
सारांश




जन्म के 4 या 5 महीने के बाद शिशु किसी वस्तु का सहारा लेकर बैठना शुरू कर देता है. दरअसल, इस अवस्था तक पहुंचते-पहुंचते शिशु की पीठ और गर्दन की मांसपेशियां इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि वो बिना लुढ़के हुए सीधा रह सकता है. परंतु, उसे बिना सपोर्ट के बैठना सिखाने में समय लगता है. वैसे, इस दौरान वह धीरे-धीरे ये सीखने लग जाता है कि आराम से बैठने के लिए उसे अपनी टांगें कहां रखनी हैं. वैसे, शिशु के अंग बेहद नाज़ुक होते है ऐसे में हर माता-पिता को उसकी हर एक गतिविधि पर विशेष ध्यान रखना चाहिए. ऐसे में अगर आप अपने शिशु की सहायता करेंगी तो वो समय से पहले ही बिना सहारे के बैठना शुरू कर देगा.
जन्म के बाद बिना सहारे के मेरा शिशु कब बैठना शुरू करेगा?
शिशु के जन्म के शुरुआती 6 महीने उसके विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते है. इस दौरान वह न केवल पलटना बल्कि खुद बैठना भी सीख जाता है. वैसे तो शिशु 4 से 7 महीने के बीच बैठना सीख जाता है और 8 या 9 महीने के बाद वो बिना किसी सहारे के बैठना सीख लेता है. वैसे, ऐसा देखा गया है कि लड़कों की अपेक्षा लड़कियाँ जल्दी चलना और बैठना शुरू कर देती है.
नवजात शिशु को बैठना कैसे सिखाएं?
जब आपका शिशु अपने शरीर को हल्का-हल्का सा उठाने लगे तो उसे हल्का-फुल्का व्यायाम करवाएं, ताकि वह सक्रिय रहें. वैसे, इन निम्नलिखत तरीकों की मदद से भी आप बच्चे को बिठा सकती हैं.
वैसे तो हर बच्चे का विकास अलग-अलग तरीके से होता है. ऐसे में अगर आपके बच्चे का विकास सही से हो रहा है तो वह खुद से बैठने या हिलने-डुलने लगेगा. ऐसे में आप अपने बच्चे को खुली जगह पर छोड़ दें क्योंकि इससे वो न केवल जल्दी बैठगा बल्कि जल्दी-जल्दी चलना और भागना भी सीखेगा.
शिशु के सामने पहले कोई खिलौना रखें और फिर उस खिलौनें को उससे दूर रखें और उसे लाने के लिए प्रोत्साहित करें. इससे बच्चा उसे पकड़ने की कोशिश करेगा और इस दौरान वो खुद बैठेगा भी. दरअसल, जब आपका शिशु अपना सिर, पैर और हाथों को ऊपर की तरफ उठाने की कोशिश करेगा तब वो न सिर्फ बैठना भी सीखेगा बल्कि इससे उसकी मांसपेशियां भी मज़बूत होगी.
जन्म से लेकर बच्चे की मालिश तब तक करें जब तक वो अच्छे से चलने या दौड़ने न लग जाएं. दरअसल इससे आपके शिशु का रक्त प्रवाह तो सही होगा ही, साथ-साथ उसकी हड्डियाँ व मांसपेशियाँ भी मज़बूत होगी. वैसे, जिन बच्चों की प्रतिदिन मालिश होती है वो जल्दी से बैठना शुरू कर देते है.
इस एक्सरसाइज को करवाते वक्त आप शिशु के पैरों को पकड़कर ऊपर की तरफ़ करें और जैसे साइकिल के पैडल चलते है वैसे उसके पैरों को चलाएं. यानि कि इसे करते वक्त बच्चे के पैरों को धीरे-धीरे से घुमाएं. इस एक्सरसाइज को करते वक्त शिशु को मज़ा भी आएगा और उसकी कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियां भी मज़बूत होगी.
अन्य तरीके -
ध्यान रखें -
अगर आपके शिशु ने बैठना सीख लिया है तो इस दौरान आपको अपने कमरे में कुछ बदलाव करने होगें. दरअसल, इस वक्त आपका शिशु हर एक वस्तु को पकड़ने की कोशिश करता है. इस वजह से कमरे में से हर उस चीज को हटा दें, जिससे आपके शिशु को किसी तरह की हानि न पहुंचें.
शिशु को बैठना सिखाने के इस पड़ाव में मालिश और खिलौने बड़े काम आते हैं - ये प्रोडक्ट्स मदद करेंगे।

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