
'बिपरजॉय' एक ऐसा नाम जो आजकल हर तीसरे व्यक्ति के जुबान पर है. बीते कुछ दिनों में न्यूज़ और सोशल मीडिया के ज़रिये आपने भी इसका नाम सुना ही होगा. आज के इस आर्टिकल में हम इसी बिपरजॉय के बारे में डिटेल में बात करेंगे. बता दें कि चक्रवाती तूफान बिपरजॉय (Biparjoy) बहुत ही कम समय में खतरनाक रूप ले चुका है. इसका असर भारत के कुछ राज्यों में साफ़ देखा जा सकता है. कहीं पर यह तेज़ बारिश तो कहीं पर तेज़ हवाओं के रूप में अपना असर दिखा रहा है. तो चलिए जानते हैं कि आख़िर यह बिपरजॉय किस बला का नाम है! लेकिन इससे पहले कि हम बिपरजॉय के नामकरण की बात करें, पहले जान लेते हैं कि आख़िर इन चक्रवाती तूफानों का जन्म कैसे होता है!
जब समुद्र के पानी का तापमान बढ़ने लगता है, तो इसके ऊपर की हवा अपने-आप गर्म होने लगती है. इसके कारण हवा का रूख ऊपर की ओर बढ़ने लगता है, और मौजूदा जगह पर कम दबाव पड़ने लगता है. इस कम दबाव वाले क्षेत्र को भरने के लिए ठंडी हवा बढ़ती है. ऐसे में जब इन गर्म और ठंडी हवाओं का मिलन होता है, तो यह एक तूफान को जन्म देती हैं. यही तूफान अपने साथ तेज़ हवाओं के साथ बारिश को भी लाता है.
अब तक जितने भी चक्रवाती तूफान आये हैं, उनके नाम बड़े ही अजीब रहे हैं और हर नाम के पीछे कोई न कोई कहानी रही है. कुछ नाम तो इतने अजब-गजब होते हैं कि उन्हें सुनकर हँसी आ जाती है. इनमें कटरीना, बुलबुल, लीजा, पैलिन, लैरी, हुदहुद जैसे तूफानों के नाम शामिल हैं. ऐसे में यह सवाल मन में आना बहुत ही लाज़िमी है कि ये बिपरजॉय क्या है (Biperjoy kya hai) और इसे यह नाम किसने दिया है! तो चलिए आपकी इस उत्सुकता का जवाब देते हैं.
इस चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का नाम बांग्लादेश ने दिया है. बांग्ला में बिपरजॉय (Biparjoy) का अर्थ विनाशक यानी कि डिजास्टर) होता है. वर्ष 2000 में भारत उसके पड़ोसी देशों ने चक्रवातों का नाम रखने का सिलसिला शुरू किया. भारत के अलावा इन देशों में बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाइलैंड का नाम शामिल हैं. साल 2019 में ईरान, कतर, सऊदी अरब और यूएई और यमन को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है. इस तरह अब तक इस लिस्ट में भारत समेत कुल 13 देश शामिल हैं. जब किसी चक्रवात तूफान के आने की आशंका बनती है, तो यही 13 देश अपने क्रमानुसार उसका नामकरण करते हैं. इसके साथ संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड मेट्रोलाजिकल आर्गेंनाइजेशन (World meteorological organization) ने चक्रवाती तूफानों के नाम तय करने के लिए कुछ नियम बनाए हैं.
आपको जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन आने वाले 25 सालों के तूफानों के नाम भी अभी से तय किये जा चुके हैं. भारत की ओर से गति, तेज, मुरासु, आग, नीर, प्रभंजन घुरनी, अंबुल जलाधि और वेग नाम दिये गए हैं. बांग्लादेश ने अर्नब और कतर ने शाहीन व बहार नाम तय किया है. वहीं, पाकिस्तान ने लुलु और म्यांमार ने पिंकू नाम तय किए हैं.
बता दें कि तूफान का नाम रखने के दौरान इसकी गति पर ग़ौर किया जाता है. जिस तूफान की गति 63 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है, उसी का नाम रखा जाता है. अगर किसी तूफान की गति 118 किलोमीटर प्रतिघंटा से ऊपर होती है, उसे गंभीर श्रेणी में माना जाता है. वहीं अगर किसी तूफान की गति 221 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक होती है, तो उसे सुपर चक्रवाती तूफान (Super cyclonic storm) कहा जाता है.
उम्मीद है कि अब आप समझ गए होंगे कि चक्रवाती तूफान का जन्म और नामकरण कैसे होता है!




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