
ब्रेस्टफ़ीड कराते हुए फूड आइटम्स की एक लिस्ट ऐसी भी है जिससे दूरी बना (Foods to Avoid While Breastfeeding in Hindi ) लेना ही आपके लिए बेहतर है. अब आप पूछेंगे ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि इन फूड आइटम्स की प्रकृति कुछ इस तरह की होती है कि यह आपके शरीर में त्रिदोष (कफ़, वात, पित्त का इंबैलेंस) पैदा कर सकते हैं जो आपके दूध के ज़रिये बच्चे को भी बीमार कर सकता है. इसके अलावा इनमें से कुछ में मौजूद टॉक्सिंस और हैवी मेटल्स आपके बच्चे को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं.
आइये जानते हैं कि दूध पिलाने वाली माँ को क्या-क्या नहीं खाना चाहिए या कम खाना चाहिए!
अधिक मसालेदार भोजन करने से माँ और बच्चे दोनों को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रॉब्लम हो सकती है. मसालों का तेज़ फ्लेवर अक्सर ब्रेस्टमिल्क के स्वाद पर भी असर डालता है जिस वजह से बच्चे कम दूध पीना शुरू कर देते हैं. साथ ही कुछ बच्चे मसालेदार भोजन के प्रति अधिक सेंसिटिव होते हैं जिससे उनमें इरिटेशन या डाइजेस्टिव इशूज़ हो सकते हैं.
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हालाँकि, खट्टे फलों से ब्रेस्ट फ़ीडिंग के दौरान कोई विशेष समस्या नहीं होती है लेकिन कुछ बच्चे एसिडिक फूड्स के प्रति सेंसिटिव होते हैं जिससे उनको डायपर रैश या चिड़चिड़ाहट हो सकती है. अपने बच्चे के रिएक्शन पर नज़र बनाए रखें और किसी असामान्यता के दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें.
ब्रेस्टफ़ीडिंग मदर्स को बहुत ज़्यादा कॉफी पीने से भी परहेज़ करना चाहिए क्योंकि इससे कैफीन ब्रेस्ट मिल्क में जा सकता है और आपके बच्चे की नींद का पैटर्न ख़राब कर सकता है. इससे बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है. साथ ही, ज़्यादा कैफीन के सेवन से माँ को डिहाइड्रेशन भी हो सकता है, जो ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान हानिकारक है.
ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान चाय का सेवन भी कम से कम करना चाहिए क्योंकि चाय में भी कैफ़ीन होता है, जो ब्रेस्ट मिल्क से होता हुआ बच्चे की नींद के पैटर्न और ओवर ऑल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है. अधिक कैफीन के सेवन से छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी और नींद ख़राब होने जैसी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं.
ब्रेस्टफ़ीडिंग मदर्स को हाई मरक्यूरी वाली मछ्ली का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि मरक्यूरी के संपर्क में आने से बच्चे के न्यूरो सिस्टम को नुकसान हो सकता है. शार्क, स्वोर्डफ़िश और किंग मैकेरल जैसी प्रजातियाँ ऐसी ही कुछ मछलियाँ हैं. इसके बजाय आप सैल्मन, ट्राउट और सार्डिन जैसी लो मरक्यूरी मछलियों का सीमित मात्रा में सेवन करें.
ब्रेस्टफ़ीडिंग को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स को गड़बड़ाने की क्षमता रखने के कारण पुदीने के सेवन से भी आप कुछ समय तक थोड़ी दूरी बना लें क्योंकि ये आपके दूध के प्रोडक्शन को घटा सकता है. साथ ही, ब्रेस्टमिल्क के ज़रिए यह बच्चों में कई बार डाइजेस्टिव इशूज़ भी पैदा करता है जिस वजह से पेट का दर्द या पेट खराब हो सकता है.
ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान हाईली प्रोसेस्ड फूड्स से बचना भी ज़रूरी है क्योंकि उनमें बहुत ज़्यादा चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट्स होते हैं जो ब्रेस्ट मिल्क से होते हुए बच्चे तक पहुँचते हैं. इससे बच्चे के लिए ज़रूरी पोषण और फाइबर की कमी हो सकती है, इससे ब्रेस्ट मिल्क की क्वालिटी और ओवर ऑल न्यूट्रिएंट्स पर भी असर पड़ता है.
ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान बहुत ज़्यादा चॉकलेट खाने से आपकी बॉडी में कैफीन का लेवल बढ़ सकता है क्योंकि चॉकलेट में भी थोड़ी मात्रा में कैफ़ीन होता है. अधिक कैफ़ीन का सेवन बच्चे की नींद को ख़राब करने के साथ ही उसे चिड़चिड़ा भी बनाता है. साथ ही, चॉकलेट में मौजूद कंपाउंड्स के प्रति कुछ बच्चे सेंसेटिव होते हैं जिससे डाइजेस्टिव समस्याएँ या एलर्जी तक हो सकती है.
हालाँकि, ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान लहसुन से परहेज़ करना ज़रूरी नहीं है और मॉडरेट क्वांटिटी में कई माँएँ इसका सेवन बिना किसी समस्या के करती हैं, लेकिन कुछ बच्चे लहसुन के प्रति भी सेंसेटिव होते हैं और ऐसे शिशुओं में यह गैस या दाने या स्किन में रैशेस जैसी दिक्कतों का कारण बन सकता है इसलिए लहसुन का सेवन करते हुए अपने बच्चे में इसके रिएक्शन पर नज़र रखें.
एस्पार्टेम, सुक्रालोज़ और सैकरिन जैसे कृत्रिम स्वीटनर ब्रेस्ट मिल्क से होते हुए बच्चे तक पहुँचते हैं और उसके टेस्ट बड्स पर असर डालते हैं. बच्चे के विकसित होते हुए डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए भी ये सुरक्षित नहीं होते इसलिए इनको लेकर सावधानी बरतनी चाहिए.
मूँगफली एक बहुत ही आम एलर्जी पैदा करने वाला फूड आइटम है, और अगर आपके फैमिली में पीनट एलर्जी की हिस्ट्री है या माँ को ख़ुद इससे एलर्जी है, तो बच्चे के पीनट एलर्जी के प्रति सेंसेटिव होने की संभावना रहती है. ऐसे में मूँगफली से परहेज़ करना चाहिए.
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डेयरी प्रोडक्ट्स में गाय के दूध में (casein and whey) पाए जाने वाले प्रोटीन को पचाना कुछ बच्चों के लिए मुश्किल होता है. इससे उन्हें पेट का दर्द, गैस, इंडाइज़ेशन या अन्य पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं. कुछ बच्चों को मिल्क प्रोटीन से भी एलर्जी होती है जिससे रैशेज़ और पॉट्टी में खून आने जैसे गंभीर लक्षण तक दिख सकते हैं. ऐसे में, माँओं को अपनी डाइट से डेयरी प्रोडक्ट्स को पूरी तरह से हटा देना चाहिए.
सोया भी ऐसा ही एक एलर्जेन है और जो बच्चे गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन के प्रति सेंसेटिव होते हैं वो सोया प्रोटीन पर भी अक्सर रिएक्ट करते हैं. इसलिए, यदि डेयरी बंद करने से बच्चे को आराम ना मिले तो माँ की डाइट से सोया को भी हटा देना चाहिए.
चेरी और आलूबुखारा सभी व्यक्तियों में एलर्जी पैदा नहीं करते हैं लेकिन उनकी नेचुरल शुगर और फाइबर कुछ बच्चों में डाइज़ेशन संबंधी गड़बड़ी पैदा कर सकती है. अगर माँ के इन्हें खाने पर बच्चे को गैस या दस्त होने लगें तो इन्हें कम से कम मात्रा में ही खाना चाहिए.
अंडे, फिश, शैलफिश, गेहूँ और मेवे भी कुछ ऐसे एलर्जेनिक फूड आइटम्स हैं जिन्हें सीमित मात्रा में खाना चाहिए. अगर परिवार में इन चीजों से फूड एलर्जी की हिस्ट्री है तो माँ को इनका सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए.
अल्कोहल, ब्रेस्ट मिल्क से बच्चे तक पहुँचता है और उसकी ग्रोथ और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है. ब्रेस्टफ़ीडिंग के दौरान शराब का सेवन ना करें और अगर आप इसके आदी हैं तो बेहतर होगा कि इसे बेहद सीमित मात्रा में लें और सेवन के तुरंत बाद कुछ समय तक ब्रेस्टफ़ीड कराने से बचें.
बच्चे के पोषण की पहली ज़िम्मेदारी उसकी माँ की होती है और ऐसे में माँ को बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण के अनुरूप भोजन करना चाहिए. कुछ समय तक अपनी मनपसंद चीजों को न खाने का रूल फॉलो करने से अगर भविष्य में बच्चे के लिए एक मज़बूत शरीर की नींव डालने में मदद मिलती है तो इससे बड़ी उपलब्धि एक माँ के लिए और क्या होगी!
1. Karcz K, Lehman I, Królak-Olejnik B. (2020). Foods to Avoid While Breastfeeding? Experiences and Opinions of Polish Mothers and Healthcare Providers. Nutrients.
2. Jeong G, Park SW, Lee YK, Ko SY, Shin SM. (2017). Maternal food restrictions during breastfeeding. Korean J Pediatr.
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