
अक्सर महिलाएं ये सोच कर परेशान रहती हैं कि ओवूलेशन के दौरान पेट फूलना या ब्लोटिंग नॉर्मल है या नहीं और अगर ऐसा है तो इस दौरान ब्लोटिंग का क्या कारण है?
लेकिन इससे पहले आप को यह समझना होगा कि ओवूलेशन किसे कहते हैं और एक स्त्री के शरीर में कब होता है ओवुलेशन और साथ ही ओवुलेशन के लक्षण क्या हैं?
एक स्त्री का शरीर दो पीरियड्स के बीच में एक बार ओव्यूलेट करता है और इस दौरान शरीर में एग्ज बनते हैं जो यदि स्पर्म्स के साथ निषेचित या मिल जायें तो इस प्रोसेस को फर्टिलाइज़ेशन कहते हैं जिससे प्रेग्नेंसी हो जाती है. यदि यह एग्ज फर्टिलाईज़ नहीं हो पाते हैं तो यह यूट्रस की लाइनिंग में ही मिल जाते हैं. इसलिए ओवूलेशन ही वह प्रक्रिया है जिससे एक स्त्री प्रेग्नेंट होती है.
अब आप जानना चाहेंगी कि ओवूलेशन के लक्षण क्या है?
ओवूलेशन के दौरान कई बाहरी लक्षण देखने को मिलते हैं, जैसे-
शरीर की ऊर्जा का बढ़ जाना,
सेक्स की इच्छा का बढ़ना
शरीर में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन में वृद्धि
बौड़ी टेम्परेचर का बढ़ना
ब्रेस्ट का नरम हो जाना
लाइट स्पॉटिंग
टैस्ट और स्मेल का बढ्ना
अब्ड़ोमिनल ब्लोटिंग और ओवूलेशन पेन
सलाइवा में बदलाव
सर्वाइकल म्यूकस में बदलाव
इन सब लक्षणों में से ओवूलेशन पेन और ब्लोटिंग किसी भी स्त्री के लिए एक दर्दभरा अनुभव होता है.
स्त्री इस दौरान असहज महसूस करने लगती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ओवूलेशन से ठीक पहले, फॉलिकल्स के बढ्ने से ओवरी की सतह में खिंचाव आता है, जिस कारण दर्द पैदा हो सकता है.
इसके साथ ही कुछ और अनचाहे लक्षण उभरने लगते हैं जैसे पेट फूलना, ब्रेस्ट में सूजन और पेट के एक तरफ हल्का ऐंठन या दर्द होना जिसे ब्लोटिंग कहा जाता है.
अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन के अनुसार, ओवूलेशन के दौरान ब्लोटिंग की समस्या ओवूलेशन के आम लक्षणों में से एक है.
आमतौर पर यह दर्द और भारीपन एक से दो घंटे तक रहता है. पर कभी कभी एक या दो दिन तक भी रह सकता है.
कुछ महिलाओं में ओवूलेशन के दौरान पेट के नीचे एक तरफ दर्द भी हो सकता है.
कभी कभी यह दर्द बहुत ज्यादा भी हो सकता है जो वेजाइना से डिस्चार्ज या हल्की ब्लीडिंग से जुड़ा होता है.
ओवूलेशन में ब्लोटिंग का मुख्य कारण है- हार्मोन्स में बदलाव. यह बदलाव ओवूलेशन के बाद या ओवूलेशन के दौरान होता है. इससे आपके डाइज़ेशन में गड़बड़ी पैदा हो सकती है और शरीर में एस्ट्रोजन के लेवल के बढ्ने से शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है. इन बदलावों के कारण ही ब्लोटिंग होने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है.
इस दौरान कई महिलाओं के स्तनों में भारीपन और ओवूलेशन ब्लोटिंग के कारण कुछ वजन भी बढ़ सकता है. वजन बढ़ने का कारण वॉटर रिटेंशन होता है जो हार्मोनल बदलाव से होता है.
ओवूलेशन के दौरान पेट फूलने का समय आपके पीरियड्स के ग्यारहवें और चौदहवें दिन के बीच हो सकता है.
प्रोसेस्ड फूड कम खाएं और दिन भर में ढेर सारा पानी पियें.
रेलेक्सेशन टेकनीक्स का अभ्यास करें
अपने खाने में जितना हो सके उतना कम से कम नमक मिलाएं.
डॉक्टर की सलाह से मैग्नीशियम सप्लीमेंट लें जिससे ब्लोटिंग के सिमटम्स कम होने में मदद मिलती है. कुछ स्पोर्ट्स का नियमित अभ्यास करने से भी ओवुलेशन के दौरान ब्लोटिंग में कमी आती है.
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