सारांश

क्या आप भी सोच रहे हैं कि कैसे आपको जुड़वाँ बच्चे होने का सौभाग्य मिले? क्या आप जानना चाहते हैं कि कैसे आपके जुड़वाँ बच्चे हो सकते हैं? हमारी नहीं, विज्ञान की बात सुनें! तो चलिए देखते हैं विज्ञान के हिसाब से ऐसे कौन से 7 कारक हैं जो जुड़वाँ बच्चे होने की संभावना को बढ़ाते हैं -
जुड़वाँ बच्चों का होने का एक बहुत बड़ा कारण है -हरेडिटेरी (अनुवांशिक). लेकिन इस कारण में एक हैरानी वाली बात है जुड़वाँ बच्चों के होने की संभावना सिर्फ तभी ज्यादा होती है जब आपकी माँ (मायके) की फैमिली में ऐसा हो. चाहे आपके पार्टनर की फैमिली में कितने ही जुड़वाँ बच्चे क्यों न हो, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता.
जी हां, यदि आपके पहले से ही ट्विन्स हैं तो ऐसा दोबारा होने की संभावना हो सकती है. जानते हैं आपके लिए ये बहुत मुश्किल होगा लेकिन अगर जुड़वाँ होने के बाद, आप एक और बच्चे के बारे में सोच रहे हैं तो इस कारक को ध्यान में रखें.
जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे जुड़वाँ बच्चे होने की संभावना भी बढ़ती जाती है. रीसर्च के अनुसार, 35 वर्ष से ऊपर की महिलााओं में एफएसएच यानी फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन की मात्रा ज्यादा होने लगती है जिसके कारण ट्विन्स हो सकते हैं. यह हार्मोन महिलाओं में ओवुलेशन और फर्टिलाइजेशन के लिए ओवरी से एग के रिलीज को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होता है. ज्यादा एग का रिलीज होना मतलब ज्यादा चान्सेस!!
बहुत दुख की बात है कि इस देश में बहुत सी महिलाओं को कन्सीव करने में बहुत मुश्किल होती है जिसके चलते उन्हें फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का सहारा लेना पड़ता है, और इस तरह के ट्रीटमेंट में जुड़वाँ बच्चों की ज्यादा संभावना होती है, क्योंकि फर्टिलिटी से जुड़ी दवाइयां आपके शरीर में हार्मोन्स को बढ़ाती हैं.
महिलायें जो मोटापे की शिकार होती हैं - 30 से ज्यादा BMI - उनके हेअल्थी BMI वाली औरतों के मुकाबले जुड़वाँ बच्चे होने की संभावना ज्यादा होती है. इस स्थिति का व्यंग्य देखिये - मोटापे से ग्रसित औरतों को ही कन्सीव करने में सबसे ज्यादा मुश्किल होती है.
ऐसा देखा गया है कि छोटे कद वाली महिलाओं के मुकाबले, ऊचें कद वाली औरतों के जुड़वाँ बच्चे होते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि अच्छे कद वाली औरतों में इन्सुलिन ग्रोथ फैक्टर का स्तर ज्यादा होता है.
ऐसा माना जाता है कि जो महिलायें ब्रैस्टफीडिंग के दौरान कन्सीव करती हैं उनके जुड़वाँ बच्चे होने के ज्यादा चांस होते हैं. ये भी सच है कि ब्रैस्टफीडिंग के दौरान फर्टिलिटी कम हो जाती है और प्रेग्नेंट होना मुश्किल होता है लेकिन ये भी सच है कि ऐसे समय में प्रेग्नेंट होना मतलब जुड़वाँ बच्चों का अंदेशा.
फर्टिलिटी और ओवुलेशन को सपोर्ट करने वाले प्रोडक्ट्स आपकी प्रेग्नेंसी की यात्रा को थोड़ा आसान बना सकते हैं।

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