
आईवीएफ एक ऐसी मेडिकल तकनीक है, जिससे अब तक दुनियाभर में काफ़ी कपल्स को गर्भधारण करने में मदद मिली है. आमतौर पर पीसीओएस/पीसीओडी की वजह से ओव्यूलेशन में समस्या होने, फैलोपियन ट्यूब में कोई परेशानी होने, पुरुष पार्टनर के स्पर्म काउंट कम होने, एंडोमेट्रिओसिस या फिर अन्य फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के फेल होने पर आईवीएफ तकनीक को उम्मीद की एक किरण के तौर पर देखा जाता है.
आईवीएफ (IVF) बीते कुछ सालों में बहुत ही कॉमन हो गया है. हालाँकि, जो कपल्स पहली बार इस प्रक्रिया से गुजरते हैं उन्हें प्रोसेस समझने में परेशानी हो सकती है. अगर आप भी आईवीएफ यानी कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ट्रीटमेंट के बारे में विचार कर रहे हैं, तो इस आर्टिकल को अंत तक ज़रूर पढ़ें. इस आर्टिकल के ज़रिये हम आपको आईवीएफ की कंप्लीट प्रोसेस के बारे में बताएँगे.
आईवीएफ ट्रीटमेंट का पहला दिन आपके पीरियड्स के पहले दिन से शुरू होता है. पीरियड्स की शुरुआत से 8 से 14 दिनों के लिए, डॉक्टर पेशेंट को गोनैडोट्रोपिन (Gonadotropin) लेने की सलाह देते हैं. यह एक फर्टिलिटी मेडिसिन होती है, जो फर्टिलाइजेशन के लिए ओवरी को मल्टीपल एग रिलीज करने में मदद करती है. इसके अलावा डॉक्टर आर्टिफिशियल हार्मोन; जैसे कि ल्यूप्रोलाइड (Leuprolide) या सेट्रोरेलिक्स (Cetrorelix) लेने के लिए भी कहते हैं.
इन मेडिसिन को लेने के दौरान ब्लड हार्मोन्स की जाँच और ओवरी के अल्ट्रासाउंड माप के लिए हर दो से तीन दिनों में क्लिनिक जाना होता है. इस दौरान डॉक्टर फॉलिकल्स (फ्लूइड से भरी थैली जहाँ एग मैच्योर होते हैं) को मॉनिटर करते हैं.
जब फॉलिकल्स तैयार हो जाते हैं, तो 'ट्रिगर शॉट' दिया जाता है. यह एक तरह का इंजेक्शन होता है, जिसके कारण एग पूरी तरह से मैच्योर हो जाते हैं और फर्टिलाइजेशन के लिए सक्षम हो जाते हैं. ट्रिगर शॉट के लगभग 36 घंटे बाद एग बाहर निकालने के लिए तैयार होते हैं.
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डॉक्टर महिला पार्टनर को एनेस्थीसिया देते हैं और योनि (वेजाइना) के माध्यम से एक अल्ट्रासाउंड करते हैं. इस दौरान फॉलिकल्स से एग्स को निकालने के लिए एक पतली सुई डाली जाती है. आमतौर पर 8 से 15 एग निकाले जाते हैं. इसके कारण महिला को कुछ दिनों के बाद ऐंठन और स्पॉटिंग हो सकती हैं. हालाँकि, अधिकतर महिलाएँ एक या दो दिन में बेहतर महसूस करती हैं.
महिला पार्टनर की ओवरी से एग निकालने के बाद टेस्टीक्यूलर एस्पिरेशन की मदद से पुरुष पार्टनर के स्पर्म सैंपल को कलेक्ट किया जाता है. अगर पुरुष पार्टनर किसी वजह से स्पर्म नहीं दे पाता है, तो ऐसी स्थिति में स्पर्म डोनर की मदद ली जा सकती है. स्पर्म कलेक्ट करने के बाद डॉक्टर लैब में स्पर्म को स्पर्म फ्लूइड से अलग करते हैं.
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इस स्टेज पर एम्ब्रियोलॉजिस्ट एग्स को स्पर्म के साथ मिलाने से पहले अच्छे से टेस्ट करते हैं और रातभर इनक्यूबेटिंग में रखते हैं. आमतौर पर इस दौरान फर्टिलाइजेशन होता है. हालाँकि, एग्स की क्वालिटी अच्छी न होने या पहले आईवीएफ चक्र में फर्टिलाइजेशन फेल होने पर डॉक्टर इंट्रा साइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) तकनीक का उपयोग करने की सलाह देते हैं. इस तकनीक में स्पर्म को मैच्योर एग में सीधे इंजेक्ट किया जाता है.
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एग निकालने के 3 से 5 दिनों के बाद कुछ एग्स 6 से 10-सेल वाले भ्रूण (एम्ब्रियो) में बदल जाते हैं. पाँचवें दिन तक इनमें से कुछ (एम्ब्रियो) द्रव से भरी गुहा (Fluid-filled cavity) और टिशू (Tissues) के साथ ब्लास्टोसिस्ट बन जाते हैं. ब्लास्टोसिस्ट एक फर्टिलाइज्ड एग द्वारा बनाई गई कोशिकाओं (सेल्स) को अलग करने के ग्रुप को कहते हैं.
एम्ब्रियोलॉजिस्ट एग रिट्रीवल के तीन से पाँच दिनों के बाद गर्भाशय (यूट्रस) में रखने के लिए अच्छी क्वालिटी वाले भ्रूण का चयन करते हैं. एक्सट्रा एम्ब्रियो होने की स्थिति में एम्ब्रियो को फ़्रीज किया जा सकता है, ताकि भविष्य में उसका उपयोग किया जा सकता है.
उम्र और डायग्नोसिस के आधार पर डॉक्टर एक पतली ट्यूब (एक कैथेटर) डालकर गर्भाशय में एक से पांच भ्रूण रखते हैं. इस दौरान महिला पार्टनर को हल्की ऐंठन महसूस हो सकती है. हालाँकि इस दौरान एनेस्थीसिया की ज़रूरत नहीं होती है.
अगर आईवीएफ ट्रीटमेंट काम करता है, तो भ्रूण यूट्रस वॉल पर इम्प्लांट हो जाता है और एक बेबी के रूप में विकसित होने लगता है. एक से अधिक एम्ब्रियो ट्रांसफर होने पर गर्भधारण की संभावना अधिक होती है. लेकिन इस दौरान एक से अधिक बेबी होने की संभावना भी बढ़ जाती है. एक रिसर्च के अनुसार आईवीएफ के माध्यम से लगभग 20 प्रतिशत ट्विंस और ट्रिपलेट बेबी हुए हैं.
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ध्यान रखें आईवीएफ की प्रोसेस को कंप्लीट होने में 3 हफ़्तों तक का समय लग सकता है. ऐसे में प्रेग्नेंसी कंफर्म करने के लिए कम से कम 14 दिन का इंतज़ार करना चाहिए.
हर कपल के लिए आईवीएफ का अनुभव अलग हो सकता है. साथ ही, कपल्स की मेडिकल कंडीशन के आधार पर स्टेप्स में कुछ बदलाव भी हो सकते हैं. ध्यान रखें कि इस दौरान आपको और आपके पार्टनर को तनाव लेने से बचना है.
रेफरेंस
1. Choe J, Shanks AL. (2023). In Vitro Fertilization.
2. Nisal A, Diwekar U, Bhalerao V. (2020). Personalized medicine for in vitro fertilization procedure using modeling and optimal control.
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