
सारांश




गर्भधारण करने से लेकर बच्चे को जन्म देने तक एक महिला का शरीर कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुज़रता है. इस दौरान एक महिला के मन में कई तरह के सवाल आते हैं. इन्हीं में से एक सवाल यह है कि "क्या स्तनपान (ब्रेस्टफ़ीडिंग) के दौरान पीरियड्स होते हैं?" आज के इस आर्टिकल में हम न्यू मॉम्स के इसी सवाल का जवाब डिटेल में देंगे!
प्रेग्नेंसी के बाद आपके पहली बार पीरियड्स कब होंगे यह बताना पाना मुश्किल है. आमतौर पर प्रेग्नेंसी के बाद पीरियड्स आने में 6 से 8 हफ़्तों का समय लग सकता है. हालाँकि, हर महिला के मामले में यह समय अलग हो सकता है. कुछ महिलाओं को डिलीवरी होने के एक साल बाद तक भी पीरियड्स नहीं आते हैं. दरअसल, प्रेग्नेंसी के बाद आपके पीरियड्स कब होंगे यह काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने बेबी को कितनी बार स्तनपान करवा रहे हैं. बेबी की फ़ीडिंग फ्रीक्वेंसी और समय का पीरियड्स पर असर होता है.
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जी हाँ, पीरियड्स के दौरान ब्रेस्टफ़ीडिंग करवाना बिल्कुल सुरक्षित है. इसलिए आप पीरियड्स के दौरान बेबी को दूध पिलाने से न हिचकिचाएँ. हालाँकि, हार्मोनल बदलाव होने के कारण इस दौरान ब्रेस्ट मिल्क की मात्रा कम हो सकती है, लेकिन इसका असर बेबी पर नहीं होता है.
प्रेग्नेंसी के बाद मासिक धर्म (Periods after pregnancy in Hindi) यानी कि पीरियड्स में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं; जैसे-
प्रेग्नेंसी के बाद जो सबसे पहला बदलाव देखने को मिलता है, वह है अनियमित मासिक धर्म चक्र. हालाँकि, ऐसा होना बिल्कुल नॉर्मल है. ख़ासकर अगर आप बेबी को बार-बार स्तनपान करवाते हैं, तो इसका असर आपके पीरियड्स पर होता है.
अगर आप बेबी को रात में देर तक स्तनपान करवाते हैं, तो इसका असर आपके पीरियड्स पर हो सकता है और आपके पीरियड्स लेट हो सकते हैं. दरअसल, ऐसा मिल्क प्रोडक्शन और ओव्यूलेशन को प्रभावित करने वाले प्रोलैक्टिन हार्मोन के कारण होता है.
कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के बाद पीरियड्स के दौरान कम या अधिक फ्लो का सामना करना पड़ सकता है.
प्रेग्नेंसी के बाद मासिक चक्र की लेंथ भी प्रभावित हो सकती है. प्रेग्नेंसी से पहले होने वाले पीरियड्स की तुलना में इस दौरान होने वाले पीरियड्स की लेंथ कम या ज़्यादा हो सकती है.
कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के बाद प्री मेंस्ट्रुअल सिम्पटम्स में बदलाव नज़र आ सकते हैं. ब्रेस्ट में दर्द या कोमलता, मूड स्विंग्स आदि लक्षणों में बदलाव दिख सकते हैं.
प्रेग्नेंसी के बाद पीरियड्स कैसे प्रभावित होते हैं, यह जानने के बाद चलिए अब बात करते हैं कि ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान पीरियड्स कैसे होते हैं, और किन फैक्टर्स का पीरियड्स पर असर होता है!
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अक्सर ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान पीरियड्स अनियमित (Irregular periods during breastfeeding in Hindi) हो जाते हैं. इस दौरान पीरियड्स को प्रभावित करने वाले कई फैक्टर्स हो सकते हैं; जैसे कि-
बेबी को कितनी बार स्तनपान कराया जा रहा है, इसका असर पीरियड्स पर होता है. अगर आपका बेबी सिर्फ़ ब्रेस्टफ़ीडिंग ही करता है, तो इसका असर आपके पीरियड्स पर हो सकता है, जिसके चलते पीरियड्स फिर से आने में देरी हो सकती है.
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अगर आप ब्रेस्टफ़ीडिंग के अलावा बेबी को सॉलिड फूड्स देते हैं, तो इसका असर आपके ओव्यूलेशन की संभावनाओं पर पड़ सकता है, जिसके चलते आपके पीरियड्स जल्दी आ सकते हैं.
बेबी कितनी देर तक दूध पीता है, इसका असर भी पीरियड्स पर होता है; जैसे अगर बेबी बार-बार ब्रेस्टफ़ीडिंग करता है या देर तक ब्रेस्टफ़ीडिंग करता है, तो इसके कारण आपके पीरियड्स लेट हो (Late periods during breastfeeding in Hindi) सकते हैं.
बेबी के जन्म के बाद एक महिला का शरीर कई तरह के हार्मोनल बदलावों से गुज़रता है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स को नियमित होने में समय लगता है, जिसके चलते पीरियड्स आने में देरी हो सकती है.
ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान पीरियड्स का अनियमित होना नॉर्मल है. लेकिन अगर आपको इसके अलावा अन्य लक्षण भी महसूस होते हैं, तो आपको ऐसी स्थिति में अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए. यह लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं;
स्पॉटिंग होना
पीरियड्स के बाद ब्लीडिंग का फ्लो बहुत ज़्यादा या कम होना
अचानक से वज़न कम होना
ब्रेस्ट मिल्क की मात्रा अचानक से कम होना
पेल्विक एरिया में दर्द महसूस होना
बेबी को दूध पिलाने के दौरान ब्रेस्ट में दर्द महसूस होना
निप्पल्स से ब्लीडिंग होना
मेंस्ट्रुएशन क्रैम्प्स अधिक महसूस होना
ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान होने वाले पीरियड्स में आपको कुछ अंतर दिखाई दे सकता है. कुछ बातों का ध्यान रखकर आप इस दौरान पीरियड्स को नियमित बना सकते हैं; जैसे कि- हाइड्रेटेड रहें, संतुलित डाइट फॉलो करें, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करते रहें, स्ट्रेस से दूर रहें, पर्याप्त नींद लें और अपने पीरियड्स को ट्रैक करते रहें!
1. Lopez-Gonzalez DM, Kopparapu AK. (2022). Postpartum Care of the New Mother.
2. McNeilly AS. (2001). Neuroendocrine changes and fertility in breast-feeding women.
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ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान हार्मोनल संतुलन और पीरियड्स की नियमितता के लिए पोषण और देखभाल बेहद ज़रूरी है.

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