
सारांश


कभी-कभी, लोगों को इनर थाई चफ़िंग हो जाती है। यह तकलीफ़देह और परेशान करने वाली हो सकती है। ऐसा थाई के दोनों ओर की स्किन के बीच में रगड़ की वजह से होता है।
इस रगड़ की वजह से स्किन का सरफ़ेस खुरदरा हो जाता है और खुजली होने लगती है। ज़्यादातर मामलों में, ऐसा दौड़ने या चलने के दौरान होता है। इसकी वजह से थाई के बीच में लगातार रगड़ होती है।
हालांकि, यह दोनों थाई के लंबे समय तक दबे रहने पर भी हो सकता है। यहां हम वजहों, लक्षणों, इलाज और इसे होने से रोकने के तरीके के बारे में बात करेंगे।
इनर थाई की चफ़िंग या इनर थाई चफ़िंग एथलीटों और फ़िटनेस का ध्यान रखने वाले लोगों को होने वाली एक आम समस्या है। थाई के बीच रगड़ से जलन और दर्द होता है।
तंग कपड़े पहनने वाले लोगों में इसकी ज़्यादा संभावना होती है। मेडिकल में इस स्थिति को टिनिआ क्रूस या जॉक इच कहते हैं। कुछ मामलों में, लंबे समय तक इनर थाई चफ़िंग से दूसरे संक्रमण भी हो सकते हैं।
कई मामलों में, इनर थाई की स्किन रूखी हो सकती है। इससे रगड़ बढ़ती है और रगड़ से छीलने की संभावना बढ़ जाती है। दूसरे मामलों में, एक्जिमा, सोरायसिस, या स्किन पर दूसरी तरह की तकलीफ़ जैसी स्थितियों में स्किन पर चफ़िंग होने का खतरा बढ़ जाता है।
· तंग कपड़े (Tight clothing): बहुत तंग कपड़े पहनने से रगड़ बढ़ सकती है और इनर थाई चफ़िंग हो सकती है ।
यह उन लोगों के लिए ख़ासतौर पर सच है जो ऐसे कपड़े पहनते हैं जो थाई के आसपास कसकर फिट होते हैं, जैसे लेगिंग और साइकलिंग शॉर्ट्स।
· नमी (Moisture): इससे चफ़िंग हो सकती है, क्योंकि स्किन गीली होने पर रगड़ के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाती है। पसीने वाले या गीले कपड़ों में ज़्यादा देर बैठने से नमी हो सकती है।
· ज़्यादा वजन होना (Being overweight): आदमियों और औरतों दोनों में ज़्यादा वजन होना इनर थाई चफ़िंग की एक ख़ास वजह है। ज़्यादा वजन होने से थाई पर ज़्यादा दबाव पड़ सकता है। इसी वजह से रगड़ और चफ़िंग बढ़ती है।
· गलत लुब्रिकेशन (Incorrect lubrication): कुछ लोग ऐसे स्किन केयर प्रॉडक्ट का इस्तेमाल करते हैं जो उन जगहों के लिए ठीक नहीं हैं, जैसे कि डियोड्रेंट या एंटीपर्सपिरेंट। इससे स्किन को नुकसान हो सकता है और रगड़ बढ़ सकती है। इससे चफ़िंग की संभावना बढ़ जाती है।
· चलना, दौड़ना या साइकिल चलाना (Walking, running or cycling) : ये एक्टिविटी इनर थाई चफ़िंग की एक ख़ास वजह हो सकती हैं। यह ख़ासकर उन लोगों के लिए है जो सही कपड़े नहीं पहनते हैं या रगड़ को कम करने के लिए सही प्रॉडक्ट का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
· स्किन की स्थिति (Skin conditions): एक्जिमा और सोरायसिस जैसी स्थितियों से स्किन पर चफ़िंग का खतरा बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इन स्थितियों की वजह से स्किन रूखी और ज़्यादा संवेदनशील हो सकती है। इससे चफिंग का खतरा बढ़ जाता है।
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इनर थाई चफ़िंग का सबसे आम लक्षण थाई के किनारे पर चकत्ता होना है। यह चकत्ता लाल, खुजली वाला और दर्दनाक हो सकता है। इससे जलन या स्किन भी कच्ची हो सकती है।
इनर थाई में चफ़िंग के दूसरे आम लक्षणों में शामिल हैं:
· खुजली
· जलन
· लाली
· फफोले
· चकत्ता
· हाइपरपिग्मेंटेशन
· फोड़े
· सूजन
· रिसाव
· दर्द
इनर थाई चफ़िंग का इलाज आमतौर पर उसके होने की वजह पर निर्भर करेगा। कोई भी इलाज करने से पहले, उस जगह को बड़े पैमाने पर साफ करें।
नीचे इनर थाई चफ़िंग के इलाज और रोकथाम करने के कुछ सबसे आम तरीके दिए गए हैं:
स्किन केयर प्रॉडक्ट (Skin care products): स्किन को आराम पहुंचाने और ठीक करने में मदद के लिए कई स्किनकेयर प्रॉडक्ट मौजूद हैं। इन प्रॉडक्ट में थाई पर इस्तेमाल के लिए ख़ासतौर से तैयार किए गए लोशन, क्रीम या तेल शामिल हो सकते हैं।
पेट्रोलियम जेली (Petroleum jelly): थाई चफ़िंग के इलाज और रोकथाम में मदद के लिए, अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ डर्मेटोलॉजी (एएडी) पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगाने की सलाह देती है। यह परत खुजली वाली स्किन और किसी भी फफोले से बचाने का काम करती है। यह रिकवरी प्रोसेस में भी तेज़ी लाती है।
खुजली के उपाय (Itching remedies): अगर इनर थाई चफ़िंग से जुड़ी खुजली असहनीय हो जाती है, तो कुछ और तरीके इस लक्षण से राहत दिला सकते हैं। इनमें ओवर-द-काउंटर के एंटीहिस्टामाइन लेना, उस जगह पर एक ठंडी सिकाई करना, एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करना या ओटीसी टोपिकल क्रीम लगाना शामिल है।
पाउडर (Powders): टैल्कम पाउडर, बेबी पाउडर, कॉर्नस्टार्च और अरारोट पाउडर को इनर थाई पर लगाने से चफ़िंग को रोकने में मदद मिल सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये पाउडर ज़्यादा नमी को अवशोषित कर सकते हैं, जिससे थाई के बीच कम रगड़ होती है।
स्किन के दूसरे इलाज (Other skin treatments): इनर थाई चफ़िंग के दूसरे इलाजों में से एक टॉपिकल एंटीबायोटिक लगाना, एक सॉफ़्ट बैन्डेज़ लपेटना, और नमी सोखने वाले कपड़े पहनना शामिल हो सकता है।
इनर थाई चफ़िंग के रिस्क से बचने या कम करने के लिए नीचे दिए गए कदम उठाए जा सकते हैं:
· हाइड्रेटेड रहना (Staying hydrated): चफ़िंग से बचने और आरामदायक रहने के लिए सही हाइड्रेशन लेवल बनाए रखना ज़रूरी है। हाइड्रेटेड रहने का मतलब है पूरे दिन खूब पानी पीना। फ़िजिकल एक्टिविटी करने पर इसकी ख़ासतौर से ज़रूरत पड़ती है।
· ढीले-ढाले कपड़े पहनना (Wearing Loose-Fitting Clothing): बहुत तंग कपड़े पहनने से थाई पर ज़्यादा दबाव पड़ सकता है, जिससे चफ़िंग का खतरा बढ़ जाता है।
ख़ासकर जब एक्सरसाइज या दूसरी फ़िजिकल एक्टिविटी कर रहे हों तो ढीले-ढाले कपड़े पहनना चुनें।
· वजन कम करना (Losing weight): कुछ किलो वजन कम करना सिर्फ़ आकर्षक बनने का एकमात्र तरीका नहीं है, बल्कि साथ ही कई दूसरे फ़ायदे भी दे सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी का वजन सटीक है, तो वह इनर थाई चफ़िंग की चपेट में आने से बच सकते हैं।
Reference
1. Mazhar M, Simpson M, Marathe K. (2019). Inner thigh friction as a cause of acne mechanica. Pediatr Dermatol. NCBI
Inner Thigh Chafing: Causes, Symptoms & Treatment in English, Inner Thigh Chafing: Causes, Symptoms & Treatment in Tamil, Inner Thigh Chafing: Causes, Symptoms & Treatment in Telugu, Inner Thigh Chafing: Causes, Symptoms & Treatment in Bengali
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