
Obstetrician & Gynecologist · 41 years experience
सारांश

बच्चों को मच्छरों से बचाना भारत में बेहद ज़रूरी है क्योंकि मच्छर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियाँ फैलाते हैं (WHO) (CDC)। बच्चों को बचाने के सबसे सुरक्षित तरीके हैं: पूरी बाँह के हल्के रंग के कपड़े पहनाना, मच्छरदानी का इस्तेमाल, घर के आसपास जमा पानी हटाना, खिड़कियों पर जाली लगाना, और शाम-सुबह (जब मच्छर सबसे सक्रिय हों) बच्चे को ढककर रखना। 2 महीने से छोटे शिशुओं पर कोई केमिकल रिपेलेंट न लगाएँ, उनके लिए मच्छरदानी और कपड़े ही सुरक्षित हैं। बड़े बच्चों के लिए उम्र-अनुसार सुरक्षित रिपेलेंट (जैसे Mylo के नैचुरल मॉस्किटो पैच) इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
तुरंत जवाब
बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए पूरी बाँह के हल्के रंग के कपड़े पहनाएँ, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, घर के आसपास जमा पानी हटाएँ, खिड़कियों पर जाली लगाएँ, और सुबह-शाम बच्चे को ढककर रखें। 2 महीने से छोटे शिशु पर केमिकल रिपेलेंट न लगाएँ, उनके लिए मच्छरदानी और कपड़े सबसे सुरक्षित हैं। बड़े बच्चों के लिए उम्र-अनुसार सुरक्षित रिपेलेंट इस्तेमाल करें।
लेखिका: Mylo एडिटोरियल टीम, Mylo पेरेंटिंग डेस्क मेडिकल रिव्यू: Mylo पीडियाट्रिक एडिटोरियल बोर्ड, WHO, CDC और IAP दिशानिर्देशों के अनुसार अंतिम अपडेट: 11 जून 2026
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। यदि बच्चे को मच्छर के काटने के बाद तेज़ बुखार, दाने, उल्टी या सुस्ती हो, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें (डेंगू/मलेरिया हो सकता है)। 2 महीने से छोटे शिशु पर कोई रिपेलेंट लगाने से पहले डॉक्टर से पूछें।
मच्छर सिर्फ़ खुजली और जलन ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियाँ भी फैलाते हैं, खासकर भारत में (WHO):
| बीमारी | फैलाने वाला मच्छर | मौसम |
|---|---|---|
| डेंगू | एडीज़ (दिन में काटता है) | मानसून और उसके बाद |
| मलेरिया | एनोफिलीज़ (रात में) | मानसून और गर्मी |
| चिकनगुनिया | एडीज़ | मानसून |
| जापानी एन्सेफलाइटिस | क्यूलेक्स | मानसून |
बच्चों की इम्यूनिटी कमज़ोर होती है, इसलिए उन्हें मच्छर-जनित बीमारियों का खतरा ज़्यादा होता है। बचाव ही सबसे अच्छा इलाज है।
➡️ और पढ़ें: बच्चों को मच्छरों से दूर रखने के टॉप 6 टिप्स
बच्चे को पूरी बाँह की शर्ट और पैरों तक पैंट पहनाएँ, खासकर सुबह-शाम। ढकी हुई त्वचा पर मच्छर नहीं काट पाते।
गहरे रंग (काला, गहरा नीला) मच्छरों को आकर्षित करते हैं। बच्चे को हल्के रंग के, हवादार सूती कपड़े पहनाएँ।
मच्छर रुके हुए पानी में पनपते हैं। इसलिए:
मेश/जाली लगाने से मच्छर घर में नहीं आते, और हवा भी आती रहती है।
एडीज़ मच्छर दिन में और एनोफिलीज़ रात में काटते हैं। शाम और सुबह के समय बच्चे को बाहर कम ले जाएँ और ढककर रखें।
नीम का तेल, सिट्रोनेला, लेमनग्रास मच्छरों को कुछ हद तक दूर रखते हैं, पर ये केमिकल रिपेलेंट जितने लंबे समय तक असरदार नहीं होते। इन्हें सहायक उपाय के रूप में इस्तेमाल करें।
पसीना और शरीर की गंध मच्छरों को आकर्षित करती है। बच्चे को नहलाकर साफ़-सूखा रखें।
मच्छर-प्रभावित इलाके में जाएँ तो पूरे कपड़े, मच्छरदानी और रिपेलेंट साथ रखें।
➡️ और पढ़ें: टॉडलर को मच्छरों के काटने से कैसे बचाएँ
| उम्र | सुरक्षित बचाव |
|---|---|
| 0 से 2 महीने | केवल मच्छरदानी और पूरे कपड़े; कोई रिपेलेंट नहीं (CDC) |
| 2 महीने से ऊपर | उम्र-अनुसार सुरक्षित रिपेलेंट, डॉक्टर/लेबल के अनुसार |
| बड़े बच्चे | रिपेलेंट + कपड़े + मच्छरदानी का संयोजन |
सुरक्षा नियम: रिपेलेंट को बच्चे के हाथों, आँखों, मुँह और कटी त्वचा पर न लगाएँ। पैच को कपड़े या पालने पर लगाएँ, सीधे संवेदनशील त्वचा पर नहीं। हमेशा प्रोडक्ट का लेबल पढ़ें (AAP)।
अगर बच्चे को मच्छर काट ले (AAP):
तुरंत डॉक्टर से मिलें अगर: काटने के कुछ दिनों बाद तेज़ बुखार, दाने, उल्टी, सुस्ती, या जोड़ों में दर्द हो, ये डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया के लक्षण हो सकते हैं (WHO)।
➡️ और पढ़ें: गर्भावस्था में डेंगू: कारण, लक्षण और इलाज
| मिथक | तथ्य | स्रोत |
|---|---|---|
| "मच्छर सिर्फ़ गंदे घरों में होते हैं" | गलत। साफ़ जमा पानी में भी डेंगू मच्छर पनपते हैं | WHO |
| "डेंगू मच्छर रात में काटता है" | गलत। एडीज़ (डेंगू) मच्छर दिन में काटता है | CDC |
| "शिशु पर भी रिपेलेंट लगाना सुरक्षित है" | गलत। 2 महीने से छोटे पर केमिकल रिपेलेंट न लगाएँ | CDC |
| "मच्छर कॉइल का धुआँ बच्चों के लिए ठीक है" | गलत। धुआँ बच्चों के फेफड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है | AAP |
| "नीम/प्राकृतिक उपाय पूरी सुरक्षा देते हैं" | आंशिक सच। ये सहायक हैं, पर कम समय तक असरदार | CDC |
| "विटामिन/लहसुन खाने से मच्छर नहीं काटते" | गलत। कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं | CDC |
बच्चों को पूरी बाँह के हल्के रंग के कपड़े पहनाएँ, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, घर के आसपास जमा पानी हटाएँ, खिड़कियों पर जाली लगाएँ और सुबह-शाम बच्चे को ढककर रखें (CDC)। 2 महीने से छोटे शिशु के लिए मच्छरदानी और कपड़े ही सबसे सुरक्षित हैं।
Bacchon ko full sleeve, halke rang ke kapde pehnayें, machhardani use karें, ghar ke aaspaas jama paani hatायें (cooler, gamle, tyre), khidkiyon par jaali lagayें, aur subah-shaam bacche ko dhakkar rakhें. 2 mahine se chhote shishu par koi chemical repellent na lagायें, unke liye machhardani aur kapde safe hain. Bade bacchon ke liye age-appropriate repellent ya Mylo natural mosquito patch use kar sakte hain.
2 महीने से छोटे शिशु पर कोई केमिकल रिपेलेंट न लगाएँ (CDC)। उनके लिए मच्छरदानी और पूरे कपड़े ही सुरक्षित हैं। 2 महीने से बड़े बच्चों पर उम्र-अनुसार सुरक्षित रिपेलेंट, डॉक्टर/लेबल के अनुसार इस्तेमाल करें, आँखों, मुँह और हाथों पर न लगाएँ।
डेंगू फैलाने वाला एडीज़ मच्छर दिन में (खासकर सुबह और शाम) काटता है, जबकि मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज़ मच्छर रात में काटता है (CDC)। इसलिए दिन और रात दोनों समय सावधानी ज़रूरी है।
Dengue failane wala Aedes machhar din mein, khaas kar subah aur shaam, kaatta hai. Isliye sirf raat ki nahi, din ki bhi protection zaruri hai. Bacche ko din mein bhi full kapde pehnayें aur jama paani hataते rahें.
काटी जगह को साफ़ पानी और हल्के साबुन से धोएँ, ठंडी सिकाई करें, और बच्चे को खुजलाने से रोकें (AAP)। ज़्यादा सूजन हो तो डॉक्टर से पूछकर बच्चों के लिए सुरक्षित क्रीम लगाएँ। नाखून छोटे रखें ताकि घाव न हो।
सबसे ज़रूरी है जमा पानी हटाना (कूलर, गमले, टायर, छत), क्योंकि मच्छर वहीं पनपते हैं (WHO)। साथ ही खिड़कियों पर जाली लगाएँ, कूड़ा ढककर रखें, झाड़ियाँ छोटी रखें और घर साफ़-हवादार रखें।
हाँ, मच्छरदानी शिशुओं के लिए सबसे सुरक्षित बचाव है क्योंकि इसमें कोई केमिकल नहीं होता (CDC)। पालने और प्रैम पर भी जालीदार कवर इस्तेमाल करें। यह दिन और रात दोनों समय सुरक्षा देती है।
अगर मच्छर काटने के कुछ दिनों बाद बच्चे को तेज़ बुखार, दाने, उल्टी, सुस्ती या जोड़ों में दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें, ये डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया के लक्षण हो सकते हैं (WHO)। बुखार को सामान्य मानकर देर न करें।
Sources (search से मिले Mylo आर्टिकल व प्रोडक्ट जो इंटरलिंक किए गए):
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