
सारांश




प्रेग्नेंसी के पहले 24 हफ्तों के दौरान, फीटस तेज़ी से ग्रो करता है. जहाँ पहले ट्राइमेस्टर के ख़त्म होते-होते हार्ट, ब्रेन, शरीर के अंग और संरचनाओं का निर्माण होकर वह मैच्योर होने लगते हैं वहीं चेहरे के नैन-नक्श और भी साफ-साफ दिखाई देने लगते हैं. बारहवें हफ्ते तक फीटस लगभग एक नींबू के आकार का हो जाता है और फ्री मूवमेंट करने लगता है. दूसरे ट्राईमेस्टर में हड्डियाँ और मसल्स और भी मजबूत हो जाती हैं, और फेफड़े, लीवर तथा स्प्लीन जैसे ऑर्गन्स के फंक्शन डेवलप होने लगते हैं. 24 हफ्ते तक, फीटस का वजन लगभग 1.5 पाउंड और लंबाई लगभग 12 इंच होती है और शिशु बाहरी आवाजों और स्पर्श पर रिएक्शन करने लगता है. अब आगे आपको बताएँगे शिशु के पच्चीसवें हफ्ते से बत्तीसवें हफ्ते तक की यात्रा के बारे में.
प्रेग्नेंसी के इस हफ्ते में फीटस का आकार 13.6 से 14.8 इंच तक होता है और वजन लगभग 700 से 1000 ग्राम होता है. शिशु के अंग और परिपक्व हो जाते हैं और फेफड़ों में ऐयर सैक बनने लगते हैं और साथ ही ब्रेन डेवलपमेंट भी तेजी से होता है. इस स्टेज पर बच्चे की सुनने और स्वाद जैसी इंद्रियां अधिक मजबूत हो जाती हैं और अब फीटस एक नवजात शिशु जैसा दिखने लगता है. इस हफ्ते के("25 week pregnancy symptoms in Hindi) बाहरी लक्षण इस प्रकार हैं.
माँ को बच्चे की हलचल बढ़ी हुई महसूस हो सकती है.
यूटरस के फैलने के कारण निचली पीठ पर दबाव महसूस हो सकता है.
वेजाइनल स्राव बढ़ सकता है.
बढ़ते हुए यूटरस से पेट पर दबाव पड़ता है जिससे एसिड रिफ्लक्स और डायाफ्राम को संकुचित हो जाने के कारण गहरी साँस लेने में कठिनाई हो सकती है.
अब शिशु लगभग 14 इंच लंबा होता है और उसका वज़न 2.2 पाउंड के आस-पास होता है. शिशु के फेफड़ों का विकास जारी रहता है और ऐयर सैक में सर्फेक्टेंट का प्रोडक्शन शुरू हो जाता है, जो साँस लेने के लिए ज़रूरी है. इस स्टेज पर शिशु की आँखें पूरी तरह से बन जाती हैं और पलकें भी खुलने लगती हैं. इस दौरान (26 week pregnancy symptoms in Hindi) बाहरी लक्षणों में
माँ के पेट, ब्रेस्ट और जाँघों की त्वचा में खिंचाव आने के कारण स्ट्रेच मार्क्स बन सकते हैं.
कुछ महिलाओं को वॉटर रिटेंशन के कारण हाथ, पैर और चेहरे में सूजन भी आ सकती है जिसे एडिमा के नाम से जाना जाता है.
पीठ दर्द के साथ कुछ महिलाओं को ब्रेक्सटन हिक्स भी महसूस होते हैं.
प्रेग्नेंसी के 27वें सप्ताह के दौरान शिशु की लंबाई लगभग 14 इंच होती है और फेफड़ों का विकास जारी रहता है. इस स्टेज पर शिशु एमनियोटिक फ्लुइड को अंदर लेने और छोड़ने लगता है जिससे उसे साँस लेने का अभ्यास भी होता है. इस हफ्ते के प्रेग्नेंसी के बाहरी (27 week pregnancy symptoms in Hindi) लक्षणों में
यूटरस के बढ़ते आकार के कारण पीठ दर्द और बेचैनी बढ़ सकती है.
डायाफ्राम पर बढ़ते हुए यूटरस का प्रेशर पड़ता है जिससे साँस फूलने या साँस लेने में हल्की तकलीफ भी हो सकती है.
सात महीने की इस प्रेग्नेंसी में (7 mahine ki pregnancy) 28 हफ्ते के शिशु का वजन लगभग 2.2 पाउंड या लगभग 1 किलो होता है और वह बाहरी प्रकाश, ध्वनि और स्पर्श पर रिएक्ट करता है. इस स्टेज पर ब्रेन का विकास तेजी से हो रहा होता है और ब्रेन की संरचना अधिक जटिल और वह आकार में कुछ और बड़ा हो जाता है. फेफड़ों में सर्फेक्टेंट का प्रोडक्षन बढ़ता है और बच्चे के मूवमेंट को माँ अक्सर महसूस करती है. कुछ अन्य (28 week pregnancy symptoms in Hindi) लक्षणों में
गर्भाशय बढ़ता जाता है जिससे पेट के आकार में भी बढ़त होती है.
जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता है, वैसे-वैसे कई माँओं को ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन होते रहते हैं.
पेट पर बढ़ते हुए दबाव के कारण सीने में जलन और अपच की समस्या हो सकती है.
पैरों पर दबाव बढ़ने से वैरिकोज़ नसें उभर सकती हैं.
29वें हफ्ते के दौरान, शिशु का वजन लगभग 2.5 से 3 पाउंड तक होता है और लंबाई 15 से 17 इंच होती है. बच्चे के सभी ऑर्गन्स का विकास जारी रहता है और ब्रेन के अलावा न्यूरो सिस्टम भी मजबूत होता रहता है. इस दौरान माँ को ये लक्षण (29 week pregnancy symptoms in Hindi) दिखाई दे सकते हैं.
जैसे-जैसे पेट बढ़ता है वैसे-वैसे स्किन में खिचाव आता है जिससे स्ट्रेच मार्क्स डेवलप हो सकते हैं.
हार्मोनल परिवर्तन और शरीर के अंदर बढ़ते हुए शिशु की जरूरतें थकावट का कारण बन सकती हैं.
बढ़ता हुआ यूटरस, मूत्राशय पर दबाव डालता है, जिससे बार-बार पेशाब आने लगता है.
इस हफ्ते में शिशु का वजन तेजी से बढ़ता है और त्वचा के नीचे फैट का स्टोरेज हो जाता है. हड्डियाँ सख्त होने लगती है, हालाँकि बड़ों की तुलना में ये अभी भी नरम और लचीली होती हैं. गर्भावस्था के बाहरी लक्षणों (30 week pregnancy symptoms in Hindi) में
गर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण गर्भवती माँ को अधिक परेशानी का अनुभव हो सकता है.
अन्य सामान्य लक्षणों में पीठ दर्द, पेल्विक पर प्रेशर, बार-बार पेशाब आना हैं.
पेट बड़ा होने के कारण माँ को सोने में कठिनाई भी होने लगती है.
इस हफ्ते में फीटस लगभग 1.5 से 1.7 किलोग्राम तक होता है और उसका वजन भी काफी बढ़ जाता है साथ ही शरीर में फैट जमा होने लगता है. फेफड़े, डाइजेस्टिव सिस्टम और सेंट्रल नर्वस सिस्टम जैसे अंग 31वें हफ्ते में और परिपक्व होते हैं. इसके अलावा, सेंट्रल नर्वस सिस्टम न्यूरॉन्स के बीच के कनेक्शन को और मजबूत करता है और मोटर स्किल्स को भी बढ़ाता है. इस हफ्ते में आपको (31 week pregnancy symptoms in Hindi) कुछ ऐसा अनुभव हो सकता है.
न्यूरो सिस्टम के मैच्योर होने से फीटस की गतिविधियां अधिक साफ़ और स्पष्ट हो जाती हैं.
गर्भवती माताओं को बच्चे के मूवमेंट्स का एक रेगुलर पैटर्न भी दिखाई दे सकता है, जिसमें किक करना, घूमना और स्ट्रेच करना शामिल हैं.
स्तन लगातार बड़े होते हैं और ब्रेस्ट फीडिंग के लिए तैयार होने लगते हैं.
बढ़ते हुए गर्भाशय के कारण मलाशय पर दबाव पड़ने के कारण बवासीर भी हो सकती है.
32वें हफ्ते में बच्चे का वज़न आम तौर पर लगभग 1.9 किलोग्राम तक होता है और इस दौरान उसके अंदरूनी अंग मजबूत हो रहे होते हैं और वज़न बढ़ता रहता है. माँ का पेट लगातार बढ़ता रहता है जिससे वह भारी और फैला हुआ महसूस होने लगता है. इस दौरान होने वाले (32 week pregnancy symptoms in Hindi) बाहरी लक्षणों में
ब्रेक्सटन हिक्स जोकि हल्के संकुचन हैं 32वें सप्ताह के बाद पूरी प्रेग्नेंसी में महसूस किए जा सकते हैं.
पीठ और पेल्विक एरिया में दर्द का अनुभव.
साँस फूलना और साँस लेने में कठिनाई महसूस होना खासकर लेटते समय.
हार्मोनल चेंजेज़ के कारण सीने में जलन और अपच होना.
पेट, ब्रेस्ट और जाँघों पर खिंचाव के कारण स्ट्रेच मार्क्स का होना.
गर्भावस्था के आगे बढ़ने के साथ ही शारीरिक परेशानी और थकावट का अनुभव होना.
इसे भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी में कॉन्ट्रैक्शन का मतलब क्या होता है?
प्रेग्नेंसी की इस स्टेज पर आपके लिए ये ज़रूरी है कि आप अपने डॉक्टर के साथ शेड्यूल सभी प्री नेटल एपाइंटमेंट्स पर लगातार मिलते रहें और किसी भी समय कोई असामान्य लक्षण या तकलीफ़ का अनुभव होने पर उनसे तुरंत परामर्श लें.
बढ़ते पेट, स्ट्रेच मार्क्स और थकान के इस सफर में आपकी त्वचा और शरीर को चाहिए कोमल देखभाल और पोषण.

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