
सारांश




बच्चे के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम ख़ुराक है इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान ही माँ के स्तनों में दूध का प्रोडक्शन होने लगता है और बच्चे के जन्म के तुरंत बाद माँ के स्तन दूध से भर जाते हैं. लेकिन कई बार डिलीवरी होने के बाद भी ब्रेस्ट में दूध नहीं उतरता और नवजात बच्चे का पेट नहीं भर पाता. आइये जानते हैं ऐसा क्यों होता है और इसे ठीक करने के लिए क्या करें.
ब्रेस्टमिल्क की प्रोसेस प्रोलैक्टिन हार्मोन से शुरू होती है, जो मेमरी ग्लेंड्स (mammary glands) को दूध बनाने के लिए उत्तेजित करती हैं. बच्चे के निप्पल चूसते ही उसमें मौजूद नर्व्स ब्रेन को सिग्नल भेजती हैं जिससे ऑक्सीटोसिन (oxytocin) हार्मोन रिलीज़ होने लगता है. ऑक्सीटोसिन के कारण दूध मिल्क डक्ट्स (milk ducts) से निकलकर, मिल्क साइनस (milk sinuses) से होता हुआ बच्चे के मुँह में चला जाता है और ब्रेस्ट मिल्क का कंपोज़िशन बच्चे की बढ़ती न्यूट्रीशनल ज़रूरतों के साथ बदलता रहता है.
ज़्यादातर मामलों में डिलीवरी के पहले कुछ दिनों के अंदर ही ब्रेस्टमिल्क बनना शुरू हो जाता है. शुरुआत में कोलोस्ट्रम आता है जो पोषक तत्वों से भरपूर पीला गाढ़ा दूध होता है. एंटीबॉडीज़ से भरपूर इस दूध से बच्चे का इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है और उसके सर्वाइवल में मदद मिलती है. इसके बाद ट्रांज़िशनल मिल्क (transitional milk) आता है जो अधिक सफेद रंग का होता है और फिर मैच्योर मिल्क (mature milk) आने लगता है जो पतला और नीले-सफेद से रंग का होता है.
कुछ माँओं में प्रेग्नेंसी के दौरान ही कोलोस्ट्रम बनने लगता है जबकि कुछ में डिलीवरी के बाद भी पर्याप्त दूध (No breast milk after delivery in Hindi) नहीं बन पाता. इसके कई कारण हो सकते हैं; जैसे कि-
वेजाइनल बर्थ में आमतौर पर ब्रेस्टमिल्क का प्रोडक्शन सामान्य रूप से होने लगता है लेकिन प्री मैच्योर बर्थ में अक्सर दूध उतरने में देरी होती है क्योंकि बॉडी को फुल टर्म प्रेग्नेंसी और डिलीवरी से जुड़े सामान्य हार्मोनल सिगनल्स नहीं मिलते हैं.
इसी तरह सिजेरियन या फिर असिस्टेड वेजाइनल डिलीवरी होने पर बच्चे और माँ का स्किन टु स्किन कांटेक्ट होने में कुछ समय लग सकता है. इसके अलावा पेन किलर्स या सर्जरी से जुड़े स्ट्रेस के कारण भी दूध उतरने में देरी हो सकती है.
डिलीवरी के दौरान होने वाले ब्लड लॉस से भी मिल्क प्रोडक्शन में देरी (No breast milk after delivery in Hindi )हो सकती है फिर चाहे वो सर्जरी से हो या वेजाइनल बर्थ से. ख़ून की कमी से जब बीपी लो हो जाता है तो इसके कारण ब्रेस्ट टिशूज़ में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है और मिल्क प्रोडक्शन के लिए ज़रूरी हार्मोनल सिग्नल नहीं जा पाते.
डिलीवरी के दौरान या उसके बाद दी जाने वाली पेन किलर्स; जैसे कि ओपिओइड (opioids) या और कोई तेज़ पेन किलर के साइड इफेक्ट्स भी इसका कारण बन सकते हैं. इनके असर से मिल्क प्रोडक्शन के लिए ज़रूरी हार्मोनल सिग्नल्स गड़बड़ा जाते हैं साथ ही कुछ पेन किलर्स से बेहोशी (drowsiness and sedation) भी रहती है जिससे ब्रेस्ट मिल्क कम हो सकता है.
प्लेसेंटा ऐसी हार्मोन्स रिलीज़ करता है जो गर्भावस्था के दौरान लेक्टेशन और मेमरी ग्लेण्ड्स (mammary glands) की ग्रोथ के लिए आवश्यक हैं; जैसे कि प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) और एस्ट्रोजन (Estrogen). अगर प्लेसेंटा ठीक से फंक्शन नहीं करती है तो इससे बच्चे के जन्म के बाद ब्रेस्ट मिल्क की आपूर्ति में देरी हो सकती है.
पीसीओएस से प्रोलैक्टिन जैसे रिप्रोडक्टिव हार्मोन का बैलेंस ख़राब हो जाता है जो मिल्क प्रोडक्शन के लिए ज़रूरी हैं. इसी तरह हाइपोथायरायडिज्म (underactive thyroid) और हाइपरथायरायडिज्म (overactive thyroid) दोनों ही ब्रेस्टफीडिंग को प्रभावित करते हैं. अनट्रीटेड थाइरायड वाली महिलाओं में मिल्क सप्लाई में कमी और मिल्क इजेक्शन रिफ्लेक्स (milk ejection reflex) की दिक्कत आ सकती है. इसी तरह महिलाओं में ब्रेस्ट टिशू के ठीक तरह से डिवेलप नहीं हो पाने या या ब्रेस्ट हाइपोप्लासिया (breast hypoplasia) के कारण भी दूध बनना कम हो जाता है.
प्रेग्नेंसी के दौरान हाई बीपी भी मिल्क प्रोडक्शनको कम कर सकता है. हाई बीपी से ब्लड सर्कुलेशन और हार्मोन रेग्युलेशन पर असर पड़ता है जिससे डिलीवरी के बाद दूध उतरने में देरी या कमी हो सकती है.
कई रिसर्च कहती हैं कि माँ का मोटापा भी मिल्क प्रोडक्शन में देरी या दूध में कमी का कारण बन सकता है. वहीं कम वज़न वाला बच्चा जो पर्याप्त रूप से दूध नहीं निकाल पाता है उससे भी माँ की दूध की आपूर्ति कम हो जाती है.
ब्रेस्टफ़ीडिंग माँ का भोजन सीधे तौर पर मिल्क प्रोडक्शन और दूध की क्वालिटी को प्रभावित करता है. माँ के आहार में पर्याप्त पोषक तत्वों और कैलोरी की कमी से दूध का उत्पादन कम हो जाता है.
स्ट्रेस होने पर शरीर जिस तरह प्रतिक्रिया करता है उससे कोर्टिसोल (cortisol) जैसे कुछ हार्मोन का स्राव होने लगता है जिससे मिल्क प्रोडक्शन पर नकारात्मक असर पड़ता है.
ब्रेस्ट मिल्क में देरी होने या दूध की कमी होने पर सबसे पहले अपने डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है. वे आपकी समस्या का पता लगाकर उचित इलाज़, गाइडेंस और लैचिंग का सही तरीक़ा सीखने में आपकी मदद करेंगे.
फैमिली का इमोशनल सपोर्ट, प्रोत्साहन और ब्रेस्टफ़ीडिंग में मदद एक नई माँ के एक्सपीरिएन्स को बेहतर बनाता है.
पर्याप्त कैलोरी लें. भोजन में होल व्हीट, प्रोटीन, फ्रूट्स और हेल्दी फेट युक्त फूड आइटम्स को ज़रूर शामिल करें. दूध बढ़ाने के लिए आप प्राकृतिक गैलेक्टागॉग्स; जैसे कि जई, मेथी, सौंफ़ जैसी चीज़ें भी ट्राई कर सकती हैं.
ख़ून के थक्के बनने (engorgement) और बंद मिल्क डक्ट्स को खोलने या मिल्क फ्लो को बढ़ाने के लिए मालिश एक बढ़िया सपोर्टिंग टेक्निक है.
स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल (cortisol) लेक्टेशन के लिए ज़रूरी हार्मोनल बैलेंस को खराब कर सकता है जिससे मिल्क प्रोडक्शन पर नेगेटिव असर पड़ता है.
शिशु को भरपूर मात्रा में ब्रेस्ट फ़ीड मिले इसकी पहली ज़िम्मेदारी उसकी माँ की है. इसलिए ब्रेस्टफ़ीडिंग मदर को मिल्क प्रोडक्शन में कमी से बचने के लिए अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहना चाहिए. साथ ही हेल्दी डाइट लें क्योंकि ख़राब आहार वास्तव में मिल्क प्रोडक्शन और ब्रेस्ट मिल्क की क्वालिटी को प्रभावित करता है.
1. Gatti L. (200*). Maternal perceptions of insufficient milk supply in breastfeeding.
2. Shah R, Sabir S, Alhawaj AF. (2022). Physiology, Breast Milk.
3. Stuebe A. (2009). The risks of not breastfeeding for mothers and infants.
4. Pillay J, Davis TJ. (2022). Physiology, Lactation.
5. Kent JC, Gardner H, Geddes DT. (2016). Breastmilk Production in the First 4 Weeks after Birth of Term Infants.
लैक्टेशन सपोर्ट करने वाले पोषक उत्पाद और मसाज एसेंशियल्स आपकी मिल्क सप्लाई को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं.

Anti Colic Slow (S) Flow Grooved Baby Nipple - Pack of 2
BPA Free | Breast-Like Nipple | Food Grade Material | Wide Base for Better Latch | Can be Sterilized | Microwave Safe | Fits Most Standard Bottles




Pregnancy Massage Oil + Coconut Oil - 200 ml each




MamaGro™ Protein Diskettes - High Protein & No Added Sugar - 250gm (50 Diskettes)
High Protein Pregnancy Biscuits | Supports Healthy Placenta | Supports Fetal Development | Easy To Digest




Baby Wellness Kit | Skincare Gift Set for Newborns



This content is for informational purposes only and should not replace professional medical advice. Consult with a physician or other health care professional if you have any concerns or questions about your health. If you rely on the information provided here, you do so solely at your own risk.

Mylo wins Forbes D2C Disruptor award

Mylo wins The Economic Times Promising Brands 2022
Baby Carrier | Baby Soap | Baby Wipes | Stretch Marks Cream | Baby Cream | Baby Shampoo | Baby Massage Oil | Baby Hair Oil | Stretch Marks Oil | Baby Body Wash | Baby Powder | Baby Lotion | Diaper Rash Cream | Newborn Diapers | Teether | Baby Kajal | Baby Diapers Pants | Cloth Diapers | Laundry Detergent | Lactation Granules |