
स्कूल के विषय में एक बड़ी ही लोकप्रिय कहावत है कि जब हम वहां जाना शुरु करते हैं तब रोते हैं और जब स्कूल खत्म हो जाता है तब वहां से हमेशा के लिए निकलने में रोना आ जाता है । लेकिन इस कहावत से परे, अगर आप अपने बच्चे को किंडर गार्डन या प्री नर्सरी भेजने के लिए उत्साहित हैं पर वो स्कूल जाने से मना करता है या फूट-फूट कर रोने लगता है तो उसको मनाने के लिए आपको कितनी मेहनत करनी पड़ती है और बच्चे को कितने प्रलोभन देने पड़ते हैं...बड़ी मशक्कत के बाद मुंह लटका कर बच्चा स्कूल वैन में बैठने को तैयार होता है । शुरुआती दिनों में बच्चों का ये व्यवहार स्वभाविक है लेकिन रोज़ वो स्कूल जाने में रुचि ना दिखा रहा हो कई तरह के बहाने बना रहा हो तो आपको सचेत हो जाना चाहिए । तो आईए इस लेख के द्वारा रोज़ाना की इस समस्या से उबरने के तरीकों पर विचार किया जाए । सबसे पहले आपको यकींन दिला दें कि सामान्यतया ये रोने वाला दौर थोड़े दिन बाद ही खत्म हो जाएगा जैसे-जैसे बच्चा नए वातावरण में घुलता जाऐगा उसके नए दोस्त बनेंगे और फिर बच्चा स्कूल जाने को लेकर उत्साहित रहेगा । आपको याद हो ना हो पर आपने भी पहली बार स्कूल जाने के दौरान आंसू बहाए होंगे इसलिए अब रोते हुए बच्चे को स्कूल भेजने को लेकर अधिक फिक्रमंद होने की बजाए आपको एक निश्चित रुटीन फॉलो करनी चाहिए ताकि बच्चा भी रोज़ाना सुबह उठ कर स्कूल के लिए खुद को मानसिक रुप से तैयार कर सके। कुछ बच्चे स्कूल जाने के पहले अधिक रोते क्यों हैं? दरअसल शुरुआत में इस समस्या का एक कारण सेपरेशन ऐन्जाइटी हो सकता है ।बच्चों के चंचल मन में अपने पैरेंट्स से दूर होने का डर समा जाता है उन्हें ये लगता है कि वो जब आएंगे तो पैरेंट्स उन्हें मिले ही ना । कई बच्चे अपने पसंदीदा पेट्स के लिए भी ऐसा महसूस करते हैं । कई बच्चों को स्कूल का माहौल नहीं पसंद आता है या हो सकता है कि उन्हें किसी टीचर का भय हो इसलिए भी वो रोज़ाना स्कूल जाने में आनाकानी करने लगते हैं । कुछ बच्चों को सवेरे उठ कर स्कूल पहुंचना पसंद नहीं आता, आलसी प्रवृति के बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं । कई छोटे बच्चे तो अचानक से स्कूल में ही रोना शुरु कर देते हैं और आनन-फानन में उन्हें घर वापस लाना पड़ता है । इसके पीछे का कारण ये हो सकता है कि बच्चा घर को मिस कर रहा हो या उसे कुछ बात याद आ हो । स्कूल जाने के लिए कैसे करें बच्चों को हैप्पिली रेडी ? जब बच्चा आपकी बातें गौर से सुनने समझने लगे तब से ही उसके दिमाग में आपको अच्छी बातें डालनी चाहिए । 3-6 साल की उम्र तक बच्चे का मानसिक विकास चल रहा होता है इस वक्त वो नई बातों को सीखने के लिए सबसे अधिक तत्पर रहते हैं । इस दौरान ही आप उसे अन्य स्कूल जाने वाले बच्चों से रुबरु कराएं साथ ही स्कूल के विषय में उत्साहजनक बातें उसको समझाएं ताकि प्री स्कूल के लिए वो खुशी-खुशी तैयार हो जाए । • स्कूल के किसी टीचर की मदद से आप बच्चे की रोनी सूरत को खुशहाल बना सकती हैं । आप स्कूल में किसी टीचर के पास अपने बच्चे को देने के लिए रोज़ सरप्राइज रख सकती हैं...हर दिन जिसको लेकर बच्चा उत्साहित रहे और एक भी दिन गिफ्ट मिस ना करना चाहे । • जब वो स्कूल से आए तो उससे खूब सारी बातें करें ताकि वो अपनी मन की बात आपसे कह सहे साथ ही उसका डर भी कम हो सकेगा । • स्कूल भेजने के दौरान सख्ती अपनाते हुए आप बच्चे को स्कूल में ही छोड़ देने या हमेशा के लिए अपने से दूर कर देने की धमकियां ना दें इससे वो असुरक्षित महसूस करने लगेगा । • आप उसके पसंद का स्नैक बनाकर उसे लंच में खाने को कह सकती हैं इस तरह वो स्कूल में आपके टेस्टी सरप्राईज पा कर खुश हो जाएगा । • पढ़ाई के दबाब को कम करते रहें, उसके साथ आप भी मेहनत करें , कुछ लिखे-पढ़ें तभी वो मज़े से अपना टास्क पूरा कर सकेगा । • स्कूल के बाद के समय में उसे खेलने दें लेकिन होमवर्क को लेकर भी सजग रहना सिखाएं ताकि सोने के पहले वो स्कूल होमवर्क पूरा कर ले ।



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