
माता पिता के लिए बच्चे ईश्वर का दिया हुआ सबसे अनमोल तोहफा होते हैं। उनके जन्म के बाद उनकी किलकारियों से घर का पूरा वातावरण खुशनुमा बन जाता है। उनकी छोटी छोटी हरकतें इतनी प्यारी होती हैं जिसे देख सभी का मन प्रफुल्लित हो उठता है। लेकिन केवल माँ बनना ही काफी नहीं होता अपने शिशु की सही देखभाल करना भी बेहद ज़रूरी होता है ताकि वह स्वस्थ रहें। उनकी त्वचा इतनी नाज़ुक होती है कि अगर सही तरीके से ध्यान न दिया जाए तो कई बार उनके शरीर पर दाने निकल आते हैं या फिर उनकी त्वचा लाल होने लगती है जो कई बार उनके लिए परेशानी का कारण बन जाती है। ठीक इसी प्रकार बच्चों को गोद में लेने का भी सही तरीका मालूम होना चाहिए। गलत तरीके से बच्चों को गोद में उठाने से उनकी हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जो किसी भी तरह से उनके लिए ठीक नहीं होता। इतना ही नहीं बच्चे को स्तनपान कराना भी आसान काम नहीं होता। दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार दिलाना भी बहुत ज़रूरी होता है ताकि उसे अपच न हो। बच्चे के डकार लेने के बाद माँ भी राहत की सांस लेती है लेकिन बच्चे को डकार दिलाने के भी कुछ सही तरीके होते हैं। इसके अलावा बच्चा जब डकार लेता है तो उसके पीछे एक उद्देश्य होता है जिसके बारे में कई माता पिता को जानकारी नहीं होती। छोटे छोटे डकार का मतलब होता है कि दूध पीते वक़्त बच्चे ने अतिरिक्त हवा निगल ली होती है वह डकार की मदद से बाहर निकल गयी है, इससे बच्चे को आराम भी मिलता है। डकार लेने से बच्चे की पाचन शक्ति अच्छी होती है साथ ही उसके पेट में और भोजन के लिए जगह भी बनती है। बच्चे को दिन भर में हर छोटे छोटे आहार के बाद डकार ज़रूर दिलवाएं। यह बच्चे के लिए बेहद लाभदायक होता है। ख़ास तौर पर उन बच्चों के लिए जो दूध पीने के फौरन बाद उल्टी कर देते हैं और जिनमें एसिड संबंधित रोग के लक्षण होते हैं। हालांकि यह ज़रूरी नहीं कि आपका बच्चा डकार लेगा ही। कई बच्चे बहुत डकार लेते हैं तो वहीं कुछ बच्चे बहुत मुश्किल से डकार ले पाते हैं तो कुछ बच्चे तो बिल्कुल ही नहीं लेते। इसके लिए आपको डकार दिलाने के सही तरीकों के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि आप अपने बच्चे को स्वस्थ रख सकें। तो आइए जानते हैं बच्चे को डकार दिलाने के सही तरीके के बारे में। नरम मुलायम तौलिये का इस्तेमाल करें सबसे पहले आप कोई नरम कपड़ा या तौलिये से अपना कन्धा या फिर अपनी गोद को ढ़क लें। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे डकार दिलाना चाहते हैं कंधे पर या फिर गोद में। कपड़े का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि अगर डकार लेते वक़्त बच्चे के मुँह से थोड़ी बहुत उल्टी निकल आए तो ऐसे में आपके कपड़े ख़राब न हो। बच्चे को अपनी गोद में आराम महसूस कराएं दूध पिलाने के तुरंत बाद बच्चे को ज़्यादा हिलाना डुलाना नहीं चाहिए क्योंकि कई बार ऐसी परिस्थिति में बच्चा उल्टी करने लगता है। इसलिए थोड़ी देर के लिए उसे अपनी गोद में आराम से लेटे रहने दें। फिर बड़े ही प्यार से उसे अपने कंधे के बल लेटा दे। ध्यान रहे बच्चे की ठोड़ी आपके कंधे पर होनी चाहिए और उसका पेट नहीं दबना चाहिए। अब धीरे धीरे हल्के हाथों से उसकी पीठ को ऊपर से नीचे की ओर सहलाते जाइये। ऐसा आप एक जगह बैठकर या फिर चलते चलते भी कर सकते हैं। बच्चे को गोद में लेटा कर कंधे के अलावा आप बच्चे को अपनी गोद में उल्टा लेटाकर भी डकार दिलवा सकते हैं। इसके लिए आप उसे उल्टा लेटाकर हल्के हाथों से उसकी पीठ रगड़े या फिर थपथपाएं। डकार दिलाने का यह तरीका आपको सबसे कठिन लगेगा लेकिन आप परेशान न हों क्योंकि अभ्यास करते करते आप धीरे धीरे इसमें माहिर हो जाएंगे। बच्चे को 2 बार डकार दिलवाएं मां का दूध पीने वाले बच्चों के मुकाबले बोतल से दूध पीने वाले बच्चे अतिरिक्त हवा निगल लेते हैं। ऐसे में उनके पेट में गैस बनना आम बात है। इसके लिए ज़रूरी होता है कि ऐसे बच्चों को कम से कम दो बार डकार दिलाया जाए एक दूध पीने से पहले और दूध पीने के बाद क्योंकि अगर दूध पीते वक़्त बच्चा ज़्यादा हवा निगल लेगा तो वह पर्याप्त मात्रा में दूध का सेवन नहीं कर पाएगा। साथ ही वह उलझन भरा भी महसूस करेगा। स्तनपान करते वक़्त यदि आपको लगे कि आपका बच्चा थोड़ी परेशानी में है तो फौरन उसे डकार दिलवाएं, हो सकता है वह गैस की वजह से दिक्कत महसूस कर रहा हो। बोतल से दूध पीने वाले बच्चों को दूध पीने के दौरान थोड़ी थोड़ी देर में डकार दिलाना ज़रूरी होता है। स्तनपान कराने वाली माताओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यदि उनका बच्चा दूध पीते हुए रोने लगे या फिर उलझन महसूस करे तो फ़ौरन अपने दूसरे स्तन से उसे दूध पिलाएं। दूध पीते पीते यदि आपका बच्चा सोने लगे तो आप डकार को लेकर ज़्यादा चिंतित न हों। 4 से 6 महीने के बाद आपका बच्चा अतिरिक्त हवा निगलना कम कर देता है इसलिए हमेशा बच्चे के हावभाव और उसकी आवश्यकता अनुसार ही उसे डकार दिलवाएं।




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