
सारांश




प्रेग्नेंसी के दौरान हर एक महिला अपने शरीर में कुछ ख़ास बदलाव और लक्षण महसूस करती है. अगर आप भी प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (Pregnancy 3 months in Hindi) के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है. इस आर्टिकल के ज़रिये हम आपको डिटेल में बताएँगे कि प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना (Pregnancy ka teesra mahina) कैसा होता है और इस दौरान एक गर्भवती महिला को किस तरह के लक्षण (3 month pregnancy ke lakshan) महसूस होते हैं.
अगर आप या आपका कोई क़रीबी प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (12 week pregnancy in hindi) में है, तो आपको पता होना चाहिए कि इस दौरान शरीर में किस तरह के बदलाव महसूस होते हैं! तो चलिए अब जानते हैं कि एक गर्भवती महिला के लिए आख़िर कैसा होता है प्रेग्नेंसी का तीसरा माह (3rd month of pregnancy in Hindi).
प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (10 week pregnancy in Hindi) के आते-आते कई महिलाओं को कमर में दर्द भी महसूस होने लगता है. इसके अलावा, बेबी के ग्रोथ और डेवलपमेंट के कारण इस दौरान पेट में क्रैम्प, हल्का दर्द या दबाव भी महसूस होने लगता है.
प्रेग्नेंसी की तीसरे माह (9 week pregnancy in Hindi) में आपको अधिक नींद की ज़रूरत होती है. इस दौरान ख़ुद को थका हुआ महसूस करना बहुत ही आम है.
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही के अंत होने तक (Pregnancy ke teesre mahine ke lakshan) कुछ महिलाओं का पेट बाहर की ओर दिखने लगता है. हालाँकि, इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है; बल्कि इसका मतलब होता है कि गर्भ में बेबी का बेहतर विकास हो रहा है.
यूँ तो प्रेग्नेंसी के 9वें हफ़्ते से ही बेबी मूव करना शुरू कर देता है लेकिन यह मूवमेंट इतना छोटा होता है कि गर्भवती महिला इसे ठीक से महसूस नहीं कर पाती हैं. अधिकतर महिलाओं को प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने के दौरान या इस माह के अंत होने तक बेबी की मूवमेंट महसूस होने लगती है.
प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (10 week pregnancy in Hindi) में महिलाओं की त्वचा पर भी असर देखने को मिलता है. जहाँ एक ओर कुछ महिलाओं को पिंगमेंटेशन या पिंपल की शिकायत होती है, तो वहीं कुछ महिलाओं की त्वचा में निखार भी आ जाता है. इसे हम प्रेग्नेंसी का ग्लो कहते हैं.
प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (pregnancy 7 weeks symptoms in Hindi) में आपको सीने में जलन यानी कि हार्टबर्न की शिकायत हो सकती है. इसलिए जितना हो सके उतना इस दौरान मसालेदार और हैवी खाना खाने से बचें. साथ ही, क़ब्ज़ भी इस दौरान एक कॉमन समस्या हो सकती है. ऐसे में आप फाइबर रिच फूड का सेवन करके क़ब्ज़ की समस्या से राहत पा सकते हैं.
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प्रेग्नेंसी की तीसरे माह में कुछ महिलाओं को साँस लेने में दिक्कत भी होती है. ऐसा शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के चलते होता है.
चूँकि गर्भ में बेबी का विकास हो रहा होता है, इसलिए प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (10 week pregnancy in Hindi) में महिलाओं का वज़न भी बढ़ता है. हालाँकि, प्रेग्नेंसी में अधिक वज़न बढ़ना माँ और बेबी के लिए रिस्की हो सकता है. इसलिए इस दौरान अपने वज़न पर ध्यान रखें और रेगुलर चेक-अप करवाते रहें.
प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (12 week pregnancy in hindi) में सिरदर्द की शिकायत भी होने लगती है. इसलिए इस दौरान आपको बिल्कुल भी स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए. पॉजीटिव और टेंशन-फ्री रहें.
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तीन महीने की प्रेग्नेंसी में (3 mahine ki pregnancy) कई महिलाओं को शुरुआती दो महीनों की ही तरह स्तन (ब्रेस्ट) में सूजन या दर्द महसूस हो सकता है. इसके अलावा, आपको ब्रेस्ट में कुछ बदलाव भी महसूस हो सकता है. इसलिए इस दौरान आपको अपने कपड़ों का विशेष ध्यान रखना चाहिए; जैसे कि- कंफर्टेबल ब्रा और हल्के-फुल्के कपड़ें.
प्रेग्नेंसी के तीसरे माह (Pregnancy 3 months in Hindi) में एक गर्भवती महिला को हल्का बुखार भी महसूस हो सकता है. कुछ मामलों में यह बुखार अपने आप ही ठीक हो जाता है. लेकिन बार-बार बुखार महसूस होने की स्थिति में आपको अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए.
कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने (3 month pregnancy Hindi) में खुजली का अनुभव भी होता है, ख़ासकर पेट के नीचे की तरफ़. ऐसी स्थिति में आप स्ट्रेच मार्क्स क्रीम या ऑइल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपको दो फ़ायदे होंगे- पहला आपको खुजली से राहत मिलेगी, दूसरा- पेट पर दिखने वाले स्ट्रेच मार्क्स को आप शुरुआत से ही कंट्रोल कर पाएँगी.
बार-बार यूरिन पास करना भी प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही (1st trimester pregnancy symptoms in Hindi) का एक लक्षण है. दरअसल, इस दौरान आपके यूटरस और ब्लैडर पर दबाव पड़ रहा होता है, जिसके चलते आपको बार-बार यूरिन पास करने की ज़रूरत महूसस होने लगती है.
हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से प्रेग्नेंसी के तीसरे माह में गर्भवती महिला को कमज़ोरी महसूस हो सकती है. इसके कारण चक्कर आने (Dizzines) की शिकायत भी हो सकती है.
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में (First trimester pregnancy symptoms in Hindi) कई महिलाएँ मॉर्निंग सिकनेस यानी कि मतली का अनुभव करती हैं. प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के समाप्त होने तक मॉर्निंग सिकनेस कम हो जाती है. हालाँकि, कुछ महिलाएँ ऐसी भी होती हैं, जिन्हें प्रेग्नेंसी के पूरे नौ माह मॉर्निंग सिकनेस की शिकायत होती है.
प्रेग्नेंसी के तीसरे माह में (Third month of pregnancy symptoms in Hindi) में बिना किसी बात पर आप इमोशनल हो सकती हैं. इस दौरान आपका बार-बार मूड बदल सकता है.
प्रेग्नेंसी के तीसरे माह में आपको अधिक भूख लग सकती है. लेकिन ध्यान रखें इस दौरान आपको एक साथ अधिक मात्रा में खाना नहीं खाना है; बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में खाना खाते रहना है. इसके अलावा, प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही (1st trimester pregnancy symptoms in Hindi) में आपको क्रेविंग (Craving) हो सकती है. साथ ही, इस दौरान हो सकता है कि आपको अपने पसंदीदा फूड्स से प्रॉब्लम (food aversion) होने लगे.
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पैरों के तलवों और एड़ियों में सूजन आना भी प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने का लक्षण (Pregnancy ke teesre mahine ke lakshan) है. हालाँकि, अगर आपको बार-बार सूजन महसूस होती है, तो ऐसी स्थिति में आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए.
उम्मीद है कि अब आप समझ गए होंगे कि प्रेग्नेंसी का तीसरा माह (3rd month of pregnancy in Hindi) कैसा होता है और इस दौरान महिलाओं को किस तरह के लक्षण (3 month pregnancy symptoms in Hindi) महसूस होते हैं. लेकिन ध्यान रखें, हर महिला की प्रेग्नेंसी यूनिक होती है, इसलिए ऐसा बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं है कि आपको ऊपर बताए गए सभी लक्षण महसूस हो.
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प्रेग्नेंसी के तीसरे माह में (3 month pregnancy tips in Hindi) आप इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं;
1. हेल्दी डाइट फॉलो करें. मसालेदार चीज़ों और जंक फूड्स को खाने से बचें.
2. पॉजीटिव रहें और स्ट्रेस लेने से बचें. जितना हो सकें खुश रहें!
3. मदद लेने से हिचकिचाएँ नहीं. अपने पार्टनर, परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों से बात करें.
4. रेगुलर चेक-अप करवाते रहें. अपने लक्षणों पर नज़र रखें. अगर आपको ज़्यादा समस्या होती है, तो डॉक्टर से संपर्क करें.
1. Lutterodt MC, Kähler P, Kragstrup J, Nicolaisdottir DR, Siersma V, Ertmann RK. (2019). Examining to what extent pregnancy-related physical symptoms worry women in the first trimester of pregnancy: a cross-sectional study in general practice.
2. Soma-Pillay P, Nelson-Piercy C, Tolppanen H, Mebazaa A. (2016). Physiological changes in pregnancy.
3. Lee NM, Saha S. (2011). Nausea and vomiting of pregnancy.
4. Foxcroft KF, Callaway LK, Byrne NM, Webster J. (2013). Development and validation of a pregnancy symptoms inventory.
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