
मानसिक सेहत से संबंधित समस्याओं का महिलाओं और पुरुषों पर कई तरह से प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर घबराहट, अवसाद और घबराहट महिलाओं में ज्यादा होते हैं। कुछ खास परिस्थितियां हैं जिनसे केवल महिलाएं ही प्रभावित होती हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ महिलाएं हॉर्मोन के बदलाव के चलते प्रसव से पूर्व निराश, डिसरप्टिव मूड डिस्रेगुलेशन डिस्ऑर्डर, प्रीमेनोपॉज़ से संबंधित अवसाद जैसे मनोविकार से ग्रस्त हो जाती हैं। शोध के अनुसार महिलओं और पुरुषों में अन्य मानसिक विकार जैसे, सिज़ोफ़्रेनिया और बाइपोलर डिस्ऑर्डर होने की दर में अंतर नहीं है। लेकिन महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले कुछ लक्षण बहुत ज्यादा देखने को मिल सकते हैं क्योंकि बीमारी के बढ़ने के तरीके पर लिंग का प्रभाव पड़ सकता है, महिलाओं में मानसिक सेहत के लक्षण अलग अलग तरह से देखने को मिल सकते हैं।
महिलाओं का खराब मानसिक स्वास्थ्य और तनाव उन्हें नीचे दिए तरीकों से नुकसान पहुंचा सकता है-
· कार्यक्षेत्र में क्षमता और उत्पादक्ता
· खुद के काम के प्रति प्रतिबद्धता
· सहकर्मियों के साथ संचार
· फ़िजिकल फ़िटनेस और सामान्य गतिविधियां
महिलाओं में मानसिक समस्या या स्थिति जैसे घबराहट या अवसाद का पता लगाना उस महिला के लिए भी कठिन है जो उससे जूझ रही है। इस कारण, मानसिक सेहत से संबंधित समस्याओं से जूझ रही महिलाओं का सहयोग करना चाहिए या फिर उन्हें अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए प्रोत्साहित करते रहना चाहिए, इससे उनपर व्यक्गित तौर पर और कार्यक्षेत्र में गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कार्यक्षेत्र में मानसिक सेहत से संबंधित समस्या को पहचानने के लिए व्यक्ति को कुछ लक्षणों पर गौर करते रहना चाहिए जैसे असामान्य थकावट, जल्दी जल्दी (और बड़ी) भूल करना, अलगाव, टालमटोल और यहां तक कि अनियमित व्यवहार।
महिलाएं और मानसिक सेहत के विषय पर बहुत ज्यादा चर्चा होती है। लेकिन ज्यादातर जगहों पर इसे कम पहचाना गया। बहुत सी मानसिक बीमारियां और स्थिति महिला और पुरुष दोनों को प्रभावित करती है। हालांकि, महिलाओं में मानसिक सेहत के लक्षण भिन्न हो सकते हैं। बहुत से ऐसे लक्षण हैं जो महिला की खराब मानसिक सेहत की ओर इशारा करते हैं, जैसे,
· लगातार उदासी या लाचारी का भाव
· शराब और/या ड्रग की लत
· सोने या भोजन करने के नियम का सख्ती से पालन करना
· भूख और/या वजन में बदलाव
· ऊर्जा में कमी या थकान
· बहुत ज्यादा घबराहट या डर
· ऐसी चीज सुनना या अहसास करना जो मौजूद न हो
· बहुत ज्यादा भावनात्मक उतार चढ़ाव
· अनजाना दर्द, सिर दर्द, पेट की समस्याएं
· चिड़चिड़ापन
· सामाजिक अलगाव
· आत्महत्या के ख्याल आना
महिलाओं की मानसिक सेहत का पता लगाए जाने पर उनका संपूर्ण उपचार संभव है। व्यक्तिगत या सामूहिक थेरेपी प्राप्त करने से उन तमाम लोगों की मदद हुई है जिनमें मानसिक सेहत से संबंधित समस्या डाएग्नोस हुई, और उपचार से वे ठीक और मजबूत हो सके। कई कारगर थेरेपी की विकल्प उपलब्ध हैं। व्यक्ति उपचार चुन सकता है या ऐसे कई उपचार को मिक्स कर सकता है जिनसे उन्हें फ़ायदा मिल सके, ऐसा कोई एक भी उपचार नहीं है जो हर व्यक्ति पर कारगर हो।
योग्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक द्वारा महिलाओं की मानसिक सेहत का थेरेपी द्वारा प्रबंधन करने को साइकोथेरेपी कहते हैं। साइकोथेरेपी व्यक्ति की सेहत में सुधार लाने के उद्देश्य से उसके विचारों, भावनाओं और कार्यों का परीक्षण करती है। साइकोथेरेपी के साथ दवाओं का उपचार सबसे कारगर तरीका है। बिहेविरल थेरेपी, सिस्टेमेटिक डीसेंसिटाइजेशन, डायालेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी वगैरह कुछ उदाहरण हैं।
मानसिक बीमारियां केवल दवाओं से पूरी तरह ठीक नहीं की जा सकतीं। यह लक्षणों को नियंत्रित करने के काम आ सकती हैं। कभी कभी, दवाओं के साथ काउंसलिंग की मदद से सबसे आसानी से ठीक हुआ जा सकता है।
केस मैनेजर की मदद से, व्यक्ति केस मैनेजमेंट प्लान को एक साथ करते हुए किसी व्यक्ति के लिए महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत कर सकता है। केस मैनेजर की मदद से पुनर्वास को बढ़ावा देने के कई तरीकों का मूल्यांकन किया जा सकता है, योजना बनाई जा सकती है और कार्यवाही की जा सकती है।
कभी कभी, व्यक्ति पर बेहतर तरीके से ध्यान देने, डाएग्नोस करने, और/या जरूरत के अनुसार दवाओं को एडजस्ट करने के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है।
सपोर्ट नेटवर्क लोगों का समूह है जो उपचार के समान उद्दश्य से एक दूसरे को प्रोत्साहित करते रहते हैं। इन सहयोगी समूहों में विशेषज्ञों की जगह ऐसे लोग होते हैं जिनके आगे समान परिस्थितियां आ चुकी हैं।
सीएएम या कॉम्पलीमेंट्री या एल्टर्नेटिव मेडिसिन वह प्रक्रिया होती है जो सामान्य तौर पर चिकित्सकीय उपचार की मुख्य धारा में जल्दी इस्तेमाल नहीं की जाती। महिलाओं की मानसिक सेहत के लिए कैम को पारंपरिक चिकित्सकीय उपचार के स्थान पर या उसके साथ प्रयोग किया जा सकता है।
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सेल्फ़ हेल्प प्लान की मदद से व्यक्ति उपायों को व्यवहार में लाकर अपनी बीमारी को ठीक कर सकता है। इसमें रिकवरी को संबोधित करना, ट्रिगर का प्रबंधन, या लक्षणों का उपचार शामिल हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे मानसिक सेहत से संबंधित समस्या है तो पारिवारिक फ़िजीशियन से बात करना बेहतर है। हालांकि, इससे डर लग सकता है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने पाया कि अपने चिकित्सक से बात करने और उनसे भरपूर सहयोग प्राप्त करने से उनके जीवन और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आया।
References
1. Malhotra S, Shah R. (2015). Women and mental health in India: An overview. Indian J Psychiatry.
2. Herrman H. (2016) Improving the mental health of women and girls: psychiatrists as partners for change. World Psychiatry.
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Hello friends... Dr ne mujhe bola he 12 april se 15 april tak delivery ho jani chahiye baki bache ko prblm ho sakti he... Par bache ne head niche fix hi nai kra to bachedani ka muh kese khule.. apme koi he jiski sath ye prblm hui ho...!!
Hello mom's mera 6 month chsl rha h kl maine thoda wajan utha liya tha tkriban 10 kg k lgbhg to ky mere bachche ko koi problem to nhi n hogi
Hello moms meri delivery ko 4 month ho gye h mujhe feb me halki bleeding hui thi march me nahi hui fir april me start ho gaye kya ye normal h plzzz reply me
Hello sisters please meri ultrasound report dekhkar bataiye ki sab Kuch hai .... our meri pregnancy ko kitne din ho gay me bahut confused Hu ....mere hisaab se 7th month abhi start hua hai doctor ne Bola hai ki 7 month complete hone wala hai ..... please help me
Hlw mom's Mera baby rat bilkul bhi nahi sota aur din m sota h kyaa kru bhot rota h
Your body needs extra nutrition this trimester - these can help.




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