
सारांश
गोद भराई, जिसे अंग्रेज़ी में बेबी शॉवर कहते हैं, एक पारंपरिक भारतीय रस्म है जो आमतौर पर गर्भावस्था के 7वें या 8वें महीने में, यानी तीसरी तिमाही में की जाती है. इसमें परिवार और सहेलियां मिलकर होने वाली माँ को आशीर्वाद, फल, मिठाई, कपड़े और गहने भेंट करती हैं, ताकि माँ और बच्चे दोनों की सेहत अच्छी रहे और शिशु का भविष्य सुखद हो. माँ के लिए सबसे अच्छे गिफ्ट हैं मैटरनिटी कपड़े, प्रेगनेंसी पिलो और ड्राई फ्रूट्स, जबकि बच्चे के लिए नरम सूती कपड़े, बेबी ब्लैंकेट, डायपर और चांदी की पायल शुभ माने जाते हैं. शुभ मुहूर्त पंडित जी से ज़रूर निकलवाएं और रस्म के दौरान माँ को आराम और हाइड्रेशन का ध्यान रखना चाहिए (ACOG).
प्रेग्नेंसी अपने आप में बहुत खूबसूरत समय होता है. होने वाली माँ को इस दौरान चाहे कितनी ही चुनौतियों का सामना करना पड़े, फिर भी बच्चे के जन्म को लेकर उसका उत्साह कम नहीं होता. हमारे देश में एक प्यारी परंपरा है, जिसमें होने वाले बच्चे और माँ, दोनों को सेहतमंद और लंबी आयु का आशीर्वाद देने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. इसे गोद भराई या अंग्रेज़ी में बेबी शॉवर (Baby Shower meaning in Hindi) कहते हैं.
दरअसल हिंदू परंपरा में 16 संस्कारों का ज़िक्र मिलता है, जिनकी शुरुआत गर्भाधान संस्कार से होती है, और गर्भावस्था से जुड़ा संस्कार "सीमन्तोन्नयन" इसी परंपरा का हिस्सा है, जिसे आज गोद भराई के रूप में मनाया जाता है (Encyclopaedia Britannica). माना जाता है कि गर्भ में पल रहा शिशु बाहरी आवाज़ें सुन सकता है, और आधुनिक चिकित्सा भी इसकी पुष्टि करती है, क्योंकि लगभग 24 सप्ताह से भ्रूण की सुनने की क्षमता विकसित होने लगती है (NHS; ACOG). इसीलिए जन्म से पहले ही शिशु को रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ सुनाने की परंपरा रही है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए और अपने करीबी लोगों के बीच खुशियां बांटने से जुड़ी एक रस्म है, गोद भराई.
बेबी शॉवर, जिसे हिंदी में गोद भराई कहते हैं, एक पारंपरिक भारतीय रस्म है जो गर्भावस्था के 7वें या 8वें महीने में होने वाली माँ के लिए की जाती है. इस रस्म में परिवार और सहेलियां मिलकर माँ को आशीर्वाद, फल, मिठाई, कपड़े और गहने भेंट करती हैं ताकि उसकी और बच्चे की सेहत अच्छी रहे.
यह बच्चे के जन्म से पहले ही उसके आने का स्वागत करने की रस्म है. इसमें परिवार के सदस्यों के साथ-साथ परिचित लोग, खासकर महिलाएं शामिल होती हैं. ये महिलाएं होने वाली माँ को उपहार देने के साथ-साथ बच्चे की लंबी आयु, सेहतमंद भविष्य और माँ के लिए ढेरों खुशियों की दुआएं भी देती हैं. गर्भावस्था के दौरान परिवार और दोस्तों का ऐसा भावनात्मक सहयोग माँ के तनाव को कम करता है और उसका मनोबल बढ़ाता है (March of Dimes).
"गोद भराई" शब्द का मतलब इस रस्म के दौरान माँ को मिलने वाले आशीर्वाद से भी जुड़ा है, जिसका सीधा अर्थ है कि हमेशा के लिए उसकी गोद भरी रहे और उसके बच्चे की आयु लंबी हो.
इस रस्म के समय घर में विशेष पूजा रखी जाती है. घर की बुज़ुर्ग महिलाएं माँ और बच्चे को आशीर्वाद देती हुई गीत गाती हैं और माँ का पूरा श्रृंगार किया जाता है. माँ को हल्दी, मेहंदी, बालों में गजरा आदि लगाया जाता है और मेहमानों को भी ऐसी चीज़ें बांटी जाती हैं. हंसी-मज़ाक के साथ माँ को तरह-तरह के पकवान खिलाए जाते हैं और कहीं-कहीं उसे झूला झुलाने की भी परंपरा है.
गोद भराई की रस्म आमतौर पर गर्भावस्था के 7वें महीने में, शुक्ल पक्ष के शुभ मुहूर्त में की जाती है. कुछ परिवार इसे 8वें महीने में भी करते हैं. सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ माने जाते हैं. राहुकाल और अमावस्या से बचें, और पंडित जी से मुहूर्त ज़रूर निकलवाएं ताकि माँ और बच्चे पर शुभ प्रभाव पड़े.
अलग-अलग समुदाय के लोग अलग-अलग समय पर गोद भराई करते हैं, लेकिन ज़्यादातर यह रस्म मातृत्व के आखिरी पड़ाव यानी तीसरी तिमाही में ही की जाती है. तीसरी तिमाही की शुरुआत लगभग 28वें सप्ताह से होती है, और इस समय तक शिशु का काफ़ी विकास हो चुका होता है (Mayo Clinic). इसी वजह से माँ इस तरह के उत्सव में आसानी से शामिल हो पाती है. इसलिए कुछ लोग सातवां महीना पूरा होने के बाद यह आयोजन करते हैं, तो कुछ आठवां महीना बीतने पर.
हमारे देश में कुछ समुदाय ऐसे भी हैं जहां गोद भराई की रस्म नहीं होती. यह बात दिलचस्प है कि आजकल कुछ हॉस्पिटल भी माँ और होने वाले बच्चे के लिए बेबी शॉवर का आयोजन करते हैं, जिसमें ख़ास फोटोशूट और गिफ्ट्स तक की व्यवस्था होती है.
गोद भराई में सबसे अच्छे गिफ्ट हैं, होने वाली माँ के लिए आरामदायक मैटरनिटी कपड़े, स्ट्रेच मार्क क्रीम, प्रेगनेंसी पिलो, पौष्टिक ड्राई फ्रूट्स और गहने. बच्चे के लिए नरम सूती कपड़े, झबला सेट, डायपर, बेबी ब्लैंकेट और चांदी की पायल शुभ माने जाते हैं. चांदी के सिक्के और शगुन का लिफाफा भी पारंपरिक रूप से दिए जाते हैं.
चूंकि बेबी शॉवर माँ और बच्चे दोनों को आशीर्वाद देने के लिए होता है, इसलिए इसमें दोनों से जुड़ी वस्तुएं गिफ्ट के रूप में दी जाती हैं. नीचे कुछ बेहतरीन गिफ्ट ऑप्शन दिए गए हैं, जिन पर आप विचार कर सकती हैं.
शिशु के लिए (For Baby):
माँ के लिए (For Mother):
Mylo की पैरेंटिंग एक्सपर्ट टीम का कहना है कि बेबी शॉवर या गोद भराई की रस्म माँ को एक उत्सव में शामिल होने का मौका देती है, इसलिए इसे ज़रूर एन्जॉय करें, लेकिन कार्यक्रम के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है. लंबे समय तक खड़े रहने से बचें, बीच-बीच में आराम करती रहें और खूब पानी पीती रहें (ACOG). अगर आपको किसी के बेबी शॉवर में जाना है, तो आप Mylo से मॉम-टू-बी या बेबी के लिए सेल्फ केयर प्रोडक्ट्स मंगा सकती हैं. दिए गए लिंक से Mylo ऐप डाउनलोड करें और हमारा ऑनलाइन बेबी केयर स्टोर ज़रूर एक्सप्लोर करें.
गोद भराई किस महीने में होती है?
गोद भराई आमतौर पर गर्भावस्था के 7वें या 8वें महीने में की जाती है, यानी तीसरी तिमाही में, जब शिशु का विकास काफ़ी हो चुका होता है (Mayo Clinic). शुभ मुहूर्त देखकर ही तारीख तय करें.
गोद भराई में क्या-क्या सामान चाहिए?
नारियल का जोड़ा, साड़ी, फल, मिठाई, नए कपड़े, कंगन या चूड़ियां, मेहंदी, कुमकुम और शगुन का लिफाफा. पूजा की सामग्री और माँ के श्रृंगार का सामान भी शामिल किया जाता है.
गोद भराई और बेबी शॉवर में क्या अंतर है?
गोद भराई एक पारंपरिक भारतीय रस्म है जिसकी जड़ें "सीमन्तोन्नयन" संस्कार में हैं (Encyclopaedia Britannica), जबकि बेबी शॉवर पश्चिमी संस्कृति से आया है. आजकल कई परिवार दोनों को मिलाकर एक साथ मनाते हैं.
गोद भराई के गीत कौन से हैं?
"राम जी की निकली सवारी" और "मेरे घर आए एक नन्हा मुन्ना" जैसे पारंपरिक गीत गोद भराई में गाए जाते हैं.
गोद भराई पहले बच्चे में होती है या दूसरे में?
पारंपरिक रूप से गोद भराई पहले बच्चे में की जाती है, लेकिन आजकल कई परिवार दूसरे बच्चे में भी यह रस्म खुशी-खुशी मनाते हैं.
गोद भराई के लिए सबसे अच्छा गिफ्ट क्या है?
माँ के लिए मैटरनिटी कपड़े, प्रेगनेंसी पिलो, स्ट्रेच मार्क क्रीम और ड्राई फ्रूट्स, तथा बच्चे के लिए नरम सूती कपड़े, बेबी ब्लैंकेट, डायपर बास्केट और चांदी की पायल सबसे अच्छे गिफ्ट माने जाते हैं.

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