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Adenomyosis vs Endometriosis in Hindi | फर्टिलिटी पर कैसे होता है एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस का असर?

Health & Wellness
Written by - Kavita Upretyअंतिम अपडेट: May 29, 2026
Adenomyosis vs Endometriosis in Hindi | फर्टिलिटी पर कैसे होता है एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस का असर?
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Dr. Shruti Tanwar
Medically Reviewed By
Dr. Shruti Tanwar, MBBS, MS (OBS & Gynae)verified

C-section & gynae problems · 4 years experience

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सारांश


  • एडिनोमायोसिस में एंडोमेट्रियल टिशू यूटरस की मसल्स के अंदर बढ़ते हैं जबकि एंडोमेट्रियोसिस में ये टिशू यूटरस से बाहर ओवरी, फैलोपियन ट्यूब या पेल्विक ऑर्गन्स में ग्रो करने लगते हैं.
  • दोनों ही स्थितियों के लक्षण मिलते-जुलते हैं; जैसे इरेगुलर पीरियड्स, भारी ब्लीडिंग, तेज़ क्रेम्पिंग, पेल्विक पेन, सेक्स के दौरान दर्द, और गर्भधारण में कठिनाई जो इंफर्टिलिटी का कारण बन सकती है.
  • इनके इलाज़ में पेन मैनेजमेंट, हार्मोनल थेरेपी, GnRH दवाएं, प्रोजेस्टिन थेरेपी, यूट्रीन आर्टरी एंबोलाइजेशन और गंभीर स्थिति में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी या हिस्टेरेक्टॉमी जैसे विकल्प शामिल हैं.
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फर्टिलिटी से जुड़ी हुई अधिकतर समस्याओं की जड़ में अक्सर दो मुख्य कारण निकल कर आते हैं - एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस. यह दोनों ही समस्याएँ यूट्रस की हैं और इन दोनों स्थितियों में यूट्रस की भीतरी दीवाल या सतह के टिशूज़ जिसे एंडोमेट्रियम (endometrium) कहा जाता है वह असामान्य रूप से बाहर की ओर बढ़ने लगते हैं. इससे प्रेग्नेंसी में रुकावट पैदा होती है और इंफर्टिलिटी तक हो सकती है. आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

एडिनोमायोसिस क्या होता है? (Adenomyosis in Hindi)

एडेनोमायोसिस एक ऐसी स्थिति है (adenomyosis meaning in hindi) जिसमें यूटरस की इंटरनल लाइनिंग जिसे एंडोमेट्रियम (endometrium) कहा जाता है उसके टिशूज़ बाहर की ओर बढ़ते हुए यूटरस की दीवाल में ग्रो करने लगते हैं. एंडोमेट्रियल टिशूज़ की ऐसी ग्रोथ कई तरह की जटिलताओं को जन्म दे सकती है. इसी तरह की एक और समस्या है एंडोमेट्रियोसिस. आइये जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस क्या है (endometriosis kya hai) और इसमें क्या होता है.

एंडोमेट्रियोसिस क्या होता है? (Endometriosis in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है (endometriosis in hindi) जिसमें एंडोमेट्रियम (endometrium) के टिशूज़ जो सामान्य स्थिति में गर्भाशय के अंदर रहते हैं वो यूटरस से बाहर ग्रोथ करने लगते हैं. आमतौर पर ये मिस्प्लेस्ड टिशूज़ (misplaced endometrial tissue) पेल्विक एरिया में बढ़ते हैं लेकिन कई बार ये ओवरीज़, फैलोपियन ट्यूब, यूटरस की बाहरी दीवार व आंतों के अलावा अन्य पेल्विक ऑर्गन्स से जुड़ जाते हैं और उनमें ग्रोथ करने लगते हैं.

एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस में क्या अंतर होता है? (Difference between endometriosis and adenomyosis in Hindi)

आइये अब समझते हैं कि ये दोनों स्थितियाँ (difference between endometriosis and adenomyosis) एक दूसरे से कैसे अलग हैं. हालाँकि ये दोनों ही यूटरस से जुड़ी हुई असामान्यताएँ हैं लेकिन जहाँ एडेनोमायोसिस (adenomyosis) में एंडोमेट्रियल टिशू यूटरस की मसल्स के अंदर विकसित होने लगते हैं वहीं एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) में ये टिशू यूटरस से बाहर निकल कर आपके रिप्रोडक्टिव सिस्टम के अन्य अंगों; जैसे कि ओवरी या फैलोपियन ट्यूब से जुड़ के बढ्ने लगते हैं.

एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण क्या होते हैं? (Adenomyosis and Endometriosis symptoms in Hindi)

एडिनोमायोसिस को (adenomyosis in hindi) जानने के बाद अब बात करते हैं इसके कुछ ख़ास लक्षणों की!

1. इरेगुलर पीरियड्स (Menstrual abnormalities)

एडिनोमायोसिस का सबसे कॉमन लक्षण है पीरियड्स में गड़बड़ियाँ आना; जैसे कि सामान्य से लंबे पीरियड्स और भारी ब्लीडिंग होना.

2. तेज़ क्रेम्पिंग (Dysmenorrhea)

पीरियड्स के दौरान बहुत तेज़ क्रेंप्स (menstrual cramps) यानी कि पेट के निचले हिस्से में ऐंठन होना.

3. पेल्विक पेन (Chronic pelvic pain)

निचले पेट में असहनीय दर्द (pelvic pain) और बेचैनी जो मेंस्ट्रुएशन के अलावा सामान्य दिनों में भी होती हो.

4. यूटरस का बढ़ जाना (Enlarged uterus)

एंडोमेट्रियल टिशू (endometrial tissue) के असामान्य रूप से बढ़ जाने के कारण यूटरस का आकार बढ़ जाना जिसे गर्भाशय की सूजन भी कहा जाता है.

5. सेक्स के दौरान दर्द (Painful intercourse)

गर्भाशय की सूजन के कारण सेक्स संबंध बनाते हुए बेहद दर्द होना.

एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis in hindi) और एंडोमेट्रियोसिस दोनों ही यूटरस से जुड़ी हुई दिक्कतें हैं इसलिए इनके कुछ लक्षण मिलते जुलते भी हो सकते हैं. आइये जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों के बारे में.

1. पेल्विक में दर्द (Pelvic pain)

पेल्विक एरिया में बेहद तेज़ दर्द का होना जो लगातार होता रहता है और पीरियड्स के अलावा सामान्य दिनों में भी हो सकता है.

2. पीरियड्स में दर्द (Painful periods)

बेहद दर्द भरे पीरियड्स जो समय के साथ और भी ज़्यादा तकलीफ़देह होते जाते हैं.

3. पेशाब के दौरान दर्द (Painful urination)

पेट में तेज़ ऐंठन और पेशाब करने में दर्द होना. इस दर्द का ख़ास तौर पर पीरियड्स के दौरान बढ़ जाना.

4. सेक्स के दौरान दर्द (painful sexual intercourse)

सेक्स के दौरान और उसके बाद भी तेज़ दर्द होना.

5. इरेगुलर मेंस्ट्रुएशन (irregular bleeding)

मासिक धर्म के दौरान बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या फिर इरेगुलर पीरियड्स की समस्या.

6. इंफर्टिलिटी (Infertility)

और अंत में एंडोमेट्रियोसिस के कारण जो सबसे बड़ी समस्या जन्म ले सकती है वो है गर्भधारण करने में कठिनाई जो समय के साथ इंफर्टिलिटी में बदल सकती है.

आगे आपको बताएँगे एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस से फर्टिलिटी कैसे प्रभावित होती है.

एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस का फर्टिलिटी पर असर (Impact of endometriosis and adenomyosis on fertility in Hindi)

एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस दोनों ही स्थितियाँ फर्टिलिटी पर सीधा प्रभाव डालती हैं क्योंकि इनसे रिप्रोडक्टिव सिस्टम के सामान्य फंक्शन में दिक्कत आने लगती है.पहले जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस से फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है.

  1. यूटरस के बाहर एंडोमेट्रियल ग्रोथ होने से एढेशन और स्कार टिशू बनते हैं जिससे पेल्विक एरिया के ऑर्गन्स आपस में चिपक सकते हैं और फैलोपियन ट्यूब में रुकावट हो सकती है.
  2. पेल्विक ऑर्गन्स; जैसे- ओवरी, फैलोपियन ट्यूब्स, या यूटरस में स्ट्रक्चरल बदलाव आ सकते हैं जिससे एग बनना और फर्टिलाइज़ेशन होने में गड़बड़ी पैदा हो सकती है.
  3. हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ने से फर्टिलिटी और इंप्लांटेशन में रुकावट आने लगती है.
  4. एंडोमेट्रियल ग्रोथ के कारण पेल्विक एरिया में सूजन आने से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है.

अब बात करते हैं एडिनोमायोसिस से होने वाले खतरों के बारे में.

  1. एडिनोमायोसिस के कारण यूटरस के वातावरण में ऐसे गंभीर बदलाव आ सकते हैं जिनसे फर्टिलाइज़्ड़ एग के इंप्लांटेशन में रुकावट आने लगे.
  2. एडेनोमायोसिस यूटरस में संकुचन (contractions) को बढ़ा सकता है जिससे इंप्लांटेशन प्रोसेस में दिक्कत आने के साथ ही शुरुआती महीनों में मिसकैरेज (early pregnancy loss) का रिस्क भी बढ़ जाता है.
  3. एडेनोमायोसिस की समस्या मुख्य रूप से एस्ट्रोजन हार्मोन की गड़बड़ी से जुड़ी हुई है जिसकी वजह से भी फर्टिलिटी पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस का ट्रीटमेंट (Diagnosis and treatment options for endometriosis and adenomyosis in Hindi)

एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस को आपकी मेडिकल हिस्ट्री, पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic ultrasound), लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy) और एम आर आई (MRI) के द्वारा डायग्नोस किया जाता है और फिर असल स्थिति के अनुसार निम्नलिखित तरीक़ों से इलाज़ किया जाता है.

1. पेन मैनेजमेंट (Pain management)

दर्द को कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर पेन किलर दी जाती हैं.

2. हार्मोनल थेरेपी (Hormonal therapy)

मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेग्युलर करने और एंडोमेट्रियल ग्रोथ के कंट्रोल के लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स, हार्मोनल पैच, आईयूडी का प्रयोग किया जाता है.

3. गोनैडोट्रोपिन-रिलीज़िंग हार्मोन एगोनिस्ट (GnRH)

GnRH दवाएं दी जाती हैं जो एस्ट्रोजेन को दबाने और एंडोमेट्रियल ग्रोथ को रोकने में मदद करती हैं.

4. प्रोजेस्टिन थेरेपी (Progestin therapy)

प्रोजेस्टिन-ओनली दवाएँ जैसे ओरल कांट्रेसेप्टिव या इंजेक्शन से इसके लक्षणों को कंट्रोल करने और एंडोमेट्रियल ग्रोथ को कम करने में मदद मिलती है.

5. यूट्रीन आर्टरी एंबोलाइजेशन (Uterine artery embolization)

इसमें यूटरस को ब्लड सप्लाई करने वाली नसों को बाँध देते हैं जिससे एडिनोमायोसिस से प्रभावित हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाने से सूजन में कमी आती है.

6. सर्जरी (Surgery)

एंडोमेट्रियल ग्रोथ या स्कार टिश्यू को हटाने के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और गंभीर मामलों में हिस्टेरेक्टॉमी भी की जाती है.

प्रो टिप (Pro Tip)

एंडोमेट्रियोसिस या एडेनोमायोसिस दोनों ही गंभीर स्थितियाँ हैं जिनका सीधा असर आपकी फर्टिलिटी पर पड़ सकता है. हालाँकि, ऐसा ज़रूरी नहीं है कि इन से जूझ रही सभी महिलाओं को फर्टिलिटी संबंधी समस्याएँ हों और ऐसी महिलाओं का बिना किसी कठिनाई के गर्भधारण करना संभव है.

रेफरेंस

1. Harada T, Khine YM, Kaponis A, Nikellis T, Decavalas G, Taniguchi F. (2016).The Impact of Adenomyosis on Women's Fertility.

2. Szubert M, Koziróg E, Olszak O, Krygier-Kurz K, Kazmierczak J, Wilczynski J. (2021). Adenomyosis and Infertility-Review of Medical and Surgical Approaches.

3. Garavaglia E, Audrey S, Annalisa I, Stefano F, et al. (2015). Adenomyosis and its impact on women fertility. Iran J Reprod Med. Jun;13(6):327-36. PMID: 26330846; PMCID: PMC4555051.

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