
सारांश




आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियाँ हैं, जो हमारी हेल्थ के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद मानी जाती हैं. मुलेठी यानी कि यष्टिमधु उन्हीं में से एक है. चलिए आपको डिटेल में बताते हैं कि यष्टिमधु क्या होता है (Yashtimadhu in hindi), यष्टिमधु के क्या फ़ायदे (Yashtimadhu benefits in Hindi) और यष्टिमधु को कैसे इस्तेमाल किया जाता है (Yashtimadhu uses in Hindi), आदि.
मुलेठी (Mulethi in Hindi) जिसे लिकोरिस रूट (licorice root) भी कहते हैं एक पॉपुलर जड़ी-बूटी है जिसे आयुर्वेद में ख़ूब प्रयोग किया जाता है. इसका साइंटिफिक नाम ग्लाइसीराइज़ा ग्लबरा (Glycyrrhiza glabra) है जो स्वाद में मीठा होता है. मुलेठी के प्राकृतिक एंटीइन्फ़्लेमेटरी गुणों से गले की खराश, खाँसी और साँस संबंधी परेशानी में ख़ास आराम मिलता है. आइये इसके कई सारे और फायदों (Mulethi ke fayde in Hindi) के बारे में विस्तार से जानते हैं.
मुलेठी प्राकृतिक गुणों (Mulethi benefits in Hindi) का भंडार है और एक असरदार इम्यूनिटी बूस्टर की तरह काम करती है.
मुलेठी में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (immunomodulatory) गुण होते हैं, जिसका अर्थ है कि यह इम्यूनिटी बढ़ाती है. इसमें ग्लाइसीराइज़िन (glycyrrhizin), फ्लेवोनोइड्स (flavonoids) और पॉलीसेकेराइड (polysaccharides) जैसे कई बायोएक्टिव कंपाउंड होते हैं जो इसके इम्यून बूस्टिंग इफ़ेक्ट्स को बढ़ाते हैं.
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मुलेठी का मुख्य कंपाउंड फाइटोएस्ट्रोजन है, जो एक प्लांट बेस्ड कंपाउंड है और फ़ीमेल रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स के असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है.
मुलेठी का उपयोग पारंपरिक रूप से साँस संबंधी रोगों में राहत और रेस्पाइरेटरी प्रॉब्लम को कम करने में किया जाता रहा है. इसमें गले की ख़राश और सूजन घटाने, छाती के इन्फेक्शन को रोकने और कफ़ निकालने के अद्भुद गुण होते हैं.
मुलेठी की एंटी कफ़ प्रॉपर्टीज़ चेस्ट में जमे बलगम और कफ को ढीला करने में मदद करते हैं, जिससे इसे बाहर निकालना आसान हो जाता है. इससे गीली और सूखी दोनों ही तरह की खाँसी में कमी आती है और सर्दी में यह विशेष रूप से फ़ायदेमंद है.
आयुर्वेद में माना गया है कि मुलेठी में गैलेक्टागॉग (galactagogue) प्रॉपर्टीज़ होती हैं, जिसका अर्थ है कि यह ब्रेस्ट मिल्क के प्रोडक्शन को बढ़ाने में भी मदद करती है. इसका उपयोग अधिकतर ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने वाले आयुर्वेदिक फॉर्मूलों में किया जाता है.
मुलेठी के कुछ कंपाउंड; जैसे - फ्लेवोनोइड्स (Flavonoids) और ट्राइटरपीनोइड्स (Triterpenoids) डायबिटीज या प्री- डायबिटीज में असरदार रूप से काम करते हैं. इससे न केवल इंसुलिन इंसेंसिटिविटी में सुधार आता है; बल्कि ग्लूकोज़ अब्जॉर्शन कम हो जाने के कारण खाना खाने के बाद तुरंत बढ्ने वाला ब्लड शुगर लेवल भी कंट्रोल में आने लगता है.
मुलेठी आपके हार्ट को हेल्दी रखने में भी काम आ सकती है. इसमें फ्लेवोनोइड्स (flavonoids) और पॉलीफेनोल्स (polyphenols) जैसे एंटीऑक्सीडेंट गुणों होते हैं जो फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को रोककर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को स्वस्थ रखते हैं. इसके अलावा, मुलेठी का सेवन ख़राब कोलेस्ट्रॉल (LDL cholesterol) को कम करने में भी लाभकारी है.
आयुर्वेद में मुलेठी को सेक्शुअल ड्राइव बढ़ाने वाली (aphrodisiac) औषधि भी माना गया है और यौन शक्ति बढ़ाने वाली हर्बल दवाइयों में अक्सर इसका उपयोग किया जाता है. मुलेठी में मौजूद कंपाउंड ब्लड सर्कुलेशन और एनर्जी लेवल को बढ़ाते हैं वहीं स्ट्रेस को कम करने में भी मदद करते हैं जिससे लो सेक्स ड्राइव और सेक्शुअल वीकनेस जैसी परेशानियों में मदद मिलती है.
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मुलेठी को एडाप्टोजेन (adaptogen) माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर को स्ट्रेस के अनुकूल बनाने और संतुलन लाने में मदद करती है. इसकी नेचुरल शुगर से इंस्टेंट एनर्जी मिलती है जिससे सामान्य कमज़ोरी और थकान को कम करने में मदद मिलती है.
मुलेठी में प्राकृतिक मीठा स्वाद होता है, जो बिना किसी कैलोरी के मीठा खाने की इच्छा को शांत करने में मदद कर सकता है जिससे टोटल कैलोरी इंटेक में कमी लाना संभव है. यह गट हेल्थ (gut health) में सुधार लाती है जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और वेट लॉस में मदद मिलती है.
आजकल मुलेठी हर्बल स्किन प्रोडक्ट्स का एक मुख्य कोम्पोनेंट है क्योंकि इसके एंटी इन्फ़्लेमेटरी गुण एक्जिमा, सोरायसिस और मुँहासों वाली त्वचा को शांत करते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स के असर को कम करते हैं जिसे प्री मैच्योर एजिंग को रोकने में भी मदद मिलती है. मुलेठी में स्किन ब्राइटनिंग (skin brightening) प्रॉपर्टीज़ होती हैं जिस हाइपरपिग्मेंटेशन में कमी आती है और क्योंकि यह एक प्राकृतिक ह्यूमेक्टेंट (humectant) है, इसलिए यह त्वचा को हाइड्रेटेड भी रखती है.
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मुलेठी के एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज़ सिर की रूसी, जलन और खुजली को शांत करते हैं. इसमें म्यूसिलेज (mucilage) होता है, जो एक प्राकृतिक कंडीशनिंग एजेंट है और बालों के टेक्सचर को सॉफ्ट बनाता है. मुलेठी स्कैल्प पर सीबम प्रोडक्शन को कंट्रोल करती है जिससे स्कैल्प हेल्दी रहती है और बालों में प्राकृतिक चमक आती है.
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मुलेठी (Mulethi meaning in Hindi) के बेहिसाब गुण और स्वास्थ्य के लिए इतने सारे फ़ायदे जानने के बाद अब बात करते हैं इसके इस्तेमाल की.
मुलेठी पाउडर (Mulethi powder in Hindi) को चाय या काढ़े की तरह और त्वचा पर बाहर से भी प्रयोग किया जा सकता है. आइये आपको बताते हैं इस पाउडर के प्रयोग (Mulethi powder uses in Hindi) के कुछ आसान तरीक़े.
एक कप गर्म पानी में एक चम्मच मुलेठी पाउडर मिलाएँ और इसे 5-10 मिनट तक छोड़ दें. बस आप की हर्बल चाय तैयार है. स्वाद के लिए इसमें शहद या नींबू भी मिला सकते हैं.
एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच मुलेठी पाउडर तब तक उबालें जब तक यह आधा न रह जाए. इसे छान कर प्रयोग करें.
मुलेठी पाउडर को गुलाब जल या दही के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे अपने चेहरे पर लगाएँ. 15-20 मिनट रखकर चेहरा धो लें. यह त्वचा को चमकदार और दाग-धब्बे कम करने में मदद करता है.
मुलेठी पाउडर को पानी या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर हेयर मास्क बनाएँ. स्कैल्प और बालों पर 30 मिनट तक लगा रहने के बाद धो लें. यह स्कैल्प को पोषण देने और हेयर ग्रोथ में मदद करता है.
गले में दर्द होने पर मुलेठी के काढ़े के गरारे करने से राहत मिलती है.
अपच के कारण पेट फूलने की दिक्कत होने पर मुलेठी पाउडर को गर्म पानी के साथ लेना चाहिए.
मुलेठी पाउडर को शहद या गुलाब जल के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएँ. मुँहासे या सूजन वाली जगह पर लगाने से दर्द में राहत मिलती है.
किसी भी अन्य औषधि की तरह मुलेठी पाउडर का प्रयोग भी सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. हमेशा अच्छी क्वालिटी का शुद्ध मुलेठी पाउडर ही प्रयोग करें. अगर आप प्रेग्नेंट हैं या एक ब्रेस्टफ़ीडिंग माँ हैं या किसी एलर्जी से परेशान हैं तो इसके प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें.
1. Wahab S, Annadurai S, Abullais SS, Das G, Ahmad W, et al. (2021). Glycyrrhiza glabra (Licorice): A Comprehensive Review on Its Phytochemistry, Biological Activities, Clinical Evidence and Toxicology.
2. Pastorino G, Cornara L, Soares S, Rodrigues F, Oliveira MBPP. (2018). Liquorice (Glycyrrhiza glabra): A phytochemical and pharmacological review.
3. El-Saber Batiha G, Magdy Beshbishy A, et al. (2020 ). Traditional Uses, Bioactive Chemical Constituents, and Pharmacological and Toxicological Activities of Glycyrrhiza glabra L. (Fabaceae).
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