
गर्भावस्था की प्रोसेस से गुजरते हुए बच्चे को जन्म देना एक बड़ी उपलब्धि होती है. हालांकि, काफी एक्साइटिंग होने के साथ-साथ यह एक महिला के शरीर को निचोड़ देने वाला होता है. एक नॉर्मल डिलीवरी के मुकाबले सी-सेक्शन डिलीवरी से रिकवरी में ज्यादा वक्त लगता है. मां को हेल्दी और ज़रूरी रिकवरी के लिए अतिरिक्त ख्याल रखना होता है. डिलीवरी के बाद की देखभाल का यह अहम पहलू है.
सी-सेक्शन से रिकवरी में आमतौर पर 4-6 हफ़्तों का वक्त लगता है. हालांकि, हर महिला की ज़रूरतें अलग होती हैं और हो सकता है कि कुछ के लिए रिकवर होने में 1 महीने तक का वक्त लग जाए जबकि कुछ को इससे भी ज़्यादा. डिलीवरी के वक्त पेट पर लगाए गए टांकों को ठीक होने में वक्त लगता है और ऐसे में महिलाओं को भारी सामान या मुश्किल एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए.
डिलीवरी के बाद होने वाला अवसाद और चिंता भी इस दौरान हो सकती है, लेकिन यह बेहद आम समस्या है और इससे आसानी से निपटा जा सकता है.
सी-सेक्शन से रिकवरी के दौरान अक्सर थकान और बेचैनी लगती है. इसलिए, डॉक्टर आपको ज़्यादा से ज़्यादा आराम और दर्द से राहत के लिए दवाइयां देते हैं.
सी-सेक्शन डिलीवरी के लिए एक बड़ी सर्जरी की जाती है और इसका मतलब है कि इससे उबरने के लिए शरीर को ज़्यादा वक्त चाहिए होता है. सी-सेक्शन के बाद रिकवरी में 6-8 हफ़्ते लग सकते हैं. महिलाओं को यह सलाह दी जाती है कि वे ज़्यादा से ज़्यादा आराम करें और जब भी मौका मिले एक अच्छी नींद ले लें. ज़रूरी हो, तो आराम के दौरान बच्चे की देखभाल के लिए किसी की मदद भी मांग सकती हैं.
मांएं कुछ टिप्स की मदद से अपने शरीर को डिलीवरी के बाद की ज़रूरी देखभाल दे सकती है, जैसेः
· सिढ़ियां चढ़ने से बचें.
· बच्चे की सभी ज़रूरी चीज़ें पास ही रखें ताकि आपको कम से कम चलना पड़े.
· बच्चे के अलावा और कोई भी भारी चीज़ न उठाएं
· व्यायाम करने से बचें.
सी-सेक्शन से रिकवरी के दौरान दर्द की समस्या हो सकती है खासतौर पर जहां कट लगा हो या अंदरुनी घावों में. अगर दर्द सहन नहीं हो रहा हो, तो यह बेहतर होगा कि आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें और ज़रूरी दवाएं लें. हीटिंग पैड भी इसमें मददगार साबित हो सकते हैं.
सी-सेक्शन डिलीवरी से रिकवर होने में लगने वाले समय में एक अच्छी डायट ज़रूरी होती है. दूसरी तरफ, बच्चे को उसका पूरा पोषण मां के दूध के जरिये ही मिलता है, इसलिए मां को पोषण से भरी चीज़ें खानी चाहिए. इनमें प्रोटीन, फायबर के अलावा अन्य ज़रूरी पोषक तत्व शामिल हैं. इसके अलावा सारा दिन शरीर में पानी की कमी न होने दें.
बच्चे के जन्म के बाद, महिलाओ के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं फिर चाहे वो ब्रेस्ट का बढ़ना हो या वजायनल ड्रायनेस हो, रात में पसीना आने की दिक्कत हो या फिर हेयरफॉल की समस्या हो. इनके अलावा वजायनल डिस्चार्ज भी एक समस्या हो सकती है. इन सबको मैनेज करने के कुछ तरीके नीचे दिए गए हैः
· वजायनल ड्रायनस दूर करने के लिए लुब्रिकेंट्स
· दर्दनिवारक दवाइयां
· हेयरफॉल के लिए ट्रीटमेंट
· नाइट स्वेट से निपटने के लिए ढीले पजामें या पैंट पहनें
डिलीवरी के बाद की देखभाल में रेगुलर चेकअप करवाना बेहद अहम होता है. इसमें नीचे बताई गई चीज़ों पर खास ध्यान दिया जाता हैः
· डिलीवरी के बाद के अवसाद और चिंता से निपटने के तरीके
· बर्थ कंट्रोल पर कंसल्टेशन
· नवजात बच्चे को लेकर सवाल और जवाब
· किसी गंभीर स्थिति से निपटने के तरीके
सी-सेक्शन से रिकवरी की प्रक्रिया में ऐसा नहीं हो सकता कि मां अपने बच्चे को ब्रेस्टफ़ीडिंग न करवाए. बच्चे के जन्म के साथ ही यह शुरू हो जाती है. हालांकि, सी-सेक्शन से रिकवरी के दौरान कुछ पोजिशन में ब्रेस्टफ़ीडिंग करवाना काफी फायदेमंद साबित होता है.
इस पोजिशन में मां करवट लेकर सोती है और बच्चे को बगल में सुलाकर ब्रेस्टफ़ीडिंग करवी है. इसमें, मां अपने बच्चे को अपने हाथ से सहारा देती है, ताकि वो असानी से ब्रेस्ट तक पहुंचकर दूध पी सके. एक बार बच्चा फ़ीडिंग करने लगे, तो मां अपना एक हाथ सिर के नीचे रखकर सो सकती है ताकि उसकी गर्दन में खिंचाव न हो.
इस पोजिशन में मां अपनी कोहनी को एक तरफ मोड़कर बच्चे को फ़ीडिंग करवाती है. इसो थोड़ा आरामदायक बनाने के लिए, तकिये का सहारा लिया जा सकता है और मां किसी चेयर पर खुली बाहों से बच्चों को पकड़ सकती है. इस दौरान बच्चे के सिर को हाथ से सहारा दिया जा सकता है और उसी हाथ से बच्चे का मुंह ब्रेस्ट तक लाना होता है. इस बात का ख्याल रखें कि बच्चे का सिर तकिये पर आराम से रखा गया हो और उसे पूरा सपोर्ट मिल रहा हो.
एक मां को सी-सेक्शन से रिकवर होने में ये टिप्स मददगार साबित हो सकते हैं. बच्चे को अच्छी देखभाल देने के लिए, मां का स्वस्थ होना ज़रूरी है.




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