
सारांश


डिलीवरी एक ऐसा समय जिससे हर गर्भवती महिला डरती है. जैसे-जैसे डिलीवरी का समय पास आता है, गर्भवती महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि डिलीवरी का सही समय आ चुका है. लेकिन जैसे हर प्रेग्नेंसी अलग होती है, उसी तरह ये शारीरिक बदलाव भी अलग होते हैं. नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण (delivery hone ke lakshan) ड्यू डेट से 3 हफ़्ते पहले से शुरू होने लग जाते हैं. एक गर्भवती महिला किस समय में लेबर पेन में जा सकती है, यह बता पाना मुश्किल है. आज के इस ऑर्टिकल में हम आपको उन 7 लक्षणों (Symptoms of normal delivery in Hindi) के बारे में बताएँगे, जो आमतौर पर नॉर्मल डिलीवरी की ओर इशारा करते हैं.
हर महिला की ख़्वाहिश होती है कि उसकी डिलीवरी नॉर्मल ही हो, लेकिन क्या आप जानते हैं आपकी डिलीवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन से इसके संकेत काफ़ी हद तक प्रेग्नेंसी के दौरान ही आपको पता चल सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण (Normal delivery ke lakshan kya hote hain) क्या होते हैं!
इसका मतलब कि बेबी आपकी पेल्विस (श्रोणि) की तरफ़ बढ़ने लगता है. ऐसा ड्यू डेट से कुछ हफ़्तों पहले हो जाता है. एक नार्मल डिलीवरी (normal delivery ke lakshan) में बेबी का सिर नीचे की तरफ़ होता है, जिसे एंटीरियर पोजिशन भी कहा जाता है. इससे पता चलता है कि बच्चा गर्भ से बाहर निकलने के लिए तैयार है.
ऐसे समय में आपको बार-बार बाथरूम जाना पड़ेगा और आपकी श्रोणि में बहुत ही भारीपन महसूस होगा. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बेबी ने अपनी हेड-डाउन पोजीशन ले ली है. ये सब होने पर फेफड़ों से दबाव हटकर ब्लैडर पर चला आने लगता है.
जैसे ही बच्चा नीचे की ओर आ जाता है, आपको लोअर बैक में दर्द होने (normal delivery in Hindi) की शिकायत होने लगती है, क्योंकि बच्चा आपकी लोअर पेल्विक रीजन (श्रोणि में नीचे की ओर) में दबाव डालने लगता है, जिससे आपकी बैक पर दबाव आता है. प्रेगनेंसी के दौरान आप किसी भी तरह के बॉडी पेन के लिए माइलो का प्रेगनेंसी पेन रिलीफ ऑयल इस्तेमाल करें. ये पूरी तरह सुरक्षित है और बेहद असरकारी है.
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बच्चे के सिर की वजह से वेजाइनल पर प्रेशर पड़ने लगता है और इससे म्यूकस प्लग निकल जाता है, जिससे भारी मात्रा में वेजाइनल डिस्चार्ज होने लगता है. ऐसा होने पर मतलब बिल्कुल साफ़ है - डिलीवरी का समय आ चुका है. यह डिस्चार्ज पिंक, सफ़ेद या फिर थोड़ा-सा खून से सना हो सकता है. यह नार्मल डिलीवरी का एक लक्षण है लेकिन इसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए.
अब हार्मोन्स आपके शरीर में आंतक मचा रहे होते हैं जिससे आपको दर्द के साथ-साथ दस्त जैसी शिकायत भी होने लगती है. ऐसा होने से शरीर में मरोड़ या असहजता हो सकती है लेकिन इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं. आपका शरीर नार्मल डिलीवरी के लिए तैयार हो रहा है.
यह बिल्कुल पीरियड्स में होने वाले दर्द जैसा होता है लेकिन डिलीवरी का समय आने पर ये क्रैम्प्स तेज़ और बार-बार होने लगते हैं. इस तरह के कॉन्ट्रैक्शन नियमित, टाइट और हर बार पहले वाले से स्ट्रांग होने चाहिए, क्योंकि कई बार प्रेग्नेंसी के आख़िरी हफ़्तों में अनियमित कॉन्ट्रैक्शन होने लगते हैं, जो फाल्स लेबर का संकेत होते हैं.
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ये लेबर आने और नार्मल डिलीवरी होने का श्योर साइन है. वॉटर बैग का ब्रेक होना मतलब एम्नियोटिक झिल्ली का फट जाना जिसका मतलब साफ़ है कि अब लेबर शुरू हो चुका है. इसका न ही कोई रंग होता है न ही कोई गंध.
उम्मीद है कि अब आप समझ गए होंगे किए प्रेग्नेंसी के दौरान किन लक्षणों (Signs and symptoms of normal delivery in Hindi) का संबंध नॉर्मल डिलीवरी से होता है
डिलीवरी का समय नज़दीक आते-आते मन में डर पैदा होना लाज़िमी है. लेकिन इस समय आपको बिल्कुल भी डरने या घबराने की ज़रूरत नहीं है. आप बस अपनी डाइट पर ध्यान दें, टेंशन-फ्री रहें और इस समय का आनंद लें.
रेफरेंस
1. Hutchison J, Mahdy H, Hutchison J. (2023) Stages of Labor.
2. Desai NM, Tsukerman A. (2023). Vaginal Delivery.
3. Romano AM, Goer H. (2008) Research summaries for normal birth.
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