
ममता,वात्सल्य,प्यार,समर्पण,त्याग,और भी बहुत सारे शब्द ज़हन में आते हैं ,जब माँ के नाम का जिक्र ही होता है।सभी शब्दो का समिश्रण है माँ।एक माँ के स्पर्श मात्र से ही बच्चे अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है, तबसे ही वो अपनी माँ के स्पर्श के एहसास को महसूस कर सकता है,और जब वो पैदा होता है तो उसको जब उसकी माँ छूती है तब वो उसके छूने मात्र से ही पहचान जाता है कि वो ही उसकी माँ है। माँ का स्पर्श एक बच्चे के लिए एक औषधि के समान होता है।जब माँ अपन बच्चे को सुलाने की कोशिश करती है ,तो जितना जल्दी वो लोरी से सोता है उससे कहीं ज्यादा वो ही बच्चा अपने माँ के थपकी देने से सोता है। जब माँ बड़े ही दुलार से अपने बच्चे को पुचकारती है,तो वो बच्चा एक अलग ही प्यार की, सुरक्षा की अनुभूति करता है।बच्चा जब रो रहा होता है तो उसको सिर्फ एक बार माँ के द्वारा गोदी उठाने मात्र से ही वो चुप हो जाता है। स्पर्श सिर्फ शरीर को छूने से ही महसूस नही होता बल्कि मन से मन का स्पर्श भी बहुत मायने रखता है।माँ अपने बच्चे का चेहरा देखकर ही बता देती है कि उसके मन मे क्या चल रहा है? माँ अपने बच्चे के हर स्पर्श की परिभाषा पहचानती है,,जब वो बोल नही पाता है,रोता है,चुप रहता है,या फिर वो बहुत खुश होता है। मैंने एक बच्चे से पूछा कि तुम्हे कैसा लगता है जब तुम्हे तुम्हारी माँ किसी गलती पर डांटती है?तो उस बच्चे का जवाब सुनकर आप हैरान हो जाओगे की उसने क्या जवाब दिया,उसने बोला कि ,"जब माँ डांटती है तो बहुत बार गुस्सा आता है कि वो समझती नही है मुझे,लेकिन अगले ही पल जब वो गले लगाती है तो सारा गुस्सा छूमंतर हो जाता है और अपने ऊपर ग्लानि होती है कि मैंने माँ को परेशान किया ।माँ तो हमे हमेशा सही बात पर डांटती है,वो अगर हमपर नाराज़ होती है ,तो गलती से हमे उबारती भी वो ही है।" अगर बच्चा गिरता है तो अपना हाथ पकड़ाकर संभालती भी माँ ही है। इसी पर जब बच्चा बीमार हो जाता है ,तो माँ ही रात -रात भर जागकर उसके माथे पर हाथ फिराती है,उसको अगर बुखार हो जाता है तो ठंडी पट्टी रखकर सारी रात उसको इस बात का एहसास करवाती है कि अगर उसका बच्चा परेशान है तो उसकी माँ भी आराम में नही है,वो उससे ज्यादा परेशानी में है।ये ही तो स्पर्श होता है माँ और बच्चे के बीच। इसी सिलसिले को बढ़ाते हुए मैंने एक माँ से पूछा कि सबसे ज्यादा तसल्ली कैसे मिलती है या बच्चे को अपने प्यार का एहसास कैसे करवाती हो?तो उस माँ ने कहा कि "अपने बच्चे को ज़ोर से गले लगाकर उसके सर पर हाथ फिराने में जो तस्सली मिलती है,जो सुकून मिलता है वो और किसी भी बात में नही।" माँ तो अपने बच्चे के देखने मात्र से पहचान जाती है कि वो खुश है या नही? बच्चा चाहे बेटा हो या बेटी स्पर्श का ,उसके प्यार के एहसास का एक ही तरीका होता है।स्पर्श को अगर एक शब्द में समझना चाहें तो मैं सिर्फ एक ही शब्द का इस्तेमाल करना चाहूंगी कि स्पर्श सिर्फ 'प्यार 'है। स्पर्श को हम कुछ कुछ हिस्सों में बांट सकते हैं कि जैसे :रोते को हुए बच्चे को हँसाने का प्रयास करते हुए स्पर्श करना। :गिरते हुए बच्चे को संभालने की कोशिश करते हुए स्पर्श करना। :रूठे हुए बच्चे को मनाते हुए मनुहार करते हुए स्पर्श करना। :सोते हुए बच्चे को उठाते हुए स्पर्श करना। :जागे हुए बच्चे को प्यारी सी लोरी देकर थपकी के स्पर्श से सुलाने की कोशिश करना। प्यार का स्पर्श हर बच्चे की परवरिश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है।




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