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    हाथ उठाए बिना बच्चों को सिखाएं अनुशासन

    Parenting Tips

    हाथ उठाए बिना बच्चों को सिखाएं अनुशासन

    Updated on 12 December 2022

    माता पिता अपने बच्चों की ख्वाहिशें पूरी करने के लिए कई तरह के छोटे बड़े त्याग करते हैं लेकिन उनकी हर मांग पूरी की जाए यह बिल्कुल ज़रूरी नहीं। ऐसे में अकसर बच्चे ज़िद्दी हो जाते हैं और उन्हें संभालना पेरेंट्स के लिए मुश्किल हो जाता है। कई बार माता पिता अपने बच्चे को अनुशासन सिखाने के लिए गलत तरीका अपना लेते हैं। डांट फटकार या फिर पिटाई से आपके बच्चे के व्यवहार में कुछ हद तक ही सुधार आ सकता है लेकिन इस तरह के तरीकों के कई नुकसान भी होते हैं जिस पर पेरेंट्स ध्यान नहीं देते। इस बात पर कई तरह के अध्ययन किये गए हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिन बच्चों के साथ ज़्यादा सख्ती से पेश आया जाता है अकसर ऐसे बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं और उनका मनोबल भी गिर जाता है। केवल गुस्सा और हिंसा ही अपने बच्चे को सही राह पर लाने का एकमात्र विकल्प नहीं है बल्कि दूसरे कई तरीके हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही तरीकों के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं कैसे आप अपने बच्चे को बिना डांट फटकार और मार पिटाई के कैसे अनुशासन का पाठ पढ़ा सकते हैं। 1. बच्चों की ज़िद्द को नज़रअंदाज़ करें अगर आपका बच्चा खाने के बस कुछ ही समय पहले चॉकलेट, बिस्किट या फिर इस तरह की अन्य किसी चीज़ की मांग करे तो उनकी ज़िद्द को नज़रअंदाज़ करें और अपने काम में लगे रहें। थोड़ी देर वो आपको तंग ज़रूर करेंगे लेकिन बाद में खुद ही सामान्य हो जाएंगे। कई बच्चों को अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने की आदत सी होती है आपके ऐसा करने से वे सतर्क हो जाएंगे और भविष्य में भी इस बात का फायदा उठाएंगे। 2. प्रतिक्रिया ना दें अकसर आपने देखा होगा कि पेरेंट्स के गुस्से पर बच्चे नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं या फिर वे मज़ाक बनाने लगते हैं जिससे आपका क्रोध और भी बढ़ता है।ऐसे में सबसे पहले आप कोई प्रतिक्रिया ना दें। इसके बाद भी अगर आपको बच्चे के बर्ताव में कोई सुधार न दिखे तो उसे चेतावनी दें। इससे बच्चे को शांत रहने और अच्छा व्यवहार करने की सीख मिलेगी। 3. बच्चे की पसंद की चीज़ें उनसे ले लें यदि आपका बच्चा बेवजह किसी चीज़ के लिए ज़िद्द कर रहा है तो सबसे पहले आप उससे उसकी पसंद की चीज़ वापस लेकर रख लें। उदाहरण के तौर पर यदि वह आपसे नए खिलौने की मांग करे तो उसका कोई पुराना खिलौना वापस लेने की बात आप उससे कहें। यह तरीका हर उम्र के बच्चों के व्यवहार से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने में काफी फायदेमंद साबित होगा। 4. अपनी गलती का परिणाम उन्हें स्वयं ही भुगतने दें जब आपका बच्चा लगातार किसी बात पर ज़िद्द करता है तो ऐसे में आप उनकी बात न मानें साथ ही उन्हें इस बात का एहसास कराएं कि अपनी गलती का भुगतान वे स्वयं ही करेंगे। ऐसे में बच्चे को अपनी गलतियों से सीख मिलेगी। इस तरीके से बच्चों को अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास होगा। साथ ही वह भविष्य में सही गलत के बीच फर्क कर पाएंगे। 5. बच्चों के प्रति अपना बर्ताव बदलें जब भी आपका बच्चा गलती करे तो इस बात का उसे एहसास कराएं कि आप उनकी हरकत से नाराज़ हैं। कुछ समय के लिए आप अपने बर्ताव से उन्हें बताने की कोशिश करें जैसे जिस काम में हर रोज़ आप उनकी मदद करते हैं उस दिन वह न करें। ऐसे में आपका बच्चा दूसरों की भावनाओं की कद्र करना सीखेंगे। 6. उन्हें विकल्प दें अपने बच्चों को विकल्प दें। उन्हें अपने फैसलों में शामिल करें। इस तरह वे सही तरीके से सोच पाने में सक्षम हो जाएंगे यानी उनकी बातों में कुछ तर्क होगा।उदाहरण के तौर पर यदि वे जन्मदिन से पहले किसी तोहफे की मांग करें तो उन्हें समझाने का प्रयास करें कि यदि वे जन्मदिन से पहले ही अपना तोहफा ले लेंगे तो उन्हें उस दिन कुछ भी नहीं मिलेगा। इससे आपका बच्चा यह समझ पाएगा कि ज़रूरी नहीं है हर बार उसकी मांगे पूरी की जाए। 7. बच्चों को कुछ कार्य सौंपे जब आपका बच्चा बोर होने लगता है तो ऐसे में वे आपको कई तरीकों से या कहें अपने नखरों से आपको परेशान करने लगता है। यदि आपके सामने ऐसी परिस्थिति आती है तो आप अपने बच्चों को अपने लिए कुछ करने को कहें। इस तरह से वे अपनी ऊर्जा को रचनात्मक तरीके से प्रयोग करना सीखेंगे। 8. उदाहरण देकर बच्चों को समझाएं अपने बच्चे को यह समझाने का प्रयास करें कि उनके बुरे बर्ताव का असर उनके पेरेंट्स पर भी पड़ता है। साथ ही ऐसे बच्चों को लोग नापसंद करते हैं। 9. अपने बच्चे की नकल करें यह सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन जब भी आपका बच्चा नखरे दिखाए आप भी नखरे दिखाना शुरू कर दें जैसे अगर आपका बच्चा आपकी बात नहीं मान रहा और आपका काम करने से मना कर रहा है तो आप भी उसकी बात न मानें। पहले उससे अपनी बात मानवाएं। 10. बच्चों के अच्छे बर्ताव को सराहें अपने बच्चों की अच्छी आदतों की तारीफ़ करना कभी न भूलें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा साथ ही उनके बुरे व्यवहार में भी सुधार आएगा।

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