
सारांश

प्रेग्नेंसी में आइसक्रीम की क्रेविंग होना बिल्कुल नॉर्मल है, और सीमित मात्रा में पैक्ड (पाश्चराइज़्ड दूध से बनी) आइसक्रीम खाना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है (NHS). सबसे ज़रूरी बात मात्रा और टाइप की है: मशीन से निकलने वाली सॉफ्ट-सर्व आइसक्रीम और घर पर कच्चे अंडे से बनी आइसक्रीम से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें लिस्टेरिया या सैल्मोनेला का रिस्क हो सकता है. आइसक्रीम में शुगर और फैट ज़्यादा होता है, इसलिए ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ना और जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. आइसक्रीम एक ट्रीट है, कोई हेल्थ फूड नहीं, इसलिए इसे कभी-कभी और थोड़ी मात्रा में ही लें और बैलेंस्ड डाइट पर ध्यान दें.
हाँ, प्रेग्नेंसी में सीमित मात्रा में पैक्ड और पाश्चराइज़्ड आइसक्रीम खाना आमतौर पर सुरक्षित है. बचना है सॉफ्ट-सर्व मशीन वाली और कच्चे अंडे से बनी होममेड आइसक्रीम से, जिनमें इन्फेक्शन का रिस्क होता है. चूँकि आइसक्रीम में शुगर और फैट ज़्यादा होता है, इसे कभी-कभार ट्रीट की तरह लें. अगर आपको जेस्टेशनल डायबिटीज है या वज़न को लेकर सलाह मिली है, तो अपने डॉक्टर से मात्रा के बारे में ज़रूर पूछें.
लेखक: Mylo Editorial Team, Mylo Parenting Desk मेडिकली रिव्यूड बाय: Mylo Editorial Board, FOGSI और NHS गाइडलाइन के अनुरूप आखिरी अपडेट: 8 जुलाई 2026
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है. हर प्रेग्नेंसी अलग होती है. अगर आपको जेस्टेशनल डायबिटीज, दूध या अंडे से एलर्जी, या कोई अन्य मेडिकल कंडीशन है, तो आइसक्रीम या कोई भी नई चीज़ खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें.
प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ खास चीज़ें खाने की क्रेविंग होना बहुत नॉर्मल है. इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, किसी न्यूट्रिएंट की कमी या मनोवैज्ञानिक (इमोशनल) कारण हो सकते हैं (Orloff & Hormes, 2014). जिन महिलाओं को पहले से आइसक्रीम पसंद है, उन्हें प्रेग्नेंसी में इसकी इच्छा और बढ़ सकती है. कुछ महिलाओं को, जिन्हें पहले आइसक्रीम खास पसंद नहीं थी, प्रेग्नेंसी में अचानक इसका मन करने लगता है.
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यह इस आर्टिकल का सबसे ज़रूरी हिस्सा है, क्योंकि क्रेविंग से ज़्यादा मायने यह रखता है कि आप कौन सी आइसक्रीम खा रही हैं.
| आइसक्रीम का टाइप | सुरक्षित है या नहीं | कारण |
|---|---|---|
| पैक्ड/टब वाली आइसक्रीम (ब्रांडेड) | आमतौर पर सुरक्षित | पाश्चराइज़्ड दूध और अंडे से बनी होती है, इन्फेक्शन का रिस्क कम |
| सॉफ्ट-सर्व (मशीन/वैन से) | सावधानी रखें/बचें | मशीन ठीक से साफ न हो तो लिस्टेरिया का रिस्क हो सकता है |
| घर पर कच्चे अंडे से बनी आइसक्रीम | बचें | कच्चे अंडे में सैल्मोनेला का रिस्क |
| कच्चे/अनपाश्चराइज़्ड दूध से बनी | बचें | अनपाश्चराइज़्ड दूध में बैक्टीरिया का रिस्क |
आसान नियम: ब्रांडेड, पैक्ड और पाश्चराइज़्ड आइसक्रीम चुनें, और सड़क किनारे मशीन वाली सॉफ्ट-सर्व या कच्चे अंडे वाली होममेड आइसक्रीम से बचें (NHS).
आमतौर पर आइसक्रीम दूध, क्रीम, शुगर, फ्लेवर और कभी-कभी अंडे, नट्स या फ्रूट से बनी होती है. लगभग हर 100 ग्राम आइसक्रीम में:
| पोषक तत्व | मात्रा (लगभग) |
|---|---|
| कैलोरी | 200 से 210 |
| फैट | 11 ग्राम या ज़्यादा |
| कोलेस्ट्रॉल | 44 मिलीग्राम |
| कार्बोहाइड्रेट | 24 ग्राम |
| शुगर | 21 ग्राम |
| सोडियम | 80 मिलीग्राम |
इससे साफ है कि आइसक्रीम में शुगर और फैट काफी होता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में लेना ही समझदारी है.
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सीमित मात्रा में लेने पर आइसक्रीम कुछ छोटे फ़ायदे दे सकती है, पर ध्यान रहे कि ये फ़ायदे इसे "ज़रूरी" नहीं बनाते.
आइसक्रीम में शुगर होती है, जिससे कुछ देर के लिए एनर्जी महसूस हो सकती है. पर यह एनर्जी अस्थायी होती है और शुगर तेज़ी से बढ़ती-घटती है, इसलिए इसे एनर्जी का ज़रिया न समझें.
आइसक्रीम में दूध और मिल्क सॉलिड होते हैं, जिससे थोड़ा कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन डी और फास्फोरस मिलता है. हालाँकि इतने ही पोषक तत्व दूध, दही या पनीर से बिना ज़्यादा शुगर के मिल जाते हैं, जो बेहतर विकल्प हैं.
नोट: यह मान्यता कि "आइसक्रीम एक फर्मेंटेड फूड है और इम्यूनिटी बूस्ट करती है", सही नहीं है. सामान्य आइसक्रीम फर्मेंटेड फूड नहीं होती, इसलिए इसे इम्यूनिटी बढ़ाने वाला भोजन न समझें.
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ज़्यादा मात्रा में आइसक्रीम खाने से कुछ नुक़सान हो सकते हैं:
आइसक्रीम जैसे ज़्यादा शुगर वाले फूड नियमित रूप से खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज (प्रेग्नेंसी वाली डायबिटीज) का खतरा बढ़ सकता है, जिसका असर माँ और शिशु दोनों पर पड़ता है.
आइसक्रीम में कैलोरी और शुगर ज़्यादा होती है. इसे बहुत खाने से ज़रूरत से ज़्यादा वज़न बढ़ सकता है, और पेट भरा रहने से ज़रूरी पौष्टिक भोजन कम खाया जाता है.
जिन महिलाओं को दूध (डेयरी), अंडे या नट्स से एलर्जी है, उन्हें आइसक्रीम से एलर्जी रिएक्शन हो सकता है, इसलिए इंग्रेडिएंट ज़रूर पढ़ें.
सॉफ्ट-सर्व मशीन वाली या कच्चे अंडे वाली आइसक्रीम से लिस्टेरिया या सैल्मोनेला इन्फेक्शन हो सकता है, जो प्रेग्नेंसी में गंभीर हो सकता है. इसीलिए टाइप का चुनाव ज़रूरी है.
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प्रेग्नेंसी में आइसक्रीम को कभी-कभार की ट्रीट मानें, हर दिन की आदत नहीं. एक बार में छोटी सर्विंग लें, पैक्ड और पाश्चराइज़्ड ब्रांड चुनें, और बाकी दिन की डाइट में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और फल-सब्ज़ियों पर ध्यान दें, ताकि आपको और शिशु दोनों को पूरा पोषण मिले.
भारत में गर्मियों में आइसक्रीम और कुल्फी की क्रेविंग आम है. ध्यान रखें कि सड़क किनारे खुली या मशीन वाली आइसक्रीम से बचें और भरोसेमंद, पैक्ड ब्रांड चुनें. अगर मीठे की क्रेविंग हो, तो घर की बनी खीर (कम शुगर), ठंडा दूध, दही या फ्रूट-योगर्ट जैसे हेल्दी विकल्प भी अच्छे रहते हैं. जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर आइसक्रीम की मात्रा डॉक्टर से पूछकर ही तय करें.
| मिथक | सच्चाई |
|---|---|
| प्रेग्नेंसी में आइसक्रीम बिल्कुल नहीं खानी चाहिए | सीमित मात्रा में पैक्ड, पाश्चराइज़्ड आइसक्रीम आमतौर पर सुरक्षित है |
| आइसक्रीम इम्यूनिटी बूस्ट करती है | सामान्य आइसक्रीम फर्मेंटेड फूड नहीं है, यह इम्यूनिटी नहीं बढ़ाती |
| आइसक्रीम अच्छा एनर्जी फूड है | इसमें शुगर से मिलने वाली एनर्जी अस्थायी होती है, यह हेल्थ फूड नहीं |
| हर तरह की आइसक्रीम एक जैसी सुरक्षित है | सॉफ्ट-सर्व और कच्चे अंडे वाली आइसक्रीम से बचना चाहिए |
रोज़ खाना ठीक नहीं है, क्योंकि इसमें शुगर और फैट ज़्यादा होता है, जिससे वज़न और जेस्टेशनल डायबिटीज का रिस्क बढ़ सकता है. इसे कभी-कभार, छोटी मात्रा में ट्रीट की तरह लें.
पैक्ड, ब्रांडेड और पाश्चराइज़्ड दूध से बनी आइसक्रीम सुरक्षित मानी जाती है. मशीन वाली सॉफ्ट-सर्व और कच्चे अंडे से बनी होममेड आइसक्रीम से बचें.
सीमित मात्रा में सुरक्षित आइसक्रीम से शिशु को नुक़सान नहीं होता. पर बहुत ज़्यादा शुगर या गलत टाइप की (इन्फेक्शन वाली) आइसक्रीम नुक़सानदेह हो सकती है.
इस स्थिति में शुगर कंट्रोल ज़रूरी है, इसलिए आइसक्रीम खाने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटीशियन से ज़रूर पूछें.
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