
सारांश




ऑलिव ऑइल, जैतून के फल से मिलने वाला तेल है जिसमें विटामिन ई, एंटीऑक्सिडेंट, स्क्वेलिन और ओलेओकैंथल जैसे तत्व होते हैं जो स्किन डैमेज को रिपेयर करते हैं. जैतून का तेल बच्चों की नाजुक स्किन की देखभाल के लिए एक अच्छा ऑप्शन है जो खतरनाक जर्म्स को मारता है और इससे एलर्जिक रिएक्शन भी नहीं होता है.
सामान्य जैतून के तेल का उपयोग हेयर और स्किन प्रोडक्ट्स में बहुतायत से किया जाता है लेकिन वर्जिन ऑलिव ऑइल बच्चे के शरीर की मालिश (olive oil for baby massage in Hindi) के लिए काफ़ी अच्छा होता है. यह खुजली युक्त ड्राई स्किन को मॉइस्चराइज़ करने में मदद करता है. साथ ही एक्जिमा, क्रैडल कैप और डायपर रैशेज जैसी स्किन कंडीशंस को भी कंट्रोल करता है. डायपर रैशेज होने पर इसे डायपर रैश क्रीम की जगह भी उपयोग कर सकते हैं. साथ ही अगर मालिश करते समय बच्चा तेल लगा हुआ हाथ अपने मुँह में डाल ले तो भी उसे कोई नुकसान नहीं होता है.
बच्चे की मालिश के लिए कई तरह के ऑइल यूज़ किए जाते हैं. आइये जानते हैं इनमें से एक अच्छे तेल को किस आधार पर चुनना चाहिए.
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बच्चे की मालिश के लिए सही तेल का उपयोग करने से मालिश के फ़ायदों को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. एक अच्छा मसाज ऑइल आपके बच्चे की कोमल त्वचा की सेफ़्टी और उसे मॉइस्चराइज़ करने में मदद भी करता है. बाज़ार में कई तरह के बेबी मसाज ऑइल मिलते हैं लेकिन ये सभी तेल बच्चे की स्किन के लिए गुणकारी हों ऐसा ज़रूरी नहीं है. सिर्फ़ इसलिए कि कोई तेल ‘नेचुरल’ है इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे की मालिश के लिए उसका उपयोग सुरक्षित है. बेबी मसाज के लिए उस तेल को चुनना चाहिए जो नेचुरल होने के साथ ही मौसम के अनुकूल हों और बच्चे के लिए सुरक्षित हों; जैसे- नारियल तेल, जैतून तेल, बादाम तेल आदि.
इनमें से ऑलिव ऑइल अपने अद्भुद गुणों के कारण एक बेहद (Olive Oil Massage for babies benefits in hindi) पॉपुलर ऑप्शन है. आइये जानते हैं जैतून तेल से बच्चे की मालिश करने के फ़ायदे.
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ऑलिव ऑइल के मॉइस्चराइजिंग गुणों से छोटे बच्चों की सॉफ्ट स्किन को प्रोटेक्शन मिलता है जिससे बच्चे की स्किन पहले से कहीं अधिक चिकनी और मुलायम हो जाती है. जैतून के तेल में स्क्वैलीन होता है जो एक हाइड्रेटिंग एजेंट है और स्किन में आसानी से अब्ज़ॉर्ब हो जाता है, जिससे वह ज़्यादा कोमल और चमकदार हो जाती है.
बच्चे की ऑलिव ऑइल से रेगुलर मालिश करने से उसके शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ता है जिससे बच्चे को आरामदायक महसूस होता है. आप ख़ुद अनुभव करेंगे कि जैतून के तेल की मालिश करने से बच्चा तुरंत ही शांत होकर सो जाता है.
जैतून का तेल सैचुरेटेड फैट के साथ-साथ विटामिन ए से भी भरपूर होता है, जो एक एंटीऑक्सीडेंट है. यह बच्चे की माँसपेशियों और हड्डियों को मज़बूत बनाता है जिससे उसकी ग्रोथ में भी मदद मिलती है.
बच्चे के सेंसरी डेवलपमेंट में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 एसिड्स वाला जैतून का तेल बहुत इम्पोर्टेन्ट रोल निभा सकता है. इस तेल की रेगुलर मालिश से नर्व्स फाइबर्स (nerve fibres) मज़बूत होते हैं जिससे ब्रेन डेवलपमेंट में मदद मिलती है. जैतून का तेल हेल्दी फैट, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ई का एक अच्छा स्रोत है जिससे बच्चों का इम्युनिटी सिस्टम मज़बूत होता है.
कुकिंग में इसके इस्तेमाल से भी आप कई फ़ायदे उठा सकते हैं. यह पचाने में आसान होता है और इससे गैस्ट्रिक प्रॉब्लम में आराम मिलता है. साथ ही यह कब्ज़ और पेट के दर्द को भी रोकता है. बच्चे की मालिश के दौरान उसके पेट पर हल्के हाथ से जैतून तेल की मालिश करने से उसका डाइजेशन ठीक रहता है.
तो ये तो बात हुई ऑलिव ऑइल (olive oil benefits for babies massage in hindi) के फ़ायदों की.
आगे आपको बताते हैं कि कई सारे ब्रांड्स के बीच में से आप बेस्ट ऑलिव ऑइल का चुनाव कैसे कर सकते हैं!
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बच्चे की स्किन और बालों पर जैतून के तेल का उपयोग करने के लिए हमेशा एक्स्ट्रा-वर्जिन जैतून के तेल (EVOO) का उपयोग करें. एक्सट्रा-वर्जिन जैतून का तेल इसका सबसे शुद्ध रूप है और यह पूरी तरह से केमिकल फ्री होता है. इसमें नॉर्मल ऑलिव ऑइल की तुलना में पोषक तत्व अधिक होते हैं.
कोई भी तेल कोल्ड प्रेस्ड तब माना जाता है जब उसे निकालने की प्रोसेस के दौरान उसका टेम्परेचर कभी भी 81.9 डिग्री फ़ारेनहाइट से ऊपर नहीं जाए. ऑलिव ऑइल की प्राकृतिक सुगंध, स्वाद और न्यूट्रिशनल वैल्यू को बनाए रखने के लिए जब टेम्परेचर कम रखा जाता है तो यह कोल्ड प्रेस्ड कहलाता है. इसलिए कोल्ड प्रेस्ड जैतून के तेल का उपयोग करना बेस्ट है.
यह ज़रूरी नहीं है कि अगर जैतून तेल पर एक्स्ट्रा वर्जिन का लेबल लगा हो, तो वह शुद्ध ही होगा. कुछ ब्रांड कॉस्ट घटाने के लिए इसमें सोयाबीन ऑइल मिला देते हैं. इसलिए जैतून का तेल खरीदते समय हमेशा सर्टिफिकेशन देखें और जाँच लें कि इसमें कोई दूसरे तेल या एडिटिव्स तो नहीं मिले हुए हैं.
अगर आप काँच की बोतल में जैतून का तेल खरीद रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह गहरे हरे रंग की हो. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रकाश के संपर्क में आने से जैतून का तेल ख़राब हो सकता है. प्लास्टिक की बोतलों में जैतून का तेल खरीदने से बचें क्योंकि इससे उसकी क्वालिटी पर नेगेटिव असर पड़ सकता है.
जैतून के तेल से बच्चे की मालिश के पहले (precaution while using olive oil for babies massage in hindi) पैच टेस्ट ज़रूर करें. इसके लिए बच्चे की त्वचा के एक छोटे हिस्से पर ऑलिव ऑइल लगाकर 24 घंटे के लिए छोड़ दें और उसकी लगातार जाँच करते रहें कि कहीं बच्चे को उसके कारण स्किन एलर्जी तो नहीं हो रही है. एलर्जी का कोई संकेत ना मिलने पर आप मालिश कर सकते हैं. अगर बच्चे को तेल के प्रयोग से एलर्जी हो तो इसकी जगह पर आप गाय का शुद्ध घी या उससे बने मसाज ऑइल भी यूज़ कर सकते हैं; जैसे कि माइलो का लक्षादि तैलम.
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जैतून तेल से बच्चे की मालिश (how to use olive oil for baby massage) शुरू करने से पहले मालिश के लिए ज़रूरी सभी सामान अपने पास रख लें और फिर इन टिप्स को फॉलो करें.
बच्चे की मालिश में उसके शरीर के प्रत्येक भाग को धीरे-धीरे और लयबद्ध तरीेक़े से मलना शुरू करें. बच्चे को पीठ के बल लिटा दें और उसके शरीर के प्रत्येक हिस्से में तेल लगाते हुए धीरे-धीरे रगड़ें. छोटे बच्चे बहुत नाजुक होते हैं. इसलिएए मालिश की इस प्रोसेस में ध्यान रखें कि आपके हाथों का स्ट्रोक और प्रेशर बहुत ही हल्का हो. थोड़ा-सा भी अधिक प्रेशर बच्चे को परेशान कर देगा और वो मालिश को एन्जॉय नहीं करेगा.
बच्चे की मालिश करने के लिए ऐसा समय चुनें जब बच्चा न तो भूखा हो और ना ही उसका पेट बहुत ज़्यादा भरा हुआ हो. जब बच्चा जाग रहा हो और पूरी तरह अलर्ट हो, उसे नींद न आ रही हो ऐसा वक़्त मालिश के लिए बेस्ट है. इसके लिए सुबह दूध पिलाने के लगभग 1 घंटे बाद या रात का समय ठीक रहता है. आप बच्चे को रात में दूध पिलाने से पहले उसकी मालिश करें. मालिश के बाद बच्चा दूध पीकर अच्छी नींद लेगा.
बच्चे की मालिश एक शांत और गर्म कमरे में करें जिसका मतलब है लगभग 75 डिग्री फ़ारेनहाइट. कमरे में हल्की रोशनी रखें. मालिश करने से पहले आप भी अपना मोबाइल बंद या साइलेंट मोड में कर दें. आप चाहें तो इस दौरान हल्का म्यूजिक भी चला सकते हैं.
कोशिश करें कि बच्चे की मालिश आप हर दिन लगभग एक ही समय पर करें. इससे बच्चे की बॉडी क्लॉक सेट हो जाएगी और वो मालिश को ज़्यादा एन्जॉय करेगा. अब आप सोचेंगे कि मालिश करने के लिए कौन- सा समय सबसे अच्छा है? असल में ऐसा कोई नियम नहीं है. आप ऐसा समय चुनें जब आप ख़ुद भी रिलेक्स हों और आपका बच्चा भी भूखा न हो और उसका पेट बहुत भरा हुआ ना हो.
कई बार देखने में आता है कि मालिश के दौरान बच्चा रोता रहता है और उसकी मालिश भी होती रहती है. लेकिन आपको बेबी क्यूज़ पर ध्यान देना चाहिए और उसके संकेतों को समझना चाहिए. मूड न होने पर किसी को भी मालिश कराना पसंद नहीं होता, और यह बात बच्चे पर भी लागू होती है. अगर आप अपने बच्चे की मालिश कर रहे हैं और वो एन्जॉय करने की जगह विरोध करे या फिर रोने लगे तो उसी वक़्त उसकी मालिश बंद कर दें. कुछ देर बाद उसका मूड ठीक होने पर मालिश करें. साथ ही आपको हर बार उसके पूरे शरीर की मालिश करने की ज़रूरत नहीं है. अगर बच्चा पैरों और टाँगों की मालिश के बाद मना करने लगे तो उस दिन के लिए मालिश को वहीं पर बंद कर दें.
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बच्चे की मालिश करते हुए मौसम के अनुकूल कुछ छोटे-छोटे बदलाव करते रहें. जैसे ठंड में तेल को हल्का गरम कर सकते हैं और बच्चे के कपड़े एक साथ न खोलकर पहले नीचे की बॉडी की मालिश करें और उसके बाद ऊपर के कपड़े हटाएँ. इसके अलावा, बच्चे को धूप में लिटाकर मालिश करने से बच्चे को विटामिन डी मिलता है और मालिश के फ़ायदे कई गुना बढ़ जाते हैं.
1. Mohammadian-Dameski M, Farhat A, Afzal Aghaee M, Nademi Z, Hadianfar A, Shirazinia M. (2023). The effect of topical olive oil application on the symptoms of infantile colic: A randomized, double-blind, placebo-controlled clinical trial.
2. Jabraeile M, Rasooly AS, Farshi MR, Malakouti J. (2016). Effect of olive oil massage on weight gain in preterm infants: A randomized controlled clinical trial. Niger Med J.
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