से ऐसी कोई बात न छुपाएँ. आप इस विषय पर अपने पार्टनर से खुलकर बात कर सकते हैं. इसमें कोई बुराई नहीं है. ऐसा करने से आपका रिश्ता और मज़बूत होगा.
पीरियड्स के दौरान भी मास्टरबेशन किया जा सकता है; बल्कि इस दौरान मास्टरबेशन करने से पीरियड्स क्रैम्प से राहत मिल सकती है. हालाँकि, इस दौरान महिलाओं के प्राइवेट पार्ट्स अधिक सेंसिटिव हो जाते हैं, इसलिए इस दौरान किसी सुरक्षित तरीक़े पर विचार करना चाहिए.
मास्टरबेशन का उम्र से कोई लेना देना नहीं है. इसे शुरू करने या बंद करने की कोई निश्चित उम्र नहीं है. यह एक हेल्दी एक्टिविटी है.
मास्टरबेशन ऑर्गेज्म तक पहुँचने का एक सुरक्षित तरीक़ा है. हालाँकि, इस दौरान आपको त्वचा में हल्की जलन या इचिंग महसूस हो सकती है. लेकिन इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं. कुछ मामलों में मास्टरबेशन महिलाओं के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है. यह तनाव और सिरदर्द को कम करने में मदद कर सकता है. आप रिलेक्स महसूस कर सकते हैं. इतना ही नहीं, मास्टरबेशन बेहतर नींद लेने में भी मदद करता है.
फीमेल मास्टरबेशन को लेकर एक मिथ यह भी है कि यह ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है. जबकि असल में इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. ओव्यूलेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जो हार्मोन्स द्वारा नियंत्रित होती है और मास्टरबेशन ओव्यूलेशन को प्रभावित करने वाले हार्मोन्स को प्रभावित नहीं करता है. इसका मतलब यह है कि मास्टरबेशन ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करता है.
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मास्टरबेशन हार्मोनल असंतुलन का कारण नहीं है, क्योंकि इसके पीछे भी कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. हार्मोनल असंतुलन के पीछे स्ट्रेस, डाइट और कोई मेडिकल कंडीशन जैसे कई कारण हो सकते हैं. असल में मास्टरबेशन स्ट्रेस को कम करने और मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिसका हार्मोनल संतुलन पर पॉजीटिव असर हो सकता है.
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) (Polycystic ovary syndrome (PCOS) एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जो महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम को प्रभावित करता है. लेकिन मास्टरबेशन से पीसीओएस की समस्या को किसी भी तरह से बढ़ावा नहीं मिलता है.
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मास्टरबेशन का इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया से कोई लेना- देना नहीं है. इम्प्लांटेशन फर्टिलाइजेशन के बाद होने वाली प्रक्रिया है. मास्टरबेशन का इस पर कोई असर नहीं होता है.
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मास्टरबेशन प्रेग्नेंसी रोकने का कोई तरीक़ा नहीं है; बल्कि इससे महिलाएँ अपनी यौन संबंधित ज़रूरतों को बेहतर तरीक़े से समझ पाती है. मास्टरबेशन की मदद से महिलाएँ सेक्स के प्रति अधिक कंफर्टेबल होती हैं. यह सेक्शुअल हेल्थ को बेहतर बना सकता है.
उम्मीद है कि फीमेल मास्टरबेशन से जुड़े आपके हर सवाल का जवाब आपको मिल गया होगा. बता दें कि फीमेल मास्टरबेशन का ओव्यूलेशन, इम्प्लांटेशन, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस या फर्टिलिटी पर कोई नेगेटिव असर नहीं होता है.
मास्टरबेशन एक हेल्दी फिजिकल एक्टिविटी है. एक बार फिर बता दें कि मास्टरबेशन करना या न करना आपका निजी फ़ैसला है. साथ ही, इसका आपकी हेल्थ या रिलेशनशिप पर कोई नेगेटिव असर नहीं होता है.
रेफरेंस
1. Lidster CA, Horsburgh ME. (1994). Masturbation-beyond myth and taboo.
2. Rowland DL, Kolba TN, McNabney SM, Uribe D, Hevesi K. (2020). Why and How Women Masturbate, and the Relationship to Orgasmic Response.
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