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How to Get Regular Periods in PCOS in Hindi | क्या पीसीओएस होने पर भी पीरियड्स नियमित हो सकते हैं?

PCOS & PCOD
Written by - Kavita Upretyअंतिम अपडेट: Feb 11, 2026
How to Get Regular Periods in PCOS in Hindi | क्या पीसीओएस होने पर भी पीरियड्स नियमित हो सकते हैं?
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पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) युवा महिलाओं से जुड़ा एक एंडोक्राइन डिसॉर्डर (Endocrine Disorder) है और बाँझपन (Infertility) का एक प्रमुख कारण भी है. अक्सर यह कहा जाता जाता है कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को अनियमित पीरियड्स या बिल्कुल पीरियड्स नहीं होते हैं लेकिन यह एक मिथ है. पीसीओएस में भी रेगुलर पीरियड्स (How to get regular periods in PCOS in Hindi) होना संभव है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप हर पीरियड की साइकिल में ओव्यूलेट कर रहे हैं यानी कि रेगुलर पीरियड्स होने के बावजूद भी यह इंफर्टिलिटी का कारण बन सकता है.

पीसीओएस में पीरियड्स अनियमित क्यों होते हैं? (Causes of irregular periods in PCOS in Hindi)

पीसीओएस महिलाओं में अनियमित पीरियड्स की समस्या को जन्म देता है क्योंकि हर महीने होने वाला ओव्यूलेशन नहीं होता है और साथ ही एण्ड्रोजन (मेल हार्मोन) का लेवल भी बढ़ जाता है. इसके कई कारण हो सकते हैं; जैसे- हार्मोनल इंबैलेंस, एनोवुलेशन (Anovulation), इंसुलिन रेसिस्टेंस, मोटापा, स्ट्रेस आदि. आइये इनके बारे में विस्तार से समझते हैं

1. हार्मोन्स का असंतुलित होना (Hormonal Imbalance)

पीसीओएस मुख्य रूप से एक हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्या है जिसमें ओवरीज़ एण्ड्रोजन (Androgens) नामक हार्मोन का नॉर्मल से अधिक प्रोडक्शन करने लगती हैं. पीसीओएस से पीड़ित कुछ महिलाओं को नियमित पीरियड्स भी होते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी बॉडी में ओव्यूलेशन भी हो रहा है. बाहरी तौर पर सामान्य पीरियड्स होने के बावजूद भी ब्लड में एण्ड्रोजन का हाई लेवल ओव्यूलेशन में रुकावट पैदा करता है.

2. एनोवुलेशन (Anovulation)

एनोवुलेशन (Anovulation) के 70% मामलों का कारण भी पीसीओएस ही होता है. पीसीओएस की वजह से शरीर बहुत अधिक एण्ड्रोजन बनाता है, जिसके कारण ओवरीज़ में फॉलिकल (Follicles) की ग्रोथ पर असर पड़ता है और वो बड़े और मैच्योर होने के बजाय छोटे ही रह जाते हैं.

3. इंसुलिन रेसिस्टेंट (Insulin Resistance)

पीसीओएस से पीड़ित महिलाएँ अक्सर इंसुलिन रेसिस्टेंस से भी जूझ रही होती हैं. उनका शरीर इंसुलिन तो बना सकता है लेकिन उसका प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता जिससे उनमें टाइप 2 डाइबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.

4. मोटापा (Obesity)

मोटापा पीसीओएस के कई लक्षणों को बढ़ा देता है. पीसीओएस से पीड़ित अधिकतर महिलाओं में इंसुलिन का प्रोडक्शन तो होता है लेकिन बॉडी उसे सही तरह से यूज़ नहीं कर पाती है. बॉडी के सामान्य रूप से फंक्शन करने में इंसुलिन की कमी के कारण पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं का वज़न अब्नॉर्मल तरीके से बढ़ जाता है जिसे घटाने में ख़ासी मशक़्क़त करनी पड़ती है.

5. स्ट्रेस और लाइफस्टाइल फैक्टर्स (Stress and Lifestyle Factors)

स्ट्रेस, चिंता और डिप्रेशन पीसीओएस के सामान्य लक्षण हैं जो अक्सर हार्मोनल परिवर्तनों के कारण उभरने लगते हैं. पीसीओएस से पीड़ित कई महिलाओं को शरीर पर अतिरिक्त बाल और बढ़ते हुए वज़न का सामना करना पड़ता है जिससे उनके कॉन्फिडेंस और बॉडी लेंग्वेज पर बेहद नेगेटिव प्रभाव पड़ता है और अक्सर वो तनाव में आ जाती हैं.

आइये अब जानते हैं पीसीओएस में पीरियड्स को नॉर्मल कैसे किया जाए.

इसे भी पढ़ें : पीसीओएस होने पर कैसे रखें ख़ुद का ख़्याल?

पीसीओएस में पीरियड्स को रेगुलर करने के तरीक़े (How to get regular periods in PCOS in Hindi)

आगे हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएँगे जो पीसीओएस की समस्या में आपके पीरियड्स को (How to get regular periods with PCOS naturally in Hindi) रेगुलर करने में आपकी असरदार रूप से मदद कर सकते हैं.

1. बर्थ कंट्रोल पिल्स (Birth control pills)

पीसीओएस के इलाज के लिए हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स (Hormonal Birth Control Pills) का उपयोग बेहद प्रभावी है. इन गोलियों में एस्ट्रोजेन (Estrogen) और प्रोजेस्टिन (Progestin) दोनों होते हैं जो पीरियड्स की ब्लीडिंग को नियंत्रित करते हैं. यह गोलियाँ अब्नॉर्मल हेयर ग्रोथ और मुँहासों को कम करने में भी मदद करती हैं.

2. हार्मोनल थेरेपी (Hormone therapy)

पीसीओएस से पीड़ित ऐसी महिलायें जो गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए क्लोमीफीन नामक दवा एक बढ़िया इलाज है. क्लोमीफीन ओवरीज़ (ओव्यूलेशन) में हर महीने बनने वाले एग्स के प्रोडक्शन को बढ़ाता है.

3. मेटफोर्मिन (Metformin)

मेटफॉर्मिन इंसुलिन रेसिस्टेंस और ओवरीज़ में एण्ड्रोजन के प्रोडक्शन को कम करता है जिससे वेट बढ्ने से परेशान महिलाओं को फ़ायदा होता है. मेटफॉर्मिन कोलेस्ट्रॉल लेवल और इंसुलिन कंट्रोल में ज़्यादा प्रभावी है साथ ही यह वज़न घटाने में भी मदद करता है. इससे हाई रिस्क डायबिटीज के खतरे को भी कम किया जा सकता है.

4. मायो-इनोसिटोल (Myo-inositol)

मायो-इनोसिटोल(MI) इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है और हाइपरएंड्रोजेनिज्म (Hyperandrogenism) को कम करता है. पीरियड साइकिल में सुधार करता है और ओवरीज़ (Ovary) को नॉर्मल करने और एम्ब्रियो (Embryo) की क्वालिटी में भी सुधार लाता है.

5. वेट लॉस (Weight Loss)

इंसुलिन रेसिस्टेंस के कारण पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को वज़न घटाने में बेहद कठिनाई होती है. इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ने से बॉडी में फैट (Fat) जमा होने लगता है जिससे वेट तेज़ी से बढ़ता है. इसलिए वज़न घटाना भी पीसीओएस को कंट्रोल करने का एक असरदार उपाय है.

पीसीओएस होने पर इन नेचुरल तरीक़े से करें पीरियड्स को रेगुलर (How to get regular periods with PCOS naturally in Hindi)

अब आपको बताएँगे कुछ ऐसे तरीके़ जो पीसीओएस में नेचुरल तरीके़ से पीरियड्स को रेगुलर करने में आपकी मदद कर सकते हैं.

1. डाइट में बदलाव (Dietary changes)

वज़न घटाने की शुरुआत डाइट और व्यायाम से होती है. इसके लिए एक हेल्दी डाइट लेना शुरू करें. भोजन में कम स्टार्च वाली सब्ज़ियाँ और फल, प्रोटीन और लो फैट डेरी प्रोडक्ट्स को शामिल करें. इससे पीसीओएस से जुड़े रिस्क कम करने में मदद मिलेगी.

इसे भी पढ़ें : पीसीओएस होने पर कैसे होनी चाहिए आपकी डाइट?

2. स्ट्रेस मैनेजमेंट (Stress management)

स्ट्रेस के कारण बॉडी में कोर्टिसोल (cortisol) और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) का प्रोडक्शन बढ़ जाता है. प्रोजेस्टेरोन हालाँकि स्ट्रेस और चिंता को कम करता है, लेकिन साथ ही यह पीरियड्स के साइकिल को भी ख़राब कर सकता है. माइंडफुलनेस, मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग और अन्य तरीक़ोंं से आप स्ट्रेस को कम कर सकते हैं.

3. हर्बल टी (Herbal tea)

हर्बल टी पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में न केवल हार्मोनल असंतुलन को ठीक करती है; बल्कि इंसुलिन रेसिस्टेंस को घटाकर कई तरह के फ़ायदे पहुँचाती है. ग्रीन टी, पेपरमिंट, स्पेयरमिंट और कैमोमाइल जैसी ख़ास जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल चाय के एक या दो कप लेने से भी आपको पीसीओएस के लक्षणों में काफ़ी आराम मिल सकता है.

इसे भी पढ़ें : पीसीओएस को कंट्रोल करने में मदद कर सकती हैं ये ड्रिंक्स!

4. पर्याप्त नींद (Adequate sleep)

पीरियड्स से जुड़ी कई समस्याओं का कारण गहरी नींद न सो पाना भी है जो पीसीओएस की एक मुख्य समस्या है. इसको ठीक करने के लिए आप हर रोज़ एक निश्चित समय पर सोयें और जागें. दोपहर में सोने से बचें और दोपहर के बाद कैफ़ीन का सेवन कम से कम करें.

5. हेल्दी वज़न है ज़रूरी (Maintain a healthy weight)

हेल्दी वेट मैनेजमेंट से पीरियड्स को रेगुलेट करने और इसके लक्षणों से राहत पाने में बहुत मदद मिलती है. अधिक वज़न होने पर जहाँ अनियमित पीरियड्स की संभावना भी बढ़ जाती है वहीं पीरियड्स के दौरान बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग (bleeding) और दर्द भी होने लगता है. वेट को कंट्रोल में लाकर आप इन सब समस्याओं से छुटकारा पा सकती हैं.

इसे भी पढ़ें : महिलाओं के लिए किसी चमत्कारी टॉनिक से कम नहीं है अशोकारिष्ट!

प्रो टिप (Pro Tip)

पीसीओएस के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी होने के पीछे सिडेंटरी लाइफस्टाइल और ख़राब आहार विहार, प्रोसेस्ड शुगर और फूड आइटम्स का अधिक सेवन तथा सही पोषण की कमी को मुख्य कारण माना जाता है. इन सब से इंसुलिन रेसिस्टेंस भी तेजी से बढ़ता है जिससे डाइबिटीज़ होने का रिस्क बढ़ जाता है. सही इलाज़ के अलावा एक स्वस्थ जीवनशैली, और डायटरी चेंजेज के कॉबिनेशन से इसे कंट्रोल करने और धीरे -धीरे पूरी तरह से स्वस्थ होने में बेहद मदद मिल सकती है.

रेफरेंस

1. Rasquin LI, Anastasopoulou C, Mayrin JV. (2022). Polycystic Ovarian Disease.

2. Dennett CC, Simon J. (2015). The role of polycystic ovary syndrome in reproductive and metabolic health: overview and approaches for treatment.

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