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Home Remedies for PCOS Acne in Hindi | घरेलू उपाय से कैसे करें PCOS एक्ने को ठीक?

Pimples and Acne
Written by - Kavita Upretyअंतिम अपडेट: Sep 4, 2023
Home Remedies for PCOS Acne in Hindi | घरेलू उपाय से कैसे करें PCOS एक्ने को ठीक?
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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक हार्मोनल डिसऑर्डर है जो महिलाओं की ओवरीज़ को प्रभावित करता है ख़ासतौर पर उनकी लाइफ के सबसे फर्टाइल दिनों में. इससे जुड़े हुए लक्षण हैं- अनियमित पीरियड्स, एण्ड्रोजन हार्मोन का एक्सट्रा प्रोडक्शन और ओवरी पर छोटे-छोटे सिस्ट बन जाना. पीसीओएस में एक और बड़ी समस्या आती है बहुत ज़्यादा और लगातार निकलने वाले मुहाँसे यानी कि एक्ने की.

पीसीओएस और एक्ने का कनेक्शन (Relation between PCOS and acne in Hindi)

पीसीओएस में मुँहासे होने का मुख्य कारण हार्मोनल इंबैलेंस है जिससे स्किन में तेल बनाने वाली ग्रंथियां उत्तेजित होकर ज़रूरत से ज़्यादा सीबम का प्रोडक्शन करने लगती हैं. इससे त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और मुँहासे होने लगते हैं. इसके अलावा, बढ़े हुए सीबम से एक ऐसा वातावरण बनता है जिसमें बैक्टीरियल ग्रोथ बहुत तेज़ी से होती है और इससे भी मुहाँसे पैदा होते हैं.

पीसीओएस में एक्ने क्यों होते हैं? (Causes acne in PCOS in Hindi)

जैसा कि हमने जाना कि पीसीओएस में एक्ने की समस्या हार्मोनल इंबैलेंस के कारण होती है. आगे हम आपको बताएँगे कि ऐसे कौन से हार्मोन हैं जिनके असंतुलन के कारण यह समस्या जन्म लेती है. साथ ही कुछ और भी ऐसे कारण हो सकते हैं जो स्किन प्रोब्लंस और मुँहासों को पैदा करते हैं.

1. हार्मोनल असंतुलन (Hormonal imbalance)

पीसीओएस में मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन और एण्ड्रोजन के लेवल के बढ़ जाने के कारण मुँहासे होते हैं. इनसे तेल ग्रंथियाँ स्टिमुलेट होकर एक्सट्रा सीबम का प्रोडक्शन करने लगती हैं. बढ़े हुए सीबम से रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और मुँहासे होने लगते हैं. इसके अलावा चेहरे की त्वचा पर एक्सट्रा ऑइल से बैक्टीरिया भी पनपते हैं जो मुँहासों को ठीक नहीं होने देते; बल्कि इससे सूजन और दर्द लगातार बना रहता है.

2. इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin resistance)

पीसीओएस में मुँहासे अक्सर इंसुलिन रेसिस्टेंस के कारण भी होते हैं. असल में इंसुलिन रेसिस्टेंस होने से ब्लड में इंसुलिन का लेवल बढ़ जाता है जिसके कारण एण्ड्रोजन का प्रोडक्शन स्टिमुलेट होने लगता है. ऐसा होने पर ऑइल ग्लेण्ड्स ज़्यादा सेंसटिव होकर सीबम और अब्नॉर्मल स्किन सेल्स बनाने लगती हैं जिससे एक्ने होते हैं.

3. इंफ्लेमेशन (Inflammation)

पीसीओएस में जब हार्मोनल इंबैलेंस के कारण सीबम प्रोडक्शन बढ़ जाता है, तब स्किन के रोम कूप बंद हो जाते हैं और बैक्टीरिया पनपते हैं. बैक्टीरिया के प्रति बॉडी का रेसिस्टेंस सिस्टम काम करने लगता है जिससे सूजन, लाली, पस और दर्दभरे घाव वाले मुँहासे होने लगते हैं.

4. स्किन सेंसिटिविटी (Increased skin sensitivity)

पीसीओएस (PCOS) में एण्ड्रोजन हार्मोन में आने वाले असंतुलन से स्किन की सेन्स्टिविटी बढ़ जाती है। बढ़ा हुआ एण्ड्रोजन और स्किन की सेन्स्टिविटी मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जिसमें मुँहासे होने की संभावना बढ़ जाती है.

5. जेनेटिक (Genetics)

पीसीओएस (PCOS) में व्यक्ति के जेनेटिक्स भी मुँहासों की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. व्यक्ति में हार्मोन रेगुलेशन, सीबम प्रोडक्शन और स्किन के प्रकार को तय करने वाले आनुवांशिक जीन्स के आधार पर हर महिला में एक्ने की स्थिति और तीव्रता अलग-अलग हो सकती है. कुछ व्यक्तियों में ये आनुवंशिक फ़ैक्टर्स, पीसीओएस में होने वाले हार्मोनल इंबैलेंस के साथ मिलकर मुँहासे की ग्रोथ को बढ़ा सकते हैं.

पीसीओएस एक्ने पैटर्न (PCOS acne patterns in Hindi)

  1. पीसीओएस में त्वचा की ग्रंथियाँ अधिक सीबम बनाती है जिससे लगातार मुँहासे होते रहते हैं.

  1. ज़्यादा सीबम का प्रोडक्शन होने पर रोम छिद्र बंद हो जाते हैं जिससे त्वचा ऑइली और चिपचिपी रहने लगती है जिस पर फिर मुँहासे पनपने हैं.

  1. अतिरिक्त सीबम और रोम छिद्रों के बंद होने के कारण सूजन वाले मुँहासे; जैसे- पपल्स, पस्ट्यूल और नोड्यूल होने लगते हैं.

  1. पीसीओएस के कारण होने वाले मुँहासे चेहरे के निचले हिस्से पर विशेष रूप से जॉलाइन और चिन पर दिखाई देते हैं.

  1. पीसीओएस में हार्मोनल असंतुलन के कारण मुँहासों पर दवाओं का असर पूरी तरह से नहीं हो पाता है.

  1. मुँहासे की तीव्रता पूरे मेंस्ट्रूअल साइकिल में हार्मोनल उतार-चढ़ाव से जुड़ी होती है जो पीरियड्स के दौरान सबसे तेज़ होती है.

  1. पीसीओएस से कारण मुँहासों से होने वाली सूजन और घाव से हाइपरपिग्मेंटेशन का खतरा बढ़ सकता है.

आगे बात करेंगे एक्ने के तीन अलग-अलग प्रकार की!

1. हार्मोनल एक्ने (Hormonal acne)

पीसीओडी में टेस्टोस्टेरोन जैसे एण्ड्रोजन हार्मोन के बढ़ जाने से स्किन में सीबम की चिपचिपाहट बढ़ जाती है जिससे सूजन और गाँठों वाले दर्दभरे मुँहासे होते हैं जो ठोड़ी और लोअर फेस पर अधिक निकलते हैं.

इसे भी पढ़ें: एक्ने क्या होते हैं और आप इससे कैसे राहत पा सकते हैं?

2. कॉमेडोनल एक्ने (Comedonal acne)

कॉमेडोनल एक्ने, ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स जैसे दानों की तरह दिखते हैं. ये भी ख़ासतौर पर जबड़े, ठोड़ी और चेहरे के निचले हिस्से में होते हैं और चेहरे की त्वचा के हेयर फॉलिकल्स के बंद हो जाने के कारण लगातार बने रहते हैं.

3. इंफ्लेमेटरी एक्ने (Inflammatory acne)

सीबम का प्रोडक्शन बढ्ने से डेड स्किन सेल्स और अतिरिक्त तेल का वातावरण प्रोपियोनिबैक्टीरियम (PSB) जैसे बैक्टीरिया के पनपने में मदद करता है. इससे निपटने के लिए इम्यून सिस्टम एक रिएक्शन को ट्रिगर करता है जिसे उभरे हुए, पपल्स, पुस्ट्यूल और नोड्यूल बनने लगते हैं जो सूजन और लाली के साथ आमतौर पर लोअर फेस और ठोड़ी में निकलते हैं.

अब बात करते हैं पीसीओएस को कंट्रोल (Home Remedies for PCOS Acne in Hindi) करने के कुछ घरेलू उपायों की.

इसे भी पढ़ें: मुँहासों से राहत दिलाएँगे ये टॉप 5 तरीक़े

पीसीओएस को कंट्रोल करने के घरेलू उपाय (Home remedies for PCOS acne in Hindi)

1. टी ट्री ऑइल (Tea tree oil)

पीसीओएस के कारण होने वाले मुँहासे अक्सर हार्मोनल इंबैलेंस और ज़्यादा सीबम बनने के कारण होते हैं. ऐसे में टी ट्री ऑइल, जिसमें एंटी बैक्टीरियल और सूजन घटाने वाली प्रॉपर्टीज़ होती हैं इन मुँहासों से जुड़ी तकलीफ को कम करने में बेहद असरदार रिजल्ट्स देता है. इसका एक्टिव कंपोनेंट, टेरपिनन-4-ओएल, सूजन और लाली को कम करने के अलावा बैक्टीरिया को भी ख़त्म करता है.

इसे भी पढ़ें: टी ट्री फेस टोनर इस्तेमाल करने के टॉप 5 फ़ायदे

2. एप्पल साइडर विनेगर (Apple cider vinegar)

एप्पल साइडर विनेगर (ACV) के सेवन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है. इससे हार्मोनल बैलेंस में सुधार आता है और पीसीओएस से जुड़े मुँहासे कम होने लगते हैं. इसके अलावा इसकी एसिडिक प्रकृति एक एक्सफ़ोलिएंट का काम करती है, जिससे स्किन की सफाई होती है और दाग-धब्बों में कमी आती है.

इसे भी पढ़ें: एप्पल साइडर विनेगर के फ़ायदे और नुक़सान

3. एलोवेरा (Aloe vera)

एलोवेरा की एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी माइक्रोबाएल प्रॉपर्टीज़, स्किन पर बैक्टीरियल ग्रोथ को रोकती हैं और त्वचा को ठंडक पहुँचाकर, जलन, दर्द तथा लाली जैसी समस्याओं को कंट्रोल करती है.

4. पीसीओएस टी (PCOS tea)

कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ भी पीसीओएस के लक्षणों को कंट्रोल करने में मददगार हैं; जैसे कि मंजिष्ठा, शतावरी, शंखपुष्पी और कैमोमाइल. माइलो पीसीओएस और पीसीओडी टी बैग (Mylo PCOS & PCOD Tea) इन औषधियों के प्रयोग का एक आसान तरीक़ा है. इन टी-बैग्स के अलावा माइलो की एक्टिव फोलेट से बनी हुई च्युएबल मायोइनोसिटोल टैबलेट (Myo-inositol Chewable Tablets for PCOS & PCOD) के साथ पीसीओएस को कंट्रोल करना और भी ज़्यादा आसान है क्योंकि ये बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल को कम करने के अलावा फर्टिलिटी और हार्मोनल बैलेंस को भी ठीक करती हैं.

इसे भी पढ़ें: एक कप चाय दे सकती है आपको PCOS से राहत!

प्रो टिप (Pro Tip)

मुँहासे, पीसीओएस के कई लक्षणों में से एक हैं और ये भी सच है कि मुँहासे वाले सभी व्यक्तियों को पीसीओएस नहीं होता है. यह कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं जिसमें जेनेटिक्स, स्किन केयर रूटीन और अंडरलाइन मेडिकल कंडीशन शामिल हैं. लाइफस्टाइल में बदलाव, मेडिसिन और घरेलू उपायों (Home Remedies for PCOS Acne in Hindi) से आप पीसीओएस के कारण होने वाले एक्ने को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं.

रेफरेंस

1. Ramezani Tehrani F, Behboudi-Gandevani S, Bidhendi Yarandi R, et al. (2021). Prevalence of acne vulgaris among women with polycystic ovary syndrome: a systemic review and meta-analysis.

2. Chuan SS, Chang RJ. (2010). Polycystic ovary syndrome and acne.

3. Manouchehri A, Abbaszadeh S, Ahmadi M, et al. (2023). Polycystic ovaries and herbal remedies: A systematic review.

4. Lakshmi JN, Babu AN, Kiran SSM, Nori LP, et al. (2023). Herbs as a Source for the Treatment of Polycystic Ovarian Syndrome: A Systematic Review.

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