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    Pregnancy Journey

    क्या आप जानते हैं आपकी आवाज़ ही आपके शिशु के लिए संगीत है?

    Written on 19 December 2018

    अच्छा और मधुर संगीत सदैव ही हमारे लिए लाभदायक होता है. संगीत हमारे दिल और दिमागी तनाव से भरे क्षणों को भी रिलैक्स कर ऊर्जा का संचार करता है. गर्भावस्था के दौरान तो खासतौर पर आपको अपना मनपसंद संगीत सुनना ही चाहिए क्योंकि ये आपको इस चुनौतीपूर्ण अवस्था में तनाव मुक्त रखता है और आपके मन को भी शांत करता है. साथ ही साथ मधुर संगीत आपके गर्भ में पल रहे आपके शिशु के लिए भी उत्तम साबित होता है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है की आप बाजार से हेड फोन्स लाएं और अपने पेट पर उन्हें लगाकर अपने शिशु को विभिन्न प्रकार का संगीत सुनाना शुरू कर दें.

    आपकी आवाज़ ही आपके शिशु के लिए संगीत है

    आपके गर्भ में पल रहे आपके नन्हें साथी के लिए आपकी आवाज़ से बढ़कर कोई संगीत नहीं. वह आपके चहरे से पहले आपको आपकी आवाज़ से पहचानता है क्योंकि इससे वह गर्भ में होते हुए भी सुन सकता है. आम तौर पर शिशु प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में ध्वनियों को सुनना शुरू कर देते हैं लेकिन उन्हें पहचानना और उन्हें सुनकर हलचल करना वो तीसरी तिमाही में ही शुरू करते हैं. एक माँ की आवाज़ उसके शरीर में हे बनती और गूंजती है. इसलिए आप जब भी बोलती हैं, गाती हैं या जब बोल बोल कर पढ़ती हैं उसकी प्रतिध्वनि आपके शरीर में होती है जिससे आपका शिशु सुनता और पहचानता है.

    क्या बच्चे गर्भ में सीखते हैं?

    2013 में किये गए एक अध्ययन से यह पता चला है की बच्चे गर्भ में सीखना शुरू कर देते हैं. लेकिन सीखने का मतलब यह नहीं की वो आपके किताबें, भाषाएं इत्यादि सीखने लगेंगे अपितु यहां सीखने का तात्पर्य यह है की वो पहचानने की प्रक्रिया के आरम्भ कर देते हैं. इसलिए अधिकतर शोध इस बात की और इशारा करते हैं की अगर आपका शिशु आपके माध्यम से कोई एक गीत आपके गर्भ में रहते हुए लगातार सुनता है और उसके जन्म के बाद वही गीत उससे सुनाया जाए तो वह जल्दी शांत हो जाता है.

    शिशु का मस्तिष्क जन्म के बाद ही विकसित होता है:

    ऊपर दी गयी बातों का यह अर्थ बिलकुल नहीं है की आप अपने पेट पर हेडफोन लगाकर अलग अलग ज्ञान भरी CD इत्यादि बजाना शुरू कर दें और ये सोचने लगें की इससे आपका शिशु गर्भ में ही ज्ञानी बन जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है की शिशु के मस्तिष्क का विकास उसके जन्म के बाद ही होना प्रारम्भ होता है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं की गर्भावस्था में आपके संगीत सुनने का आपके बच्चे को कोई लाभ नहीं मिलेगा.

    दरअसल जब भी आप कोई भी ऐसी क्रिया करती हैं जिस से आपको ख़ुशी मिले या आपका तनाव दूर हो तो उसका आपके शिशु पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. जब भी आप बोलती हैं तो वह और ज़्यादा आपकी आवाज़ की पहचानने लगता है.

    अपनी ख़ुशी के लिए सुनें संगीत :

    गर्भस्थ में आपका प्रसन्न रहना अति आवश्यक है. इसलिए आप जैसे संगीत को पसंद करती हैं, वैसा ही संगीत सुनें. कई ऐसी वेबसाइट्स भी हैं जहाँ प्रेगनेंसी को ध्यान में रखकर कई सारे गीत और धुनें, जिनमे ध्यान से लेकर पॉपुलर पॉप संगीत शामिल हैं, को संग्रहित किया गया है. आप चाहें तो इन्हें यहां से अपना मनपसंद संगीत चुन सकती हैं. बस एक बात का ध्यान रखें. आपका गर्भाशय एक शोर भरी जगह है जहां आपके शरीर में हो रही सभी क्रियाओं की आवाज़ गूंजती रहती है. इसके अलावा आपकी आवाज़ की भी प्रतिध्वनि आपका शिशु लगातार सुन सकता है. इसलिए जब आप गर्भवती हों तो प्रयास करें की धीमी आवाज़ में बोलें और जो भी सुनें उसे धीमी आवाज़ में सुनें. तेज़ आवाज़ और शोर से दूरी रखें.

    लेकिन सबसे ज़रूरी है गर्भावस्था में आपका खुश रहना , क्योंकि जब आप खुश रहेंगी तो आपका शिशु भी प्रसन्ना रहेगा.

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