
Dietician · 4 years experience
सारांश
6 महीने के बाद जब बच्चा अर्ध-ठोस आहार (मसली दाल, खिचड़ी, फल, सब्ज़ी) खाना शुरू करता है, तो शुरू में नख़रे करना, मुँह से निकालना और मना करना बिल्कुल सामान्य है, यह नए स्वाद और बनावट के प्रति उसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया है (WHO) (IAP)। बच्चे को खिलाने के असरदार तरीके हैं: छोटे हिस्से बार-बार देना, एक समय एक नया भोजन देना, स्वाद और बनावट धीरे-धीरे बदलना, माता-पिता का साथ खाना, और बार-बार (10 से 15 बार) कोशिश करना। ज़बरदस्ती कभी न खिलाएँ, इससे बच्चा खाने से और दूर हो जाता है। 1 साल से पहले शहद, ज़्यादा नमक-चीनी और गाय का दूध (मुख्य पेय) न दें, और भोजन हमेशा नरम रखें (दम घुटने से बचाव)। धैर्य ही सबसे बड़ी कुंजी है।
तुरंत जवाब (Quick Answer)
6 महीने के बाद बच्चे का अर्ध-ठोस आहार में नख़रे करना सामान्य है। उसे खिलाने के लिए छोटे हिस्से बार-बार दें, एक समय एक नया भोजन दें, स्वाद-बनावट धीरे-धीरे बदलें, खुद उसके साथ खाएँ और बार-बार (10 से 15 बार) कोशिश करें। ज़बरदस्ती न करें, इससे बच्चा और दूर हो जाता है। भोजन नरम रखें, 1 साल से पहले शहद और ज़्यादा नमक-चीनी न दें। धैर्य रखें।
लेखिका: Mylo एडिटोरियल टीम, Mylo पेरेंटिंग डेस्क मेडिकल रिव्यू: Mylo पीडियाट्रिक एडिटोरियल बोर्ड, WHO, IAP और AAP दिशानिर्देशों के अनुसार अंतिम अपडेट: 11 जून 2026
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी पेशेवर चिकित्सा या पोषण सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपका बच्चा बहुत कम खाता है, वज़न नहीं बढ़ रहा, खाने पर उल्टी/दम घुटने जैसी समस्या होती है, या आपको पोषण की चिंता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
शुरू में मना करना आपकी कमी नहीं, बल्कि बच्चे की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है (AAP):
इसलिए धैर्य ज़रूरी है, यह एक सीखने की प्रक्रिया है, जल्दबाज़ी या ज़बरदस्ती से बचें।
पहले 1 से 2 चम्मच से शुरू करें, धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएँ। एक बार में ढेर सारा न दें।
नया भोजन 3 से 5 दिन तक दें, फिर अगला, ताकि किसी एलर्जी की पहचान हो सके (IAP)।
शुरू में भोजन पतला और मसला हुआ रखें, धीरे-धीरे गाढ़ा करें। दम घुटने से बचाव ज़रूरी है।
अगर बच्चा कोई भोजन मना करे, तो उसे हल्के मीठे या परिचित स्वाद (मसला केला, सेब) के साथ मिलाएँ।
एक बार मना करने का मतलब हमेशा का "ना" नहीं। एक भोजन को 10 से 15 बार आज़माएँ (AAP)।
बच्चे देखकर सीखते हैं। परिवार के साथ बैठकर खुशी से खाएँ, बच्चा भी प्रेरित होगा।
बच्चे को जब वह भूखा हो (दूध से ठीक पहले नहीं) तब भोजन दें, थका या चिड़चिड़ा होने पर नहीं।
रंग-बिरंगे फल-सब्ज़ियाँ, मज़ेदार कटोरी-चम्मच से बच्चे की रुचि बढ़ती है।
बड़े बच्चों को खुद उँगलियों से नरम फिंगर फूड पकड़ने दें (बेबी-लेड वीनिंग), इससे रुचि बढ़ती है (AAP)।
खाते समय टीवी/मोबाइल बंद रखें, इससे बच्चा भोजन पर ध्यान देता है और स्वाद पहचानता है।
रोज़ एक ही समय पर भोजन देने से बच्चे को आदत और भूख का पैटर्न बनता है।
ज़बरदस्ती खिलाने से बच्चा खाने से डरने लगता है। शांति और धैर्य से बार-बार कोशिश करें।
➡️ और पढ़ें: अपने बच्चे को फल और सब्जियाँ खिलाने के 5 बेहतरीन तरीके
| उम्र | उपयुक्त भोजन |
|---|---|
| 6 महीने | पतली मसली दाल, मसला केला/सेब, सूजी/रागी पॉरिज, मसली सब्ज़ी |
| 7 से 8 महीने | खिचड़ी, दाल-चावल, मसला पनीर, दही, उबली सब्ज़ियाँ, अंडे की ज़र्दी |
| 9 से 10 महीने | नरम फिंगर फूड, इडली, मसले फल, ओट्स, पूरा उबला अंडा |
| 10 से 12 महीने | नरम रोटी-दाल, परिवार का नरम भोजन (कम मसाले) |
भोजन हमेशा उम्र के अनुसार नरम हो। साबुत मेवे, अंगूर, सख्त टुकड़े न दें (दम घुटने का खतरा) (AAP)।
➡️ और पढ़ें: शिशु को पहली बार खाना खिलाते वक्त इन बातों का ध्यान रखें
| करें | न करें |
|---|---|
| बच्चे को सीधा बैठाकर खिलाएँ | लेटे हुए न खिलाएँ (दम घुटने का खतरा) |
| भोजन नरम और मसला रखें | सख्त/बड़े टुकड़े न दें |
| एक समय एक नया भोजन दें | एक साथ कई नए भोजन न दें |
| माँ का दूध जारी रखें | 6 महीने के बाद दूध बंद न करें |
| भूख के समय खिलाएँ | थके/रोते बच्चे को ज़बरदस्ती न खिलाएँ |
| साफ़-सफ़ाई रखें | बासी भोजन न दें |
1 साल से पहले न दें: शहद (बोटुलिज़्म का खतरा), ज़्यादा नमक-चीनी, गाय का दूध (मुख्य पेय के रूप में), और चोकिंग वाले खाद्य पदार्थ (AAP)।
बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें यदि बच्चा (IAP) (WHO):
| मिथक | तथ्य | स्रोत |
|---|---|---|
| "एक बार मना किया तो बच्चा वो भोजन कभी नहीं खाएगा" | गलत। 10 से 15 बार कोशिश से स्वाद बदलता है | AAP |
| "ज़बरदस्ती खिलाने से बच्चा खाना सीख जाएगा" | गलत। इससे भोजन से डर बैठता है | IAP |
| "6 महीने से पहले अर्ध-ठोस देना चाहिए" | गलत। 6 महीने तक केवल माँ का दूध | WHO |
| "शहद चटाने से बच्चा अच्छा खाता है" | गलत और खतरनाक। 1 साल से पहले शहद नहीं | AAP |
| "जूस ठोस भोजन जितना अच्छा है" | गलत। 1 साल से पहले जूस न दें | AAP |
| "नख़रे करने वाला बच्चा बीमार है" | गलत। यह वीनिंग में सामान्य अवस्था है | AAP |
घबराएँ नहीं, यह सामान्य है। छोटे हिस्से बार-बार दें, स्वाद-बनावट धीरे-धीरे बदलें, खुद बच्चे के साथ खाएँ, और एक भोजन को 10 से 15 बार आज़माएँ (AAP)। ज़बरदस्ती न करें, धीरे-धीरे बच्चा नया स्वाद अपना लेगा।
Chhote portions baar-baar dें, ek time ek naya food dें, food ko soft aur thoda meetha (mashed kela) ke saath mix karें, khud bacche ke saath khायें, aur ek food ko 10 se 15 baar try karें. Zabardasti kabhi na karें, isse baccha khane se darne lagta hai. Sabra rakhें aur screen band rakhें.
6 महीने पूरे होने पर माँ के दूध के साथ अर्ध-ठोस आहार शुरू करें (WHO)। 6 महीने से पहले केवल माँ का दूध दें। शुरू में पतली मसली दाल, खिचड़ी, मसला फल दें।
हाँ, यह बिल्कुल सामान्य है। शुरू में बच्चे का जीभ धकेलने का रिफ्लेक्स होता है, जिससे वह भोजन बाहर धकेल देता है (AAP)। धैर्य रखें और बार-बार कोशिश करें, यह कुछ हफ़्तों में बेहतर हो जाता है।
Nahi, zabardasti khilana bilkul galat hai. Isse bacca khane se darne lagta hai aur food refusal aur badh jata hai (IAP)। Bacche ke bhookh ke signals ka samman karें, chhote portions dें, aur sabra rakhें. Forceful feeding se choking ka risk bhi badhta hai.
ज़रूरी नहीं। शुरुआती महीनों में माँ का दूध मुख्य पोषण होता है, अर्ध-ठोस आहार उसके साथ धीरे-धीरे जुड़ता है (WHO)। लेकिन अगर बच्चा लगातार बहुत कम खाता है या वज़न नहीं बढ़ रहा, तो डॉक्टर से मिलें।
1 साल से पहले फलों का जूस न दें (AAP)। इसके बजाय साबुत मसले फल दें, जिनमें फाइबर ज़्यादा होता है। जूस में चीनी ज़्यादा और पोषण कम होता है।
एक बच्चे को नया स्वाद अपनाने में 10 से 15 बार लग सकते हैं (AAP)। इसलिए एक बार मना करने पर हार न मानें, थोड़े-थोड़े अंतराल पर बार-बार कोशिश करें।




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