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फर्टिलिटी से जुड़ी हुई अधिकतर समस्याओं की जड़ में अक्सर दो मुख्य कारण निकल कर आते हैं - एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस. यह दोनों ही समस्याएँ यूट्रस की हैं और इन दोनों स्थितियों में यूट्रस की भीतरी दीवाल या सतह के टिशूज़ जिसे एंडोमेट्रियम (endometrium) कहा जाता है वह असामान्य रूप से बाहर की ओर बढ़ने लगते हैं. इससे प्रेग्नेंसी में रुकावट पैदा होती है और इंफर्टिलिटी तक हो सकती है. आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.
एडेनोमायोसिस एक ऐसी स्थिति है (adenomyosis meaning in hindi) जिसमें यूटरस की इंटरनल लाइनिंग जिसे एंडोमेट्रियम (endometrium) कहा जाता है उसके टिशूज़ बाहर की ओर बढ़ते हुए यूटरस की दीवाल में ग्रो करने लगते हैं. एंडोमेट्रियल टिशूज़ की ऐसी ग्रोथ कई तरह की जटिलताओं को जन्म दे सकती है. इसी तरह की एक और समस्या है एंडोमेट्रियोसिस. आइये जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस क्या है (endometriosis kya hai) और इसमें क्या होता है.
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है (endometriosis in hindi) जिसमें एंडोमेट्रियम (endometrium) के टिशूज़ जो सामान्य स्थिति में गर्भाशय के अंदर रहते हैं वो यूटरस से बाहर ग्रोथ करने लगते हैं. आमतौर पर ये मिस्प्लेस्ड टिशूज़ (misplaced endometrial tissue) पेल्विक एरिया में बढ़ते हैं लेकिन कई बार ये ओवरीज़, फैलोपियन ट्यूब, यूटरस की बाहरी दीवार व आंतों के अलावा अन्य पेल्विक ऑर्गन्स से जुड़ जाते हैं और उनमें ग्रोथ करने लगते हैं.
आइये अब समझते हैं कि ये दोनों स्थितियाँ (difference between endometriosis and adenomyosis) एक दूसरे से कैसे अलग हैं. हालाँकि ये दोनों ही यूटरस से जुड़ी हुई असामान्यताएँ हैं लेकिन जहाँ एडेनोमायोसिस (adenomyosis) में एंडोमेट्रियल टिशू यूटरस की मसल्स के अंदर विकसित होने लगते हैं वहीं एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) में ये टिशू यूटरस से बाहर निकल कर आपके रिप्रोडक्टिव सिस्टम के अन्य अंगों; जैसे कि ओवरी या फैलोपियन ट्यूब से जुड़ के बढ्ने लगते हैं.
एडिनोमायोसिस को (adenomyosis in hindi) जानने के बाद अब बात करते हैं इसके कुछ ख़ास लक्षणों की!
एडिनोमायोसिस का सबसे कॉमन लक्षण है पीरियड्स में गड़बड़ियाँ आना; जैसे कि सामान्य से लंबे पीरियड्स और भारी ब्लीडिंग होना.
पीरियड्स के दौरान बहुत तेज़ क्रेंप्स (menstrual cramps) यानी कि पेट के निचले हिस्से में ऐंठन होना.
निचले पेट में असहनीय दर्द (pelvic pain) और बेचैनी जो मेंस्ट्रुएशन के अलावा सामान्य दिनों में भी होती हो.
एंडोमेट्रियल टिशू (endometrial tissue) के असामान्य रूप से बढ़ जाने के कारण यूटरस का आकार बढ़ जाना जिसे गर्भाशय की सूजन भी कहा जाता है.
गर्भाशय की सूजन के कारण सेक्स संबंध बनाते हुए बेहद दर्द होना.
एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis in hindi) और एंडोमेट्रियोसिस दोनों ही यूटरस से जुड़ी हुई दिक्कतें हैं इसलिए इनके कुछ लक्षण मिलते जुलते भी हो सकते हैं. आइये जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों के बारे में.
पेल्विक एरिया में बेहद तेज़ दर्द का होना जो लगातार होता रहता है और पीरियड्स के अलावा सामान्य दिनों में भी हो सकता है.
बेहद दर्द भरे पीरियड्स जो समय के साथ और भी ज़्यादा तकलीफ़देह होते जाते हैं.
पेट में तेज़ ऐंठन और पेशाब करने में दर्द होना. इस दर्द का ख़ास तौर पर पीरियड्स के दौरान बढ़ जाना.
सेक्स के दौरान और उसके बाद भी तेज़ दर्द होना.
मासिक धर्म के दौरान बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या फिर इरेगुलर पीरियड्स की समस्या.
और अंत में एंडोमेट्रियोसिस के कारण जो सबसे बड़ी समस्या जन्म ले सकती है वो है गर्भधारण करने में कठिनाई जो समय के साथ इंफर्टिलिटी में बदल सकती है.
आगे आपको बताएँगे एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस से फर्टिलिटी कैसे प्रभावित होती है.
एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस दोनों ही स्थितियाँ फर्टिलिटी पर सीधा प्रभाव डालती हैं क्योंकि इनसे रिप्रोडक्टिव सिस्टम के सामान्य फंक्शन में दिक्कत आने लगती है.पहले जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस से फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है.
अब बात करते हैं एडिनोमायोसिस से होने वाले खतरों के बारे में.
एडिनोमायोसिस और एंडोमेट्रियोसिस को आपकी मेडिकल हिस्ट्री, पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic ultrasound), लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy) और एम आर आई (MRI) के द्वारा डायग्नोस किया जाता है और फिर असल स्थिति के अनुसार निम्नलिखित तरीक़ों से इलाज़ किया जाता है.
दर्द को कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर पेन किलर दी जाती हैं.
मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेग्युलर करने और एंडोमेट्रियल ग्रोथ के कंट्रोल के लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स, हार्मोनल पैच, आईयूडी का प्रयोग किया जाता है.
GnRH दवाएं दी जाती हैं जो एस्ट्रोजेन को दबाने और एंडोमेट्रियल ग्रोथ को रोकने में मदद करती हैं.
प्रोजेस्टिन-ओनली दवाएँ जैसे ओरल कांट्रेसेप्टिव या इंजेक्शन से इसके लक्षणों को कंट्रोल करने और एंडोमेट्रियल ग्रोथ को कम करने में मदद मिलती है.
इसमें यूटरस को ब्लड सप्लाई करने वाली नसों को बाँध देते हैं जिससे एडिनोमायोसिस से प्रभावित हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाने से सूजन में कमी आती है.
एंडोमेट्रियल ग्रोथ या स्कार टिश्यू को हटाने के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और गंभीर मामलों में हिस्टेरेक्टॉमी भी की जाती है.
एंडोमेट्रियोसिस या एडेनोमायोसिस दोनों ही गंभीर स्थितियाँ हैं जिनका सीधा असर आपकी फर्टिलिटी पर पड़ सकता है. हालाँकि, ऐसा ज़रूरी नहीं है कि इन से जूझ रही सभी महिलाओं को फर्टिलिटी संबंधी समस्याएँ हों और ऐसी महिलाओं का बिना किसी कठिनाई के गर्भधारण करना संभव है.
1. Harada T, Khine YM, Kaponis A, Nikellis T, Decavalas G, Taniguchi F. (2016).The Impact of Adenomyosis on Women's Fertility.
2. Szubert M, Koziróg E, Olszak O, Krygier-Kurz K, Kazmierczak J, Wilczynski J. (2021). Adenomyosis and Infertility-Review of Medical and Surgical Approaches.
3. Garavaglia E, Audrey S, Annalisa I, Stefano F, et al. (2015). Adenomyosis and its impact on women fertility. Iran J Reprod Med. Jun;13(6):327-36. PMID: 26330846; PMCID: PMC4555051.
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Dr. Shruti Tanwar is well qualified and competent Obstetrician and Gynecologist with more than 4 years of experience. She is well updated and has worked and gained experience from the most prime institute of Delhi-Safdarjung Hospital. She has innate ability to listen and understand your problem and give detailed personalized advice and evidence-based treatment. She specializes in treatment for high-risk pregnancy, vaginal discharge, endometriosis, fibroids, ovarian cysts etc.
Influenza and boostrix injection kisiko laga hai kya 8 month pregnancy me and q lagta hai ye plz reply me
Hai.... My last period was in feb 24. I tested in 40 th day morning 3:30 .. That is faint line .. I conculed mylo thz app also.... And I asked tha dr wait for 3 to 5 days ... Im also waiting ... Then I test today 4:15 test is sooooo faint ... And I feel in ma body no pregnancy symptoms. What can I do .
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Your body needs extra nutrition this trimester - these can help.





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