
वर्तमान समय में रिप्रोडक्टिव टेक्नोलोजी में स्पर्म फ्रीजिंग एक महत्वपूर्ण फर्टिलिटी टेक्निक के रूप में सामने आई है. स्पर्म फ्रीजिंग (sperm freeze meaning in Hindi) किसी भी व्यक्ति को उनकी फर्टिलिटी को संरक्षित करने का ऑप्शन देती है जिससे वह अपने जीवन के सबसे फर्टाइल वर्षों के बीत जाने के बाद भी अपने सबसे हेल्दी स्पर्म का यूज़ करते हुए माता-पिता बन सकते हैं. आइये स्पर्म फ्रीजिंग (what is sperm freeze in Hindi) के बारे में विस्तार से जानते हैं.
स्पर्म फ्रीजिंग, जिसे स्पर्म क्रायोप्रिजर्वेशन (Sperm cryopreservation) के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसी टेक्निक है जिसका उपयोग स्पर्म सेल्स को बेहद कम टेम्परेचर पर लंबे समय तक संरक्षित करने के लिए किया जाता है. इस प्रक्रिया में स्पर्म सेल्स को इस तरह स्टोर किया जाता है कि वह आइस क्रिस्टल्स में बदलने और सेलुलर स्ट्रेस से होने वाले डैमेज से पूरी तरह बचे रहें.
कुछ ख़ास तरह की परिस्थितियों में स्पर्म फ्रीजिंग बेहद फ़ायदेमंद है; जैसे-
ऐसे व्यक्ति जो फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाला इलाज़; जैसे- कीमोथेरेपी, रेडिएशन या कैंसर का ट्रीटमेंट् ले रहे हों.
जो लोग पर्सनल कारणों या करियर की वजह से फेमिली को देर से शुरू करना चाहते हैं और इसके लिए अपने युवा वर्षों के सबसे हेल्दी स्पर्म फ्रीज़ कर सकते हैं.
पुरुषों में स्पर्म प्रोडक्शन या क्वालिटी में कमी होने या टेस्टीकुलर सर्जरी आदि के मामलों में भी स्पर्म फ्रीजिंग की मदद ली जाती है.
लिंग परिवर्तन के द्वारा महिला से पुरुष में परिवर्तित होने वाले ऐसे लोग जो हार्मोन थेरेपी या सर्जरी से पहले अपनी फर्टिलिटी को संरक्षित करना चाहते हों.
ऐसे कपल्स या आईवीएफ या आईयूआई जैसी फर्टिलिटी टेक्निक का प्रयोग करने के लिए अपने हेल्दी स्पर्म का बैकअप रखना चाहता हैं.
जिन लोगों के परिवार में फर्टिलिटी संबंधी समस्याओं या जेनेटिक डिसऑर्डर की हिस्ट्री रही हो वे भविष्य में परिवार की ग्रोथ को सुनिश्चित करने के लिए स्पर्म फ्रीज कर सकते हैं.
ऐसे डोनर्स जो स्पर्म बैंक में डोनेट करते हैं ताकि इंफर्टिलिटी से जूझ रहे कपल्स को प्रेग्नेंसी का ऑप्शन मिल सके.
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1. स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर असर डालने वाले ट्रीटमेंट्स से गुज़र रहे व्यक्तियों के लिए फर्टिलिटी ऑप्शन को सेफ करता है.
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2. देर से परिवार शुरू करने की इच्छा रखने वाले कपल्स को भविष्य में हेल्दी स्पर्म की उपलब्धता कराने में मदद मिलती है जिसे वो बड़ी उम्र में भी आसानी से माता-पिता बन सकते हैं.
3. इससे आईवीएफ, आईयूआई और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (intracytoplasmic sperm injection - ICSI) जैसी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्निक में मदद मिलती है.
4. स्पर्म बैंकों में कई तरह की स्पर्म क्वालिटी की उपलब्धता में लाभकारी है जिससे डोनर स्पर्म की इच्छा रखने वाले लोगों को कई तरह के विकल्प मिल जाते हैं.
5. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को हार्मोन थेरेपी या सर्जरी करवाने से पहले फर्टिलिटी ऑप्शन बनाए रखने में मदद करता है.
6. कम उम्र में स्पर्म को फ्रीज कराने से बड़ी उम्र में भी हेल्दी स्पर्म का बैकअप बना रहता है.
7. फर्टिलिटी पर असर डालने वाली ख़तरनाक दुर्घटनाओं या चोटों के मामले में बैकअप प्रदान करता है.
8. देरी से परिवार शुरू करने की इच्छा रखने वाले कपल्स को फैमिलीी प्लानिंग में सुविधा मिलती है.
9. जेनेटिक डिसऑर्डर वाले व्यक्तियों को संतान प्राप्ति के लिए स्वस्थ स्पर्म मुहैया कराने में हेल्प मिलती है.
स्पर्म क्रायोप्रिजर्वेशन (what is sperm freezing in Hindi) की प्रोसेस के कई स्टेप होते हैं जिसमें सबसे पहला है.
स्पर्म फ्रीजिंग की प्रोसेस सैंपल लेने से शुरू होती है जिसमें एक स्टेराइल कंटेनर में मेस्टर्बेशन या इलेक्ट्रोएजेक्यूलेशन या टेस्टिकुलर स्पर्म एक्सट्रैक्शन (testicular sperm extraction -TESE) जैसी विधियों से स्पर्म को कलेक्ट किया जाता है.
अब इस सीमन में स्पर्म की संख्या, मोबिलिटी और मोर्फोलोजी को चेक किया जाता है. क्वालिटी को चेक करने के लिए कई बार सीमन एनालिसिस भी किया जाता है. इसके बाद इस सैंपल को क्रायोप्रोटेक्टेंट सॉल्यूशन के साथ मिलाकर तैयार करते हैं जो स्पर्म को फ्रीज़ और अनफ्रीज करने के दौरान डैमेज से बचाता है.
स्पर्म और क्रायोप्रोटेक्टेंट के मिक्स्चर को फ्रीजिंग पॉइंट से एक डिग्री ऊपर तक लाकर ठंडा किया जाता है ताकि कोशिकाएं क्रायोप्रोटेक्टेंट सॉल्यूशन के अनुकूल सेट हो सकें. इससे आइस क्रिस्टल्स नहीं जमने पाते और स्पर्म सेल्स को डैमेज से बचाया जाता है.
एक बार जब स्पर्म का सैंपल तैयार हो जाता है, तो इसे क्रायोवियल (cryovials) नाम के ख़ास कंटेनरों में लोड किया जाता है. इन कंटेनरों को कंट्रोल्ड रेट फ्रीजर में रखते हैं जिसमें टेम्परेचर को धीरे-धीरे कम किया जाता है. स्पर्म सैंपल अंत में लिक्विड नाइट्रोजन में लगभग -196°C (-320.8°F) के टेम्परेचर पर स्टोर किया जाता है.
जमे हुए स्पर्म सैंपल को लिक्विड नाइट्रोजन टैंक में रखा जाता है जो लंबे समय तक स्टोरेज के लिए बेहद कम टेम्परेचर मेंटेन करते हैं.
जब व्यक्ति अपने फ़्रोज़न स्पर्म का उपयोग करना चाहता है तो उसे धीरे-धीरे पिघलने की प्रोसेस की जाती है. इसके लिए सैंपल को लिक्विड नाइट्रोजन टैंक से हटा कर नियंत्रित तरीके़ से पिघलाया जाता है.
पिघलने के बाद, स्पर्म की क्वान्टिटी और मोबिलिटी जैसे स्टैंडर्ड को चेक करने के लिए उस सैंपल का फिर से मूल्यांकन किया जाता है.
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स्पर्म फ्रीजिंग का सक्सेस रेट सेंपल की क्वालिटी, फ्रीजिंग तथा थौइंग टेक्निक और व्यक्तिगत विशेषताओं के आधार पर अलग हो सकता है. आमतौर पर स्पर्म फ्रीजिंग के बाद सेंपल में जीवित स्पर्म का प्रतिशत 50% से 80% तक होता है जिसका मतलब है कि फ्रीज़ किए हुए स्पर्म का एक बड़ा हिस्सा अनफ्रीज़ करने के बाद भी हेल्दी बना रहता है.
स्पर्म फ़्रीज़िंग का खर्चा क्लिनिक की जगह, सुविधाओं और पैकेज में दी गयी सेवाओं के आधार पर निर्भर करता है. औसतन, भारत में शुक्राणु फ्रीजिंग की लागत प्रति सैंपल लगभग ₹5,000 से ₹15,000 या कुछ अधिक तक हो सकती है जिसमें शुरुआती टेस्ट, सैंपल असेस्मेंट, सीमन एनालिसिस, क्रायोप्रिज़र्वेशन और एक तय समय सीमा तक स्पर्म स्टोरेज शामिल होता है.
स्पर्म फ्रीजिंग के ऑप्शन को अपनाते हुए इस बात का ध्यान रखें कि इसकी सफलता स्पर्म सैंपल की क्वालिटी, फ्रीजिंग टेक्निक और थौइंग प्रोटोकॉल जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. इसलिए, बेस्ट रिज़ल्ट के लिए किसी अनुभवी फर्टिलिटी एक्सपर्ट् को ही चुनें.
1. Borate GM, Meshram A. (2022). Cryopreservation of Sperm: A Review.
2. Rozati H, Handley T, Jayasena CN. (2017). Process and Pitfalls of Sperm Cryopreservation.
3. Hughes G, Martins da Silva S. (2022). Sperm cryopreservation for impaired spermatogenesis.
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